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कैसे तैयार हुई उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की टीम?
उत्तर प्रदेश के नए कप्तान बने योगी आदित्यनाथ ने अपनी टीम तैयार कर ली है.
कप्तान के अलावा टीम में दो उप कप्तान (केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा) 22 सीनियर खिलाड़ी (कैबिनेट मंत्रियों) और 22 जूनियर खिलाड़ियों (राज्यमंत्री) को जगह दी गई है.
20 करोड़ से ज़्यादा आबादी, 75 ज़िले और 403 विधानसभा सीटों में फैले उत्तर प्रदेश के हर हिस्से को नुमांइदगी देना आसान नहीं है.
लेकिन भाजपा ने मंत्रिमंडल तैयार करते वक़्त कई समीकरण साधने की कोशिश की है.
जानकार बताते हैं कि भाजपा ने टिकट बांटते वक़्त भले एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया है, लेकिन सभी अहम जातियों को ख़ुश करने का पूरा ख़्याल रखा.
और यही वजह है कि वो तीन-चौथाई बहुमत तक पहुंचने में कामयाब रही.
सभी जातियों का ख़्याल
टिकट बंटवारे में दिखी अमित शाह की 'सोशल इंजीनियरिंग' का पर्चा मंत्रिमंडल का खाका रचते वक़्त भी सामने रखा गया है.
उत्तर प्रदेश का ज़िम्मा संभालने वाली नई टीम में सबसे ज़्यादा ओबीसी, 7 ठाकुर, 8 ब्राह्मण, 6 दलित, 8 कायस्थ और वैश्य, 2 जाट और एक मुसलमान को जगह दी गई है.
भाजपा के इकलौते मुसलमान मंत्री मोहसिन रज़ा हैं जो विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं और कुछ वक़्त पहले ही भाजपा के कुनबे में शामिल हुए थे.
ओबीसी नेताओं में केशव प्रसाद मौर्य को उप-मुख्यमंत्री और स्वामी प्रसाद मौर्य को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.
इनके अलावा सुरेश पासी, ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, मन्नु कोरी, जय प्रकाश निषाद, गिरीश यादव, अनिल राजभर, धरम सिंह सैनी.
आधी आबादी को कितनी हिस्सेदारी?
कैबिनेट में पाँच महिलाओं को जगह दी गई है जिनमें रीता बहुगुणा जोशी, गुलाब देवी, स्वाति सिंह, अनुपमा जायसवाल और अर्चना पांडे शामिल हैं.
इनमें दो का ज़िक्र ज़रूरी हो जाता है. रीता कांग्रेस की बड़ी नेता रह चुकी हैं और स्वाति सिंह नया चेहरा हैं.
मायावती पर विवादित टिप्पणी करने वाले भाजपा नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति पहली बार विधायक बनीं और मंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहीं.
हालांकि भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ अमेठी में शानदार जीत दर्ज की. उम्मीद थी कि गरिमा सिंह को मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
बाहर से आए, कुर्सी पाए
अमित शाह से जब पूछा गया था कि उन्होंने एक भी मुसलमान को टिकट क्यों नहीं दिया गया तो उनका जवाब था कि टिकट बांटते वक़्त जीतने की क्षमता को सबसे ज़्यादा तरज़ीह दी गई है.
और लगता है कि दूसरे दलों से आकर जीत दर्ज करने वाले लोगों को इसलिए मंत्री पद से नवाज़ा गया है.
बसपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, बृजेश पाठक और लक्ष्मी नारायण चौधरी, सभी को ख़ास कुर्सी दी गई है.
इसके अलावा लखनऊ कैंट सीट पर अपर्णा यादव को शिकस्त देने वाली रीता बहुगुणा जोशी और नंद गोपाल नंदी कांग्रेस से आए थे लेकिन दोनों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है. सपा से भाजपा में आए एस पी सिंह बघेल को भी मंत्री बनाया गया है.
लखनऊ, पश्चिमी यूपी के बल्ले-बल्ले
मंत्रीमंडल में सूबे की राजधानी और पश्चिमी हिस्से को ख़ासी तरजीह दी गई है. लखनऊ से मेयर रहे दिनेश शर्मा, स्वाति सिंह, रीता बहुगुणा जोशी और आशुतोष टंडन को मंत्री बनाया गया है.
इसी तरह से पश्चिमी यूपी से लखनऊ पहुंचे नेताओं को इफ़रात में मंत्री पद मिले हैं. सूबे के इस हिस्से से आने वाले धरमपाल सिंह, गुलाबो देवी, सुरेश राणा, श्रीकांत शर्मा, अतुल गर्ग, भूपेंद्र चौधरी, लक्ष्मी नारायण चौधरी, संदीप सिंह को मंत्री पद मिला है.
साथ ही इलाहाबाद को भी मंत्रीमंडल में अच्छी-ख़ासी जगह मिली है. बुंदेलखंड इस मामले में कुछ बदक़िस्मत रहा. 19 की 19 सीटों पर भाजपा जीती लेकिन यहां से सिर्फ़ दो लोगों को मंत्री बनाया गया है.
महरौनी के मन्नु कोरी को राज्य मंत्री बनाया गया है जबकि उरई से आने वाले स्वतंत्र देव सिंह को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद दिया गया है.
राजनाथ के बेटे को जगह नहीं
योगी की टीम में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को मंत्री पद दिया गया है.
लेकिन संभावानाओं से उलट नोएडा से जीते गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को कैबिनेट में जगह नहीं दी गई है.
पहले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में राजनाथ सिंह भी शामिल बताए जा रहे थे लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया था और अंत में हुआ भी वही.