|
'करियर के मामले में महत्वाकांक्षी हूँ' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जाने-माने सितार वादक पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का इन दिनों अपने पिता के साथ भारत के पांच शहरों के दौरे पर हैं. हाल ही में कोलकाता में अपने पिता के साथ कार्यक्रम पेश कर संगीतप्रेमियों का दिल तो उन्होंने जीता ही, दिल की बीमारी से जूझ रहे ग़रीब बच्चों के लिए भी वह एक उम्मीद बनीं. उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश: आप एक बार फिर भारत दौरे पर हैं. इसकी कोई ख़ास वजह? हां, यह दौरा मेरे पिछले दौरों से अलग है. इस बार मैं अनुष्का शंकर प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न शहरों में कार्यक्रम पेश कर रही हूं.हम इस दौरे में दिल की बीमारी से पीड़ित गरीब बच्चों के इलाज के लिए धन जुटाएंगे. अनुष्का शंकर प्रोजेक्ट आख़िर है क्या? यह मेरे पिछले एलबम राइज़ की तर्ज़ पर है. हम विभिन्न ध्वनियों के साथ लगातार प्रयोग करते रहते हैं. भारतीय शास्त्रीय प्रस्तुतियों को इन प्रयोगात्मक कार्यों से अलग रखने के लिए इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई थी. साथ ही इस प्रोजेक्ट का मकसद गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान वापस लौटाना है. क्या आपके पिता पंडित रविशंकर का कोलकाता में यह आख़िरी कार्यक्रम है? पंडित जी का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है. उम्र भी बढ़ रही है. ऐसे में यह कोलकाता में उनका आख़िरी कार्यक्रम भी हो सकता है. लेकिन पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है. वे कभी भी अपने श्रोताओं को अपने नए कार्यक्रम से चौंका सकते हैं. वे जीवट वाले इंसान हैं. पंडित जी के सामने एकल प्रस्तुति के समय कैसा लगता है? पंडित जी की मौजूदगी में कार्यक्रम पेश करना हमेशा एक चुनौती रहा है. वे मेरे गुरू हैं. उनके रहते मेरे लिए कहीं किसी ग़लती की गुंजाइश नहीं रह जाती. इसलिए काफ़ी सावधानी बरतनी पड़ती है. उनके साथ कार्यक्रम पेश करने में ज़्यादा मुश्किल नहीं है. लेकिन जब वे श्रोता के तौर पर मौजूद हों तो यह काम मुश्किल हो जाता है.
क्या आप बॉलीवुड की फ़िल्मों में काम करेंगी? फ़िल्में मेरी प्राथमिकता नहीं हैं. सितार से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है. लेकिन एकाध प्रस्तावों पर विचार कर सकती हूं. हां, फिल्में ऐसी हों जिनमें इस कला को समुचित मर्यादा मिले. मैंने फिल्मों में जाने के लिए सितार बजाना नहीं शुरू किया था. सितार के अलावा आपको और कौन सी चीज़ सबसे ज़्यादा पसंद है? घूमना. मुझे घूमने का काफी शौक है. कार्यक्रमों के सिलसिले में तो देश-विदेश घूमना लगा ही रहता है. लेकिन मैं छुट्टियों में भी घूमना पसंद करती हूं. मुझे ब्राज़ील बहुत पसंद है. प्रकृति ने ब्राज़ील को खास किस्म की खूबसूरती दी है. वहां का संगीत भी मुझे बहुत पसंद है. संगीत ब्राज़ील के आम जीवन का अटूट हिस्सा है. वहां लोग संगीत को जीते हैं. भविष्य की योजना क्या है? क्या शादी के बाद भी सितार वादन जारी रहेगा? शायद जल्दी ही शादी कर लूं. हां, उसके बाद भी अपना करियर जारी रखूंगी. इस समय मैं साल के लगभग आठ महीने दौरों पर रहती हूं. शादी के बाद रिकॉर्डिंग के लिए ज़्यादा समय दूंगी, ताकि परिवार और बच्चों के साथ घर पर रहने का मौका मिले. करियर के मामले में मैं काफ़ी महात्वाकांक्षी हूं. क्या संगीत के आयोजनों पर भी वैश्विक मंदी का असर पड़ा है? हां, वैश्विक मंदी का असर इन पर भी पड़ा है. इसलिए पहले के मुकाबले इस साल मेरे दौरे कम हो रहे हैं. यही वजह है कि मैंने अब रिकार्डिंग पर ज़्यादा ध्यान देने का फ़ैसला किया है. इसके अलावा बॉलीवुड से मिले एक प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार कर रही हूं. |
इससे जुड़ी ख़बरें 'फ्यूज़न संगीत का भविष्य उज्ज्वल'03 जनवरी, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस ज़ाकिर हुसैन को ग्रैमी पुरस्कार09 फ़रवरी, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस बात तब और थी, बात अब और है02 अक्तूबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस भीमसेन जोशी भारत रत्न से सम्मानित10 फ़रवरी, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस रंगों में ढलते संगीत के सुर24 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'प्रयोग हों लेकिन शास्त्रीय शुद्धता के साथ'23 जनवरी, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस बिस्मिल्ला की शहनाई के नए वारिस25 अगस्त, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||