अमरिंदर को कितनी चुनौती दे पाएंगे जनरल जेजे सिंह
- Author, रविंदर सिंह रॉबिन
- पदनाम, पटियाला से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पूर्व थल सेनाध्यक्ष जेजे सिंह पंजाब विधानसभा चुनाव में पटियाला की सीट पर अकाली दल की ओर से कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने चुनाव मैदान में हैं.
जेजे सिंह के मुताबिक़ कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह को 'मिशन इम्पॉसिबल' जैसा काम सौंप दिया है.
बीबीसी से बातचीत करते हुए जेजे सिंह ने कहा, "अमरिंदर के पांव दो नावों में हैं, एक पांव लांबी में है तो दूसरा पटियाला में. उनके बाक़ी के दोनों हाथों में पंजाब की ज़िम्मेदारी है. ऐसे में उनका डूबना तय है. वे मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर दो चुनाव हार चुके हैं और इस बार वे हैट्रिक बना देंगे."
जेजे सिंह को भरोसा है कि अमरिंदर कांग्रेस पार्टी के लिए और अपमानजनक स्थिति लाएंगे.
जेजे सिंह कहते हैं, "मुझे ये भी लगता है कि ये कांग्रेस का षड्यंत्र ही है जिसके चलते वे शाही परिवार को एक इम्पॉसिबल मिशन दे देते हैं, ताकि अमरिंदर का राजनीतिक भविष्य ख़त्म हो जाए."

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पंजाबियों का साहस
अमरिंदर पर निशाना साधते हुए जेजे सिंह ये भी कहते हैं कि शाही परिवारों का जमाना लद चुका है. उन्होंने ये भी कहा कि जब भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ था जो लोग पाकिस्तान से भारत आए थे, उन्हें शाही परिवारों ने ठिकाना नहीं दिया था, बल्कि उन्हें उन घरों में रहने का मौका मिला जिन्हें मुसलमान खाली कर दूसरी तरफ़ गए थे.
जेजे सिंह ने कहा, "मैं ऐसे ही घर में रहा था, महाराजा ने कुछ नहीं किया. हमने अपना जीवन ख़ुद बनाया है, आप तो पंजाबियों के साहस को जानते ही हो."
जेजे सिंह के मुताबिक अमरिंदर सिंह को राजा या महाराजा कहना भी संविधान की भावना के ख़िलाफ़ है.
जेजे सिंह थल सेनाध्यक्ष रहने के अलावा जेजे सिंह अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे हैं. ऐसे में विधानसभा चुनाव लड़ने के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं, "मैं लोगों का सच्चा प्रतिनिधि बनना चाहता हूं. इकलौता उम्मीदवार हूं जिसने अपने कार्ड पर अपना निजी नंबर छपवाया हुआ है, कोई दूसरा उम्मीदवार अपना निजी नंबर नहीं बताता ताकि लोग डिस्टर्ब नहीं कर सकें, लेकिन मेरे दरवाज़े हमेशा लोगों के लिए खुले हुए हैं."

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18 घंटे तक काम करने की क्षमता
जेजे सिंह दावा करते हैं कि वे आदर्श विधायक की छवि पेश करेंगे क्योंकि उनकी क्षमता 18 घंटे तक काम करने की है.
वे ये भी कहते हैं कि विधायक का काम कोई छोटा नहीं है, बल्कि ये जनता की सेवा है. वे कहते हैं, "मैं सिपाही का पोता हूं. लोग मुझसे प्रेरणा ले सकते हैं और अपने बेटे पोतों को सेनाध्यक्ष और गवर्नर बनता हुआ देखना चाहेंगे."
जेजे सिंह का मुक़ाबला भले अमरिंदर सिंह से हो, लेकिन वे अचरज जताते हुए कहते हैं कि उन्हें तो पता ही नहीं चल रहा है कि पटियाला में कांग्रेस का उम्मीदवार कौन है.

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वे कहते हैं. "अमरिंदर हैं या परणीत कौर. मुझे तो केवल उनके पोस्टर देखने को मिले हैं. वे अपना प्रचार अभियान रिमोट कंट्रोल के ज़रिए चला रहे हैं."
वे अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि मैं तो पटियाला के लोगों से पूछता हूं कि क्या अमरिंदर आपसे मिलते हैं, हाथ मिलाते हैं और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो फिर उन्हें पटियाला के लोगों से वोट मांगने का क्या हक़ है?
वैसे जेजे सिंह पटियाला को 21वीं शताब्दी का स्मार्ट सिटी बनाना चाहते हैं. उनके मुताबिक अगर शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी गठबंधन की सरकार सत्ता में आती है तब पटियाला में मेट्रो और दूसरी तमाम सुविधाओं के लिए उनके पास फंड की कमी नहीं रहेगी.
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