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शशिकला और सीएम पद में ये दूरी क्यों
जयललिता की मौत के बाद उनकी सहेली शशिकला के हाथों अन्नाद्रमुक की कमान तो आ गई पर राज्य का कंट्रोल अभी उनसे दूर है.
हालांकि पनीरसेल्वम ने रविवार को ही इस्तीफा दे दिया था पर 48 घंटे बाद भी शशिकला के शपथ ग्रहण की खबरें चर्चाओं तक सिमटी दिख रही हैं.
कुछ मीडिया रिपोर्टों में अन्नाद्रमुक विधायकों के एक धड़े में असंतोष की बात भी कही गई है और शशिकला के शपथग्रहण में हो रही देरी को इन्हीं खबरों से जोड़कर देखा जा रहा है.
इन सब के बीच शशिकला की राह में कुछ कानूनी चुनौतियां भी हैं जिनसे उन्हें रूबरू होना है.
पहला मामला तो आमदनी के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने का है.
22 साल पुराने इस डीए केस में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के साथ-साथ शशिकला भी सह-अभियुक्त हैं.
हालांकि इस मामले में पहले ये दोनों बरी हो गई थीं लेकिन कर्नाटक सरकार की अपील फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है.
इसी केस में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हफ्ते के भीतर फैसला सुनाने की बात कही है.
इसके अलावा शशिकला पर विदेशी मुद्रा से जुड़ी गड़बड़ियों यानी फेरा के तीन मामले भी लंबित हैं.
प्रवर्तन निदेशालय ने इन दो दशक पुराने मामलों में उन्हें गिरफ्तार भी किया था. यह साल 1996 की बात है. बाद में एक निचली अदालत ने उन्हें इन मामलों से बरी कर दिया.
लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने कुछ दिनों पहले शशिकला को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को पलट दिया था.
अब इस मामले में शशिकला को फिर से कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा. अदालती मामलों का पचड़ा केवल शशिकला के ही साथ नहीं हैं.
उनके पति एम नटराजन पर जमीन अवैध रूप पर कब्जा करने का आरोप है. इन मामलों में वे दो बार गिरफ्तार भी हो चुके हैं.
शशिकला के भतीजे दिनाकरन भी फेरा मामले में आरोपी हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने दिनाकरन को हवाला और बेनामी लेनदेन के लिए दोषी पाया था.
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