व्यंग्य: 'हिंदी डिक्शनरी नहीं, हिंदू शब्दकोश भी चाहिए'

- Author, राजेश प्रियदर्शी
- पदनाम, डिजिटल एडिटर, बीबीसी हिंदी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन शब्दों की परिभाषा और व्याख्या अपने ढंग से करते रहे हैं.
यह चलन आदिवासी को बनवासी, धर्मनिरपेक्ष को पंथनिरपेक्ष और विकलांग को दिव्यांग कहने तक सीमित नहीं है, परिभाषाएँ बहुत तेज़ी से बदल रही हैं.
ऐसे ही कुछ नए अर्थ और परिभाषाएँ
'कट्टर' और 'उग्र' सराहनीय विशेषण हैं. 'दबंग' विकास करने वाले व्यक्ति को कहते हैं.
'सत्यमेव जयते' का नया अर्थ है--हमारे धर्म की ही जीत होगी क्योंकि वही सत्य है.
अब 'प्रगति' भी होगी. प्रगति का मतलब होता है पीछे की ओर लौटना. वेद-पुराणों में वर्णित हिंदू गौरव की दोबारा स्थापना.
'धार्मिक कट्टरता' बुरी चीज़ है, ये वाक्य ग़लत है. हमारी कट्टरता अच्छी है, उनकी कट्टरता बुरी है. अब ठीक है.

महंत का अर्थ होता है मठ का व्यवस्थापक, अब इसका नया अर्थ मुख्यमंत्री है और विधानसभा का नया अर्थ है--धर्मसभा.
बुद्धिजीवी का मतलब होता है मूर्ख, और धर्मनिरपेक्ष का अर्थ है मुसलमानों का शुभचिंतक.
अब धर्मनिरपेक्षता का इस्तेमाल बंद, पंथनिरपेक्षता का प्रयोग शुरू, जिसका अर्थ है-- सेक्युलरिज़्म हिंदुओं की सुविधा अनुसार.
सांप्रदायिकता वो है जो दूसरे फैलाते हैं, हम जो फैलाते हैं उसे राष्ट्रभक्ति कहा जाता है.
तुष्टिकरण उसे कहा जाता है जो मुसलमानों का किया जाए, हिंदुओं का सिर्फ़ हित होता है.
वोट बैंक सिर्फ़ मुसलमानों का होता है, हमारे वोटर राष्ट्रवादी हैं.

भारत का दुश्मन पाकिस्तान है, पाकिस्तान का पर्यायवाची मुसलमान होता है.
जनसंख्या वृद्धि उसे कहते हैं जिस रफ़्तार से मुसलमानों की आबादी बढ़ती है.
विश्वविद्यालयों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा तय की जानी चाहिए, संतो-महंतो-स्वामियों की सीमा तय करना अनुचित है.
वामपंथी हर वो व्यक्ति है जो हिंदुत्व की राजनीति से सहमत नहीं है.
देशद्रोही करोड़ों की तादाद में हैं यूनिवर्सिटियों, सिनेमा हॉलों से लेकर कश्मीर तक, पीडीपी को छोड़कर.
'महान' वह अवस्था है जिसमें हिंदू देश को पहुँचाते हैं, 'पिछड़ापन' उनकी वजह से है जो हिंदू नहीं हैं.
लव जिहाद- जब मुसलमान हिंदू लड़की से शादी करता है. जब हिंदू लड़का मुसलमान लड़की से शादी करे तो उसे 'कोर्ट मैरेज' कहते हैं.

जब हिंदू धर्म बदले उसे 'जबरन धर्म परिवर्तन' कहते हैं. जब कोई धर्म बदलकर हिंदू बन जाए तो उसे 'घर वापसी' कहते हैं.
बम फोड़ने वाले अगर मुसलमान हों तो उन्हें आतंकवादी कहते हैं, लेकिन ऐसा न हो तो उन्हें कर्नल, स्वामी या साध्वी जैसे नामों से पुकारना चाहिए.
'संविधान' उस पुस्तक का नाम है जिसे सभी को मानना चाहिए, हम उसे उतना ही मानते हैं जितने दूसरों के धर्मग्रंथों को.
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