योगी आदित्यनाथ और अपर्णा यादव की मुलाकातों की वजह?

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- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव के अनुरोध पर कान्हा उपवन स्थित गोशाला पहुंचे.
ये बीते एक सप्ताह के दौरान अपर्णा यादव की योगी आदित्यनाथ से दूसरी मुलाकात है. पहले वो योगी आदित्यनाथ से लखनऊ के वीवीआईपी स्थित गेस्टहाउस में मिलने पहुंची थीं.
इसके बाद योगी आदित्यनाथ सरोजनीनगर स्थित गोशाला में पहुंचे. इन मुलाकातों को लेकर सियासी चर्चाएं बढ़ गई हैं.
'शिष्टाचारवश मुलाकात'
लेकिन अपर्णा यादव ने अपनी दोनों मुलाकातों के बारे में बीबीसी से बातचीत में बताया, "पहली मुलाकात तो शिष्टाचारवश थी, उसके बाद वे हमारे निवेदन पर गोशाला आए. इसलिए मैं उनकी आभारी हूं."

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साथ ही अपर्णा ने ध्यान दिलाया कि योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में 'नेताजी' और 'अखिलेश भैया' भी मौजूद थे.
अपर्णा यादव की गोशाला लखनऊ के सरोजनीनगर इलाके में है. बीते चार सालों से अपर्णा जीव आश्रय नामक एनजीओ चला रही हैं. एनजीओ की मदद से गाय, भैंस और कुत्तों को कान्हा उपवन ले जाया जाता है और वहां उनकी देखभाल होती है.
अपर्णा बताती हैं, "मैं मुखर रूप से गायों के बारे में, औरतों के बारे में काम करती आ रही हूं. ये कोई आज शुरू नहीं किया है ना है कि इस परिवार में आने के बाद शुरू किया है. ये मैं पहले से कर रही थी और करती रहूंगी क्योंकि ये मेरे दिल के क़रीब है."
दबाव की राजनीति
अपर्णा, योगी आदित्यनाथ से अपनी मुलाकात को सामान्य मुलाकात बता रही हैं, लेकिन उनकी मुलाकातों को बीजेपी से उनकी नज़दीकी के तौर पर भी देखा जा रहा है.
भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की किसी संभावना के बारे में अपर्णा ने कहा, "हमारे बड़े बुज़ुर्ग लगातार कहते रहे हैं कि वर्तमान में हम जो भी करें अच्छे से करें, और भविष्य की बातों को भविष्य के गर्भ में छोड़ दें. भविष्य में जो भी होना है, जो भी हो जैसा भी हो, वो तो भविष्य में ही होगा."

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अपर्णा यादव की बातों से साफ़ है कि उन्होंने भविष्य की राजनीति के लिहाज भारतीय जनता पार्टी का विकल्प खुला रखा है. समाजवादी पार्टी की राजनीति को लंबे समय से देख रहीं वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरॉन की राय दूसरी है.
वो कहती हैं, "जब तक नेताजी हैं तब तक तो अपर्णा यादव भारतीय जनता पार्टी में नहीं जाएंगी. लेकिन उनके बयान से संकेत तो यही मिलता है कि वो समाजवादी पार्टी में कोई हैसियत वाली जगह चाहती हैं."
मेहनत करने की ज़रूरत
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर लंबे समय से नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता अपर्णा यादव और योगी आदित्यनाथ की मुलाकातों के बारे में कहते हैं, "मौजूदा परिपेक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी को अपर्णा की कोई ज़रूरत तो है नहीं, उनके अपने लोगों की संख्या 325 है. अपर्णा इन मुलाकातों के ज़रिए समाजवादी पार्टी के अंदर ही संदेश देना चाहती होंगी, ये एक तरह से दबाव की राजनीति हो सकती है."
अपर्णा यादव इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की रीता बहुगुणा जोशी से लखनऊ कैंट की सीट हार गईं थी.

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पूरे राज्य में समाजवादी पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की वजह पूछे जाने पर अपर्णा ने बताया, "अगर हमलोग ज़मीनी स्तर पर और मेहनत करते और पार्टी में आंतरिक क्लेश नहीं हुआ होता तो हमारी पार्टी बहुत आगे रहती."
समाजवादी पार्टी के भविष्य की राजनीति की रूपरेखा के बारे में अपर्णा ने बताया कि "इसका जवाब तो पार्टी के मुखिया देंगे. वहां मुझसे पूछा जाएगा तो मैं भी अपने सुझाव दूंगी."
वैसे लखनऊ के उम्मीदवारों की समीक्षा बैठक समाजवादी पार्टी कर चुकी है और हो सकता है कि अपर्णा अपने सुझाव दे चुकी हों.
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