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योगी आदित्यनाथ के बारे में क्या सोचते हैं गोरखपुर के मुसलमान ?
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, गोरखपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर हिंदुओं की आस्था और योगी आदित्यनाथ की 'शक्ति' का केंद्र है तो उसके तीनों ओर मुसलमानों की घनी आबादी.
मंदिर के मुख्य द्वार से लगी बाउंड्री के दूसरी ओर एक क़ब्रिस्तान से इन मोहल्लों की शुरुआत होती है. इन्हीं में से एक मोहल्ला है रसूलपुर.
योगी आदित्यनाथ अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके हैं, लेकिन उनकी छवि एक कट्टर हिंदू नेता की रही है.
उनके कई भाषणों में ऐसी बातें कही गई हैं जिनसे ऐसी ही छवि उभरी है.
ऐसे में अगर राज्य में पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पाटी की सरकार बन जाए और उस सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ बना दिए जाएं तो ये जिज्ञासा प्रबल हो जाती है कि गोरखपुर के मोहल्लों में रहने वाले लोग क्या सोचते होंगे?
पूरे प्रदेश का सीएम
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां किसी तरह की ख़ुशी या जश्न का माहौल तो नहीं था, लेकिन लोग बेफ़िक्र होकर अपने काम में मशगूल थे.
रसूलपुर में एक फल की दुकान पर बैठे बुज़ुर्ग इमरान माइक देखते ही कहने लगे, "हम सभी बहुत ख़ुश हैं कि हमारे यहां का व्यक्ति आज पूरे प्रदेश का मुख्यमंत्री बन गया है."
योगी आदित्यनाथ की कट्टर छवि के बारे में एक युवक का कहना था कि यह छवि 'मीडिया ने गढ़ी' है, योगी जी बहुत भले आदमी हैं.
योगी की तारीफ
कई लोग ये भी बताने लगे कि वो अपने निजी काम को लेकर अक़्सर योगी जी के पास जाते हैं और योगी जी न सिर्फ़ उनकी बात सुनते हैं बल्कि उनके काम भी कराते हैं.
क़रीब सत्तर साल के एक बुज़ुर्ग चौधरी नज़मुद्दीन कहते हैं, "हमारे यहां वो वोट मांगने या वैसे भी कभी आते नहीं हैं, लेकिन पड़ोसी के नाते जानते और पहचानते सभी को हैं. हमें देखते ही हाल-चाल पूछते हैं."
यहां कुछ महिलाओं से भी बात हुई. उनमें से कोई योगी आदित्यनाथ से मिली तो नहीं थी, लेकिन 'योगी जी की तारीफ़' लोगों से सुन रखी थी.
गोरखनाथ मंदिर
रसूलपुर के लोगों को इस बात पर भी कोई आपत्ति नहीं जताई कि योगी आदित्यनाथ उस पार्टी के नेता हैं जिसने राज्य में एक भी मुसलमान को विधानसभा या लोकसभा का टिकट नहीं दिया.
रविवार को लखनऊ में जिस समय योगी आदित्यनाथ और उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्य शपथ ले रहे थे, गोरखनाथ मंदिर के बाहर और भीतर उनके कार्यकर्ता पूरे जोश के साथ नारे लगा रहे थे और जश्न मना रहे थे.
लोगों का कहना था कि भाजपा ने मुख्यमंत्री के तौर पर योगी का चुनाव करके बहुत अच्छा फ़ैसला किया है.
'ग़लत लोग दहशत में'
कुछ कार्यकर्ता इस बात को तो स्वीकारते हैं कि एक 'ख़ास समुदाय' उनके मुख्यमंत्री बनने से दहशत में है, लेकिन इन लोगों के मुताबिक उस समुदाय के सब नहीं बल्कि 'ग़लत' लोगों को ही डरना चाहिए.
ग़लत लोग कौन हैं, इसका जवाब उन्होंने ये कहकर दिया, "नाम नहीं लेंगे, लेकिन हमको पता है कि आप जानते हैं."
दरअसल, गोरखनाथ मंदिर न सिर्फ़ हिन्दुओं के एक वर्ग की आस्था का बड़ा केंद्र है बल्कि कट्टर हिन्दुत्ववादी सोच के लोगों के लिए शक्ति के एक केंद्र के रूप में भी जाना जाता रहा है.
हिंदूवादी छवि
यहां के प्रमुखों यानी महंतों ने अपनी शक्ति के ज़रिए राजनीतिक ताक़त भी हासिल की है. योगी आदित्यनाथ से पहले उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ और उनसे पहले दिग्विजय नाथ राज्य की विधानसभा और लोकसभा में पहुंचते रहे हैं.
राजनीतिक और आर्थिक ताक़त के साथ योगी आदित्यनाथ को इस मठ की कट्टर हिंदूवादी छवि भी विरासत में मिली है. बाहर उनकी यह छवि भले ही कैसी हो, लेकिन गोरखपुर और ख़ासकर इस इलाक़े में वो सांप्रदायिक सौहार्द का नमूना भी पेश करते हैं.
स्थानीय लोग बताते हैं कि गोरखनाथ मंदिर परिसर में न सिर्फ़ तमाम दुकानें मुसलमानों की हैं बल्कि मंदिर के तमाम कर्मचारी भी अल्पसंख्यक समुदाय से हैं.
गोरखनाथ इलाक़े में ही रहने वाले विजय कुमार गुप्त कहते हैं, "मठ की ओर से जो अस्पताल चलता है उसका लाभ भी हिन्दू और मुसलमान दोनों को मिलता है. इन चीजों में कोई भेदभाव नहीं होता. यही नहीं, हर साल होने वाले खिचड़ी पर्व में भी बड़ी संख्या में मुसलमान हिस्सा लेते हैं."
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