भाजपा के 'बुर्क़ा दांव' को चुनाव आयोग ने नकारा

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

चुनाव आयोग का कहना है कि बुर्क़ा या घूंघट में मतदान केंद्रों पर आने वाली महिलाओं की पहचान की व्यवस्था पहले से ही चली आ रही है, इसलिए भारतीय जनता पार्टी के आयोग को इस बारे में लिखे गए पत्र का कोई औचित्य नहीं है.

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी प्रमोद कुमार पांडेय ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि इस बारे में क़ानूनी प्रावधान पहले ही किया जा चुका है.

इसके तहत बूथ के अंदर महिला मतदाताओं की संख्या के हिसाब से एक महिला मतदानकर्मी को तैनात किया जाता है.

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पांडेय कहते हैं, "जब महिला मतदान करने आती हैं तो महिला मतदानकर्मी उनके पहचान पत्र से उनके चेहरे का मिलान करती हैं. इसके अलावा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मतदान केंद्रों के अंदर रहते हैं. चूँकि मोहल्ले के स्तर पर सब एक-दूसरे को पहचानते हैं, इसलिए किसी की पहचान करना बहुत मुश्किल काम नहीं होता."

मगर चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना कि मतदान केंद्रों के अंदर वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं की जाती है.

जबकि बाहर पुरुष और महिला पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं और लोगों की तलाशी भी होती है.

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मगर भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग से अपनी शिकायत में कहा है कि बुर्क़ा पहन कर मतदान करने आईं महिलाओं की पहचान करना मुश्किल होता है इस लिए उन्होंने चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है.

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि मतदान केंद्रों पर तैनात पुरुष पुलिसकर्मी या मतदानकर्मी बुर्के में मत डालने आ रही महिलाओं की पहचान नहीं कर सकते इसलिए उन्होंने इस तरह की मांग की है.

पाठक का कहना था, "हमारा बस इतना सा उद्देश्य है कि जाली मतदान ना हो. हालांकि चुनाव आयोग की व्यवस्थाएं हैं, मगर देखा गया है कि अक्सर बुर्क़ा पहनकर फ़र्ज़ी मतदान होता है. आपत्ति जताए जाने पर वहां मौजूद अधिकारी बहाना बना देते हैं कि महिला पुलिसकर्मी और मतदान कर्मचारी नहीं हैं जिसकी वजह से पहचान का सत्यापन नहीं किया जा सकता है."

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वहीं, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी प्रमोद कुमार पांडेय ने इस तरह की मांग को ही 'बेतुका' बताते हुए कहा है कि अगर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी बढ़ा दी जाती है तब भी इन पुलिसकर्मियों को मतदान केंद्र के अंदर प्रवेश करने का अधिकार है ही नहीं.

क्योंकि, अगर सत्यापन करने का अधिकार किसी को है तो वो सिर्फ महिला मतदानकर्मियों को ही है.

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त इस वाई कुरैशी का कहना है कि शिकायतकर्ता को चुनाव आयोग के प्रावधानों के बारे में जानकारी नहीं है या फिर उन्होंने इस तरह की मांग कर सिर्फ़ ध्यान बटोरने की कोशिश की है.

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