नोटबंदी: संकट में बनारसी साड़ी का उद्योग

इमेज स्रोत, Roshan jaiswal
- Author, रौशन जायसवाल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
दिल्ली के रहने वाले कर्नल राठौर के घर शादी है और वे ख़ासतौर पर बनारस साड़ियां खरीदने आए हैं. लेकिन नोटबंदी के फ़ैसले ने उनके परिवार को थोड़ी मुश्किल में डाल दिया है.
मीरा राठौर बताती हैं कि शादी के घर में कम से कम सात-आठ साड़ियां सास, जेठानी, ननद और नजदिकी रिश्तेदारों के लिए तो लगती ही है तो कोशिश है कि बस ज़रूरत के मुताबिक़ ही खरीदारी हो.
शादी के मौसम में साड़ी व्यापार में तेज़ी के वक़्त 500-1000 की नोटबंदी के फ़ैसले ने मुफलीसी में जी रहे बनारस के बुनकरों की कमर तोड़कर रख दी है.

इमेज स्रोत, Roshan jaiswal
नतीज़ा ये हुआ है कि नकदी के अभाव में बुनकरों का काम ठप पड़ रहा है और बनारसी साड़ी और ड्रेस मटेरियल के उत्पादन पर असर पड़ रहा है.
बनारसी साड़ी और ड्रेस मटेरियल स्थानीय बाज़ार के साथ देश और विदेशों तक भेजा जाता है, लेकिन भुगतान नकद या बेयरर चेक से ही होता है.
वाराणसी के "सरैइया" इलाक़े के बुनकर मोबीन बीबीसी हिंदी को बताते हैं, "नोटबंदी के बाद से व्यापार ठप पड़ा हुआ है. तानी-बानी और धागा देने वाले लोग चेक नहीं ले रहे है. ऐसा ही चलता रहा तो आगे भुखमरी आ जाएगी."

इमेज स्रोत, Roshan jaiswal
मामूली रेशम का धागा साड़ी में पिरोने लायक बनने पर ताना-बाना या तानी-बानी कहलाता है.
एक अन्य बुनकर नुरूद्दीन बताते हैं,"ऊपर से ऑर्डर ही बंद हो गया इसलिए अब बड़े व्यापारी से कच्चा माल तैयार करने को मिल ही नहीं रहा है. पहले पूरे दिन दिहाड़ी करके 150 रुपये कमा लेते थे, लेकिन अब काम नहीं है तो मज़दूरी भी मारी गई है."

इमेज स्रोत, Roshan jaiswal
कर्ज़ लेकर पावरलूम लगाकर साड़ी बुनने वाले सरफराज़ अंसारी काफी दुखी और गुस्से में दिखे. बड़े साड़ी कारोबारियों के यहां से कच्चा माल लेकर उसे साड़ी और ड्रेस मटेरियल में ढालने वाले सरफराज़ ने बताया कि पहले हर रोज़ 300 रुपए कमा लेते थे, लेकिन अब कंगाली चल रही है.
ताना-बाना या तानी-बानी का काम करने वाली नगीना बताती हैं कि अब काम आ ही नहीं रहा है और किसी तरह 50-100 रुपयों में गुजारा कर रहे हैं.

इमेज स्रोत, Roshan jaiswal
बनारसी वस्त्र उद्घोग संघ के महामंत्री राजन बहल भी मानते हैं कि हालत अच्छी नहीं है. वे बताते हैं कि लगभग 80 प्रतिशत पावरलूम और करघे बंद हो गए हैं.
वस्त्र मंत्रालय से जुड़े भारत सरकार के संस्थान (NITRA) नार्दन टेक्सटाइल्स इंडिया रिसर्च एसोसिएशन ने नोटबंदी के बाद उनकी टीम ने बनारस के कई बुनकर बाहुल्य क्षेत्र बड़ी बाजार के 150-200 पावरलूम का सर्वेक्षण किया. जिसमें 70-75 प्रतिशत लूम बंद मिले और जो काम कर भी रहे थे तो आंशिक रूप से.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













