You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सोशल: अब शशिकला भी मोदी और मनमोहन के बराबर!
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता को जब अदालती कार्यवाही की वजह से इस्तीफ़ा देना पड़ा तो ओ पनीरसेल्वम को ज़िम्मेदारी सौंपी गईं.
जब वो बीमार पड़ीं, अस्पताल में भर्ती हुईं तो एक बार फिर पनीरसेल्वम ने ही ये कुर्सी संभाली.
लेकिन जयललिता के निधन से ठीक पहले और उसके बाद शशिकला का क़द जिस तेज़ी से बढ़ा, ये साफ़ हो गया कि पनीरसेल्वम ज़्यादा वक़्त तक टिके नहीं रह पाएंगे. और हुआ भी यही.
शशिकला को अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता चुन लिया गया. वो जल्द ही राज्य की मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी. और पनीरसेल्वम पिछली बार की तरह इस दफ़ा भी मुख्यमंत्री पद के इतना क़रीब होते हुए भी दूर रह जाएंगे.
यूं तो विधायक दल का नेता चुनना अन्नाद्रमुक का अंदरूनी मामला है, लेकिन शशिकला पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं.
और इसके लिए सोशल मीडिया का रास्ता अख़्तियार किया जा रहा है. इस सिलसिले में पहला बयान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की तरफ़ से आया है.
पी चिदंबरम ने सोमवार की सुबह ट्वीट किया, ''अन्नाद्रमुक विधायकों के पास अपना नेता चुनने का अधिकार है. लेकिन ये पूछने का अधिकार आम लोगों के पास है कि वो नेता मुख्यमंत्री बनने लायक है या नहीं.''
उन्होंने आगे लिखा, ''पीछे मुड़कर देखने पर गर्व महसूस होता है क्योंकि कभी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कामराज और अन्ना बैठा करते थे. अन्नाद्रमुक और तमिलनाडु की जनता अब उलट दिशा में आगे बढ़ रही है.''
ये सच है कि जयललिता के जाने के बाद अन्नाद्रमुक प्रमुख के तौर पर शशिकला के उभरने से किसी राजनीतिक विश्लेषक और तमिलनाडु की राजनीति पर नज़र रखने वालों को कोई अचरज नहीं हुआ.
लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनने की चर्चा होने पर उनके सियासी अनुभव पर सवाल होने लगे हैं.
इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा ने टि्वटर पर लिखा, ''महात्मा गांधी से राहुल गांधी से ढलान की बराबरी या यह कहिए कि उसे भी पार करने वाले मामले में पेरियार से शशिकला तक का सफ़र तय किया गया है.''
शशिकला ना सियासत के तय गलियारों से आईं हैं और ना ही कभी चुनाव लड़ी हैं. पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा है, ''बिना कोई चुनाव लड़े शशिकला तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन गईं. ऐसा सिर्फ़ भारत में हो सकता है.''
ये सवाल भी उठ रहे हैं कि मनमोहन सिंह अगर बिना चुनाव प्रधानमंत्री बन सकते हैं, तो शशिकला मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकतीं.
सरदेसाई ने लिखा है, ''दिलचस्प है कि नरेंद्र मोदी भी बिना चुनाव लड़े ही गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे. इसलिए शशिकला अब मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की कंपनी में हैं.''