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प्रेस रिव्यू : बीच रास्ते गायब हुए 59 ट्रेनी कोबरा कमांडो
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि श्रीनगर में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सीआरपीएफ के काउंटर-नक्सल एलिट यूनिट कोबरा के 59 कमांडोज ट्रेन से उतरकर अपने घर चले गए.
जबकि उन्हें बिहार के नक्सल प्रभावित इलाके में अपनी पहली पोस्टिंग पर जाना था.
ट्रेनी कमांडोज की यह लापरवाही सामने आने के बाद अब उनके खिलाफ़ जांच के आदेश दिए गए हैं.
रविवार को मुगलसराय स्टेशन पर उतरने के बाद ये 59 ट्रेनी कमांडोज आगे के सफ़र पर बिहार नहीं गए बल्कि उन्होंने सामूहिक रूप से अपने घर या किसी अज्ञात जगह जाने का फैसला कर लिया.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि दिल्ली में मानसिक रूप से विक्षिप्त महिलाओं के लिए सुधार गृह 'आशा किरण' में रहने वाली महिलाओं की स्थिति से दुखी दिल्ली हाईकोर्ट ने 2012 में कहा था,'' क्या वो पशु हैं? आप उन्हें जानवरों की तरह रखते हैं. ''
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को लताड़ते हुए कहा था कि इससे बुरा मानवाधिकार उल्लंघन नहीं हो सकता.
ये सुधार गृह दिल्ली सरकार चलाती है. लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट की डांट पड़ने के बाद भी वहां के हालात नहीं सुधरे.
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इस मानसिक सुधार गृह का हाल ही में दौरा किया , बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में स्वाती ने कहा कि 'एक मानसिक सुधार गृह केंद्र के देर रात किए गए दौरे पर वो उन्हें ज़िंदा नर्क की तरह लगा'.
दैनिक भास्कर ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट ने सालभर में सभी प्रीपेड मोबाइल यूज़र्स की पहचान का सत्यापन का आदेश दिया है.
अख़बार लिखता है कि अगर सत्यापन नहीं कराया तो नंबर बंद हो जाएगा. देश भर में फ़र्ज़ी नाम पर पांच करोड़ नंबर चल रहे हैं.
जनसत्ता ने लिखा है कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की मौत के पीछे कोई साज़िश या रहस्य नहीं है.
जयललिता की मौत पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच लंदन स्थित विशेषज्ञ रिचर्ड बेअले, अपोलो अस्पताल प्रबंधन और सरकारी डॉक्टरों ने ज़हर से मौत होने के कारण के सिरे से खारिज कर दिया.
डॉक्टरों ने कहा कि न तो उनके इलाज और न ही उनके निधन में 'कोई साजिश' या रहस्य है. अस्पताल में जयललिता के इलाज के लिए 5.5 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया था.
मेल टुडे ने लिखा है कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया को दिल्ली के लाल क़िला परिसर में एक पुराने कुएं में भारी मात्रा में असलहा मिला है.
शनिवार को इस ऐतिहासिक परिसर में पुराने कुओं की सफ़ाई चल रही थी जब ये हथियारों का ज़खीरा मिला. ज़िंदा मोर्टार मिलने पर एनएसजी और सेना को बुलाया गया.
सूत्रों के अनुसार ये असलहा स्वतंत्रता से पहले के दौर का या फिर मुगल काल का हो सकता है.
द हिंदू ने लिखा है कि भारत प्रशासित कश्मीर में सर्दियों की छुट्टियों में लड़कियां अब स्नो रगबी खेल को सलाम कह रही हैं.
अख़बार लिखता है कि परंपराओं की बेड़ियों को तोड़ते हुए 20 साल की इरतीक़ा अयूब गुलमर्ग में 18-19 फ़रवरी को होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की तैयारी कर रही हैं. इरतीक़ा पांच बार इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकीं हैं.
जम्मू कश्मीर रगबी के मुख्य कोच इरफ़ान अज़ीज़ बोट्टा के मुताबिक़ चार हज़ार लड़कियां स्नो रगबी सीख रही हैं.
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