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नगालैंड में महिला आरक्षण पर बवाल
भारत के पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड में एक फरवरी को निकाय चुनाव होने वाले थे. इन चुनावों में पहली बार नागालैंड में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फ़ैसला लिया गया था.
लेकिन नगालैंड ट्राइब्स एक्शन कमिटी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का विरोध कर रही है.
इसके बाद हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में 31 जनवरी को दो लोगों की मौत हो गई.
31 जनवरी को प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री टी आर जेलिआंग के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे.
स्थानीय नगा जनजाति समूहों का कहना है कि यह आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 371(A) का उल्लंघन है जिसके तहत नागालैंड को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है और इसकी जनजातीय संस्कृति के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है.
साल 2016 में नगालैंड विधानसभा में एक विधेयक पारित हुआ जिसके तहत महिलाओं को 33 आरक्षण देने की बात कही गई.
भारतीय संविधान के आर्टिकल 243 (T) के तहत बाकी राज्यों के निकायों चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण प्राप्त है लेकिन नागालैंड को अनुच्छेद 371(A) के तहत विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है जिसके कारण यहां अब तक महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का कानून लागू नहीं हुआ था.
विरोध प्ररदर्शनों को देखते हुए फिलहाल निकाय चुनाव टाल दिए गए हैं. हिंसा की घटनाओं के कारण राज्य में बड़े पैमाने पर सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं.
नगालैंड में नागा पीपुल्स फ्रंट की सरकार है.
नगा मदर्स एसोसियशन जो कि महिलाओं के आरक्षण देने के समर्थन में हैं, इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गई थी.
उसके बाद नगालैंड की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह आरक्षण देने का फ़ैसला लिया था.
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