अखिलेश को मुलायम ने फिर दिया झटका?

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने 325 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी.
उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि 78 सीटों पर और विचार-विमर्श के बाद उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे. समाजवादी पार्टी ने 325 में से 176 सीटों पर मौजूदा विधायकों को ही मैदान में उतारा है.
पीटीआई के मुताबिक़ मुलायम सिंह ने यूपी चुनाव में किसी भी पार्टी से गंठबंधन करने से इनकार कर दिया है. इससे पहले कहा जा रहा था कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के बीच चुनावी गठबंधन हो सकता है.

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उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की ख़बरों को लेकर तीखी आलोचना भी की थी. उन्होंने यहां तक कह दिया था कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में गठबंधन के पीछे बीजेपी का हाथ है.
मुलायम सिंह से पूछा गया कि अखिलेश कहां से चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने कहा कि उसे जहां से मन होगा वहां से लड़ सकता है. मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार पर कहा कि चुनाव बाद विधानमंडल के सदस्य फ़ैसला करेंगे.
बुधवार को जिस तरह से अखिलेश यादव की पसंद को किनारे करके शिवपाल यादव और अमर सिंह को अहमियत दी गई, उससे लगता है कि सपा प्रमुख ने अबकी बार अखिलेश को फिर से आईना दिखाया है.
अखिलेश यादव के बेहद क़रीबी तीन मंत्रियों अरविंद सिंह गोप, पवन पांडेय और रामगोविंद चौधरी का न सिर्फ़ टिकट काटा गया बल्कि अतीक़ अहमद, रामपाल यादव, नारद राय, गायत्री प्रजापति को दिया गया है.

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हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने लोगों के टिकट कटने के मुद्दे पर कहा है कि वो इस बारे में नेताजी से बात करेंगे. जिस तरह से मुलायम सिंह ने इस सूची में किसी भी तरह के संशोधन से साफ़ इनकार किया है, उसे देखते हुए लगता नहीं है कि अखिलेश अपनी कोई बात मनवा पाएंगे.
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान कहते हैं, "चुनाव से ठीक पहले मुलायम सिंह जैसा राजनीति का मंझा खिलाड़ी ऐसा कर रहा है, ये समझ से परे है. आख़िरकार इन सबका मक़सद होना चाहिए कि पार्टी को चुनाव में फ़ायदा हो, लेकिन इससे किसी तरह का फ़ायदा होता तो नहीं दिख रहा है."
अखिलेश यादव अभी तक कहते रहे हैं कि यदि कांग्रेस के साथ उनकी पार्टी का गठबंधन हुआ तो वो 300 सीटें जीतेंगे, लेकिन सपा मुखिया ने साफ़तौर पर गठबंधन से इनकार किया है. यही नहीं, पार्टी ने उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं जिन पर कांग्रेस पार्टी अपनी दावेदारी सौंप सकती थी.

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पार्टी में कोई भी नेता फ़िलहाल इस घोषणा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है. यहां तक कि जिनके टिकट काटे गए हैं, वो भी नहीं. ये ज़रूर है कि इनमें नाराज़गी है और कुछ ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है कि उन्हें अखिलेश यादव का साथ देने की सज़ा दी गई है.
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद शाहिद कहते हैं कि पार्टी में नेताजी का कोई भी फ़ैसला अंतिम होता है, इसलिए यदि सूची उन्होंने घोषित की है तो उस पर किसी तरह के सवाल उठाने का मतलब ही नहीं है.
जानकारों का भी यही कहना है कि यदि टिकट बँटवारे की घोषणा करने के लिए ख़ुद मुलायम सिंह यादव मीडिया के सामने आए तो इसका साफ़ मतलब है कि अखिलेश यादव बहुत चाहकर भी उसे ख़ारिज तो नहीं ही कर सकते हैं.

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उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि 28 फरवरी के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे. उन्होंने कहा कि यूपी चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जो उत्तर प्रदेश में जीत हासिल करेगा वही दिल्ली में टिक पाएगा.
मुलायम ने कहा कि पार्टी ने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत टिकट वितरण किया है. उन्होंने कहा कि जितना कारगर लोकतांत्रिक सिस्टम समाजवादी पार्टी में है, उतना किसी भी पार्टी में नहीं है. उन्होंने कहा कि बहुत सोच समझकर टिकट दिए गए हैं.
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