तमिल किसानों ने प्रदर्शन रोका, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 41 दिनों से प्रदर्शन कर रहे तमिलनाडु के किसानों ने अपने प्रदर्शन को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया है.
यह अस्थायी निलंबन 25 मई तक सशर्त जारी रहेगा.
साउथ इंडियन रिवर लिंकिंग एसोसिएशन के तमिलनाडु ईकाई के अध्यक्ष और किसान प्रदर्शन के नेता अय्याकन्नू ने कहा है कि किसानों के अधिकारों और उनकी मांगों को लेकर किया गया 41 दिन लंबा प्रदर्शन अभी वापस नहीं लिया गया है.
रविवार को प्रेस वार्ता कर अय्याकन्नू ने कहा, ''तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीसामी समेत तमाम राजनीतिक दलों के कहने पर किसान संघर्ष को एक अस्थायी विराम दिया गया है.''

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अय्याकन्नू ने आरोप लगाया है कि मोदी कैबिनेट के मंत्रियों ने तमिल किसानों से मुलाक़ात में दावा किया था कि वे न सिर्फ़ कॉपरेटिव बैंकों बल्कि राष्ट्रीयकृत बैंकों से भी किसानों का लोन माफ़ करवाएंगे. लेकिन कोई वादा पूरा नहीं किया गया.
उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार किसानों के बारे में कतई विचार नहीं कर रही. सरकार सिर्फ़ बड़ी कंपनियों के हितों के बारे में सोच रही है.
उन्होंने बताया कि किसान सोमवार को ट्रेन के ज़रिए तमिलनाडु लौट सकते हैं. साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि उनकी मांगों को अगर नहीं माना गया तो वे 25 मई के बाद इस बार से भी ज़्यादा व्यापक प्रदर्शन करेंगे.
तमिलनाडु के किसानों ने दावा किया है कि उनके आंदोलन को उत्तर भारत के कई राज्यों के किसानों का समर्थन हासिल हुआ है.
रविवार सुबह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलनीसामी ने भी जंतर मंतर पर इस किसानों से मुलाक़ात की थी और उन्हें आश्वासन दिया था कि वे किसानों की मांगों को लेकर पीएम मोदी से मिलेंगे.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 41 दिन चले प्रदर्शन के दौरान इन किसानों ने विरोध प्रदर्शन के कई अलग-अलग तरीकों को आज़माया था.
सबसे पहले किसानों ने नर खोपड़ियों के साथ प्रदर्शन किया. उनके दावे के अनुसार, ये खोपड़ियां आत्महत्या करने वाले किसानों की हैं.
फिर इन किसानों ने एक दिन अर्द्ध-नग्न होकर भी प्रदर्शन किया. भारी गर्मी में किसानों ने सड़क पर लेट कर अपना विरोध दर्ज कराया. किसानों ने सिर के आधे बाल और आधी मूंछ कटाकर भी प्रदर्शन किया.
खोपड़ी के साथ किसानों की तस्वीर इस आंदोलन की पहचान बन चुकी है.
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