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रविवार, 22 फ़रवरी, 2009 को 03:21 GMT तक के समाचार
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एक मुलाक़ात शशि थरुर के साथ

शशि थरुर
शशि थरुर ने कई वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां निभाई हैं

बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं.

इसी श्रृंखला में हम इस बार आपकी मुलाक़ात करवा रहे हैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के जाने माने चेहरे शशि थरुर से.

आप दुनिया में भारत के सबसे ज़्यादा जाना-पहचाना चेहरा हैं. कैसा लगता है. क्या कोई दबाव महसूस करते हैं?

देखिए, पहली बात तो ये कि मैं सबसे ज़्यादा जाना-पहचाना चेहरा नहीं हूँ. अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान, महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंदुलकर और दूसरे क्रिकेटर हैं. हाँ मैं बीबीसी या सीएनएन देखने वालों के लिए जाना-पहचाना चेहरा हो सकता हूँ.

ख़ैर, ये अलग बात रही, लेकिन कई चीजों का ख़्याल तो रखना ही पड़ता होगा?

संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था में काम करते हुए पहनावे का ख़्याल तो रखना ही पड़ता है. लेकिन अगर गंभीर विषयों या मुद्दों पर आपकी सामग्री बहुत अच्छी न हो तो इस पहनावे का क्या लाभ है. तो मेरी कोशिश थी की लोग मेरी बातों से सहमत हों.

राजनयिक बनने के बारे में सबसे पहले कब विचार आया?

मैं बचपन से ही सोचता था कि आईएएस, आईएफएस बनूँगा. मैं पढ़ाई में भी अच्छा था. मैं क्लास में फर्स्ट आता था. 1975 में 19 साल की उम्र में मुझे अमरीका जाने के लिए स्कॉलरशिप मिली. वहाँ मैंने अंतर्राष्ट्रीय मामलों, क़ानून, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के बारे में पढ़ाई की.
लेकिन तब भी मेरे मन में ये नहीं था कि किसी और देश में रहूँ. मैं पूरी ज़िंदगी हिंदुस्तानी ही रहा हूँ. मैं लंबे समय से देश से बाहर रहा लेकिन दिल हमेशा हिंदुस्तानी रहा.

 मैं मनमोहन सिंह को करीब 25 साल से जानता हूँ. वो बहुत प्रभावशाली हैं. वो दूरदर्शी हैं. उनके अलावा मैं सोनिया गांधी से भी प्रभावित हूँ.
शशि थरुर

एक मुलाक़ात का सफ़र आगे बढ़ाएँ, आपकी पसंद का गाना?

मैं गाना सिर्फ़ बाथरूम में गा लेता हूँ. मुझे गीता दत्त का गाना ‘तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले’ बहुत पसंद है. मैं तो अपने अमरीकी और दूसरे विदेशी दोस्तों से कहता हूँ कि दुनिया में कोई और नहीं है जो इस गाने में गीता दत्त की तरह गा सके. इसके अलावा ‘ये शाम मस्तानी’ भी मुझे पसंद है.

अच्छा, संयुक्त राष्ट्र के बारे में कुछ और बताएँ. कैसा रहा आपका अनुभव?

मेरा अनुभव तो बहुत अच्छा रहा. दरअसल, मैंने वहाँ सबसे पहले शरणार्थियों के लिए काम किया, ऐसे लोग जो अपना सब कुछ गँवा चुके थे. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि होने के नाते हम सरकारों से बात करते थे और कुछ न कुछ समाधान निकालते थे.

मैंने 11 साल शरणार्थियों के लिए काम किया. फिर मैं उस टीम में गया जो शांति स्थापित करने के लिए काम करती है. शांति स्थापित करने में कई देशों की सेनाएं होती हैं. पाकिस्तान और बांग्लादेश की सेना भी, लेकिन इन सेनाओं में भारतीयों का बहुत बड़ा प्रतिनिधित्व है और उनकी छवि भी बेहतरीन है.

कोफ़ी अन्नान जब महासचिव बने तो मैं उनके ऑफिस में चला गया. फिर तमाम देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों के साथ मुलाक़ात. संयुक्त राष्ट्र में मेरा आखिरी काम अंडर सेक्रेट्री जनरल के रूप में था. 80 देशों में हमारे ऑफिस थे और 800 कर्मचारी मेरे मातहत थे. बड़ी बात ये थी कि मेरे पास सुधार के मौके थे और मैंने इसका खूब आनंद उठाया. इसके बाद तो आपको पता ही है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के लिए भी मैंने दांव लगा दिया था.

आपको सबसे करिश्माई या प्रभावशाली राष्ट्र प्रमुख कौन लगे?

देखिए, बिल क्लिंटन बहुत प्रभावशाली थे. टोनी ब्लेयर बहुत चार्मिंग हैं. मेरे ख़्याल से उन्हें राजनयिक होना चाहिए था.

कोई भारतीय नेता, जिनसे आप बहुत प्रभावित हों?

मैं सबसे ज़्यादा उस व्यक्ति से प्रभावित हूँ जिनसे मैं कभी नहीं मिला. वो हैं जवाहरलाल नेहरू. नेहरू जी का इस देश पर सबसे अधिक प्रभाव है. हमारे लोकतंत्र, विदेश नीति पर उनकी छाप है.

मौजूदा राजनेताओं में जिनसे मिले हैं, उनमें किन से प्रभावित हैं?

मैं कई राजनेताओं से मिला हूँ. मैं मनमोहन सिंह को करीब 25 साल से जानता हूँ. वो बहुत प्रभावशाली हैं. वो दूरदर्शी हैं. उनके अलावा मैं सोनिया गांधी से भी प्रभावित हूँ. जब मैं सोनिया गांधी से पहले-पहले मिला था तो मेरी सोच थी कि एक विदेशी महिला राजनीतिक नेतृत्व कैसे करेगी. लेकिन जब मैं उनसे मिला तो बहुत प्रभावित हुआ. अटल बिहारी वाजपेयी से भी प्रभावित हूँ.

आप राजनीति में आने के लिए गंभीर हैं?

सिर्फ़ मेरे फैसला लेने से कुछ नहीं होता. इसका फ़ैसला तो पार्टियों को लेना होगा.

मैं हाल ही में आपका इंटरव्यू पढ़ रहा था. आपने अपनी पसंद भी लगभग जाहिर कर दी है?

मेरे ख्याल में आज कांग्रेस अच्छी पार्टी है. मनमोहन सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है. देश में बहुत सारे मुद्दे हैं. सब मुद्दों पर एक जैसी राय होना बहुत मुश्किल है. देखिए इस देश में इतनी सारी भाषाएँ, धर्म और जातियाँ हैं और इन सबको साथ लेकर चलने के मामले में कांग्रेस सबसे अच्छी है.

आर्थिक नीतियों के मामले में भी इस सरकार की नीतियाँ अच्छी रही हैं. तरक्की अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ-साथ हमें उन 26 करोड़ लोगों के बारे में नहीं भूलना चाहिए जिनकी माहवार आमदनी 360 रुपये से भी कम है. कांग्रेस की विदेश नीति भी ठीक है. ये तय करने का हक़ हमें होना चाहिए कि क्या ठीक है और क्या गलत.

लेखन का शौक आपको कब से है?

देखिए, शुरू से ही मुझे लिखने का शौक है. बचपन से ही मुझे दमे की शिकायत थी और साँस लेने में दिक्कत होती थी. दोस्तों के साथ बाहर खेलने नहीं जाता था. सो भी नहीं पाता था. ऐसे में किताबें पढ़ने का शौक हुआ. लेकिन लगातार किताबें भी कितनी पढ़ सकते थे. घर में माता-पिता की ही किताबें होती थी. इसलिए मैंने खुद लिखना शुरू किया. मेरे पिता ने मुझे बहुत प्रोत्साहित किया. जब मैं 10 साल का ही था, तब मुंबई के भारत ज्योति में मेरी पहली रचना प्रकाशित हुई. अपना नाम छपा देखकर बहुत अच्छा लगा. अंदर का लेखक बाहर आ गया.

आपने इतनी दुनिया देखी है. आपके व्यक्तित्व पर सबसे ज़्यादा प्रभाव किसका पड़ा है?

शशि थरुर और संजीव श्रीवास्तव
शशि थरुर ने संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष पद के लिए भी दावेदारी की थी

मैंने दुनिया में बहुत सी अच्छी चीजें देखी और मैं सोचता हूँ कि क्यों हमारे देश में ये सब नहीं हैं. हम में क्या कमी है जो वहाँ जैसा यहाँ नहीं है. हमारे देश में क्यों अब भी ग़रीबी है, भ्रष्टाचार है.

ऐसा नहीं है कि दूसरे देशों के पास कुछ ख़ास है जो हमारे पास नहीं है. भारत के लोग दुनिया के कई देशों में हैं और उन्होंने बहुत तरक्की की है. तो सोचने की बात ये है कि हिंदुस्तान में हिंदुस्तानियों ने इतनी तरक्की क्यों नहीं की.

अपनी पसंद का एक और गाना बताएँ?

जवानी-दीवानी के सभी गाने मुझे बहुत पसंद थे. राहुल देव बर्मन के गाने शानदार थे. मुझे तो ये लगता है कि अगर ये गाने अंग्रेजी में होते तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मशहूर होते.

जैसे इन दिनों स्लमडॉग मिलियनेयर के गाने लोकप्रिय हो रहे हैं

हाँ, एआर रहमान का जय हो बहुत अच्छा है. शायद अगले हफ्ते हम सुन लेंगे कि इसे ऑस्कर अवॉर्ड मिला है. एआर रहमान का वंदे मातरम भी मुझे बहुत पसंद है.

आपका पसंदीदा पासटाइम शौक क्या है?

क्रिकेट देखना. मैं 19 साल की उम्र में भारत से बाहर चला गया था. लेकिन मैं कई ऐसे देशों में रहा जहाँ क्रिकेट देखना बहुत मुश्किल था. अमरीका में क्रिकेट अखबारों के पन्नों पर भी नहीं मिलता था.

जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में भी यही हाल था. सिंगापुर और जिनेवा में मैं हर रविवार को क्रिकेट खेलता भी था. हाल ये था कि मेरे पिताजी भारत में टेलीविजन पर क्रिकेट मैच रिकॉर्ड कर मुझे भेजते थे.

अब तो कई वेबसाइटों पर हर बॉल का हाल मिलता है. मैं हर किस्म की क्रिकेट पसंद करता हूँ. मैं मुंबई में जब मरीन ड्राइव से गुजरता हूँ, हिंदू जिमखाना, मुस्लिम जिमखाना में मैच होते रहते हैं तो मैं ड्राइवर से कहता हूँ कि जरा धीरे चलो मैं कुछेक गेंद देख लूँ.

मुंबई पसंद है आपको?

मुंबई में 3 साल की उम्र से 12 साल तक रहा हूँ. हाईस्कूल मैंने कोलकाता से किया है. दिल्ली में मैंने सेंट स्टीफंस कॉलेज में तीन साल बिताए. मेरे माता-पिता केरल से हैं. पढ़ाई के दौरान हम हर साल केरल जाते थे. तो अच्छी बात ये है कि मेरे दोस्त देश के हर बड़े शहर में हैं.

आपका पसंदीदा शहर?

हिंदुस्तान में मेरा पसंदीदा शहर त्रिवेंद्रम ( तिरुअनंतपुरम) है. बहुत साफ-सुथरा और समुद्र के नजदीक. मुझे समंदर बहुत पसंद है. अंतरराष्ट्रीय शहरों की बात करें तो पेरिस और रोम में से किसी एक को चुनना बहुत मुश्किल है. रोम में इतिहास ज़्यादा है. रोम में 2000-3000 साल पुराने स्मारक अभी भी हैं.

बीबीसी एक मुलाक़ात में और आगे बढ़ें, आप अपनी पसंद का एक और गाना बताएँ?

मुझे गाने बहुत पसंद हैं. एक बार मेरे दोस्त ने मेरी पसंद के गानों की लिस्ट मांगी. जब मैं लिस्ट बनाने बैठा तो 100 गाने बता चुका था. मुझे फ़िल्म ‘कुर्बानी’ के गाने बहुत पसंद हैं.

आपका पसंदीदा क्रिकेटर?

वैसे तो मुझे बहुत क्रिकेटर पसंद हैं. बचपन में मुझे सलीम दुर्रानी और जयसिम्हा बहुत पसंद थे. लेकिन बाद में सुनील गावस्कर मेरे पसंदीदा क्रिकेटर बन गए. अपनी पहली सिरीज़ में ही वेस्टइंडीज के तेज़ गेंदबाजों के ख़िलाफ़ उन्होंने 774 रन बनाए थे.

आज के क्रिकेटरों में मुझे इरफ़ान पठान बहुत पसंद हैं, लेकिन सिर्फ़ उनके खेल के लिए नहीं. गुजरात दंगों के एक साल के बाद मुअज़्ज़िन के बेटे इरफ़ान ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जीत के बाद जब ये कहा कि ‘अल्लाह हमारे साथ है’, तो मुझे बहुत अच्छा लगा. यही हमारे हिंदुस्तान की खूबसूरती है. मैं भी गर्व के साथ कहना चाहता था कि मैं इरफ़ान पठान जैसा हिंदुस्तानी हूँ. मुझे दुख है कि इन दिनों उनकी फॉर्म कुछ गड़बड़ हो रही है.

आपका लेखन, संगीत, कूटनीति, क्रिकेट को लेकर ज़बर्दस्त ऊर्जा और उत्साह है. क्या है इसका राज़?

इसे भगवान का आशीर्वाद ही कहेंगे. कई सवाल ऐसे होते हैं, जिनके जवाब नहीं होते हैं. मेरी भावनाएँ अंदर से आती है. ये जज़्बात कभी लेखन में और कभी ये मेरे काम में दिखते हैं.

भगवान को मानते हैं?

हाँ, ज़रूर. वैसे भी हिंदुस्तान में भगवान को न मानना मुश्किल भी है. आप कोलकाता में ही देखिए. दुर्गा पूजा में कम्युनिस्ट भी चंदा देते हैं. कह सकते हैं दुर्गा मां के कम्युनिस्ट.

अपनी पसंद का एक और गाना?

फ़िल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का दम मारो दम बहुत पसंद है. ज़ीनत अमान भी मेरी पसंदीदा अभिनेत्री रही हैं.

ज़ीनत अमान से कभी आपकी मुलाक़ात हुई?

सेंट स्टीफंस कॉलेज में हमने ‘रोटी कपड़ा और मकान’ का प्रीमियर किया था. मैं स्टूडेंट यूनियन का प्रेसीडेंट था. तब उनसे दो मिनट की मुलाक़ात हुई थी.

आपका पसंदीदा गायक?

मोहम्मद रफ़ी मुझे बहुत पसंद हैं. उनके बहुत सारे गाने मुझे अच्छे लगते हैं. ‘अहसान तेरा होगा मुझ पर’ मुझे बहुत अच्छा लगता है. मुझे नहीं लगता कि कोई भा गायक उन जैसा गा सकता है.

आपकी पसंदीदा फ़िल्म?

मुझे लगान बहुत अच्छी लगी. इसके अलावा इक़बाल भी मुझे पसंद आई.

आपकी पसंदीदा अभिनेत्री?

माधुरी दीक्षित मुझे अच्छी लगती हैं. इनके अलावा ऐश्वर्या राय, प्रियंका चोपड़ा भी अच्छी लगती हैं.

खाने में क्या पसंद है आपको?

इडली मुझे बहुत अच्छी लगती है. इडली के साथ प्याज और लाल मिर्च की चटनी जिसे समंद कहते हैं, मुझे अच्छी लगती है.

तो इडली खाकर आप इतने तंदुरुस्त और फिट हैं?

फिट तो नहीं हूँ. रोज़ जिम जाता हूँ. थोड़ा बहुत व्यायाम करता हूँ. अच्छी बात है कि हमारे देश में भी अब लोग स्वास्थ्य को लेकर सजग होने लगे हैं.

आपका सबसे खुशनुमा पल?

जब मेरे जुड़वां बेटे हुए तो वो मेरी ज़िंदगी का सबसे खुशनुमा पल था. बहुत डर की बात भी थी, क्योंकि उनके जन्म के समय वो केवल एक-एक किलो के ही थे. तो आप सोच सकते हैं कि वो ज़िंदा रहे यही बड़ी बात थी.

अब तो बेटे काफ़ी बड़े होंगे?

हाँ. अब तो दोनों 24 साल के हैं और आपके जैसे पत्रकार हैं. एक लंदन में हैं कनिष्क थरूर. उनकी शॉर्ट स्टोरी को हाल ही में एक अवॉर्ड भी मिला है. कनिष्क से 3 मिनट बड़ा है इशान. इशान टाइम मैग़जीन के साथ हाँगकाँग में हैं. उन्होंने नेपाल के गृह युद्ध पर शानदार कवरेज की और टाइम मैग़जीन ने मुखपृष्ठ पर छापा. तो मैं गर्व से कहता हूँ कि मेरे दो बेटे हैं.

सबसे ज़्यादा शर्मिंदा कर देने वाला पल?

एक बार मैं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जॉन मेजर का भाषण सुनने गया और मैं लगभग उनके साथ बैठा था. वो संयुक्त राष्ट्र के बारे में बोल रहे थे कि 1945 में जब संयुक्त राष्ट्र शुरू हुआ तो इसके इतने सदस्य थे. जो संख्या उन्होंने बताई वो गलत थी, मेरे मुँह से एकाएक सही संख्या निकल गई. वहाँ मौजूद सभी लोग मेरी तरफ देखने लगे और मेरा चेहरा शर्म से सुर्ख लाल हो गया.

आपकी नज़रों में सच्चा प्यार क्या है?

मेरे विचार से सच्चे प्यार में आप अपने साथी का भला देखना चाहते हैं. आप चाहते हैं कि उनके लिए सब कुछ अच्छा हो.

आप अपनी पसंद का एक और गाना बताएँ?

‘चाहूँगा मैं तुझे शाम सवेरे’, चौदहवीं का चांद’ और ‘अच्छा तो हम चलते हैं’ मुझे बहुत पसंद है.

आपने अब तक जीवन में इतना कुछ किया है. आगे और क्या करना चाहते हैं?

मैंने अब तक जो भी किया और जो करना चाहता हूँ, मेरी सोच यही है कि कुछ ऐसा करूँ जो लोगों पर असर डाले. मैंने त्रिवेंद्रम में एक एकेडमी खोली है. मैं मानता हूँ कि हमारे छोटे शहरों में बहुत सारे युवा हैं जो अंग्रेजी में बात करने में हिचकिचाते हैं. तो इसके लिए एकेडमी शुरू की है. मैं राजनीति में भी जाना चाहूँगा तो सिर्फ़ इसलिए कि कुछ नीतियों से देश की सेवा कर सकूँ.

आपकी नज़र में आपकी सबसे बड़ी कमज़ोरी?

मेरी कमज़ोरी यही है कि एक ही समय पर बहुत सारी चीज़ें करता हूँ. तो इससे बहुत दबाव बनता है. लेकिन मैं शुरू से ही ऐसा हूँ.

आप खुद को दो वाक्यों में कैसे बताएँगे?

मैं बता नहीं सकता. क्योंकि मेरा मानना है कि अपने बारे में बताने से पहले आपको ये समझना होगा कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं. आपके एक्शन आपकी पहचान बताते हैं.

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