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नहीं रहे जॉन अपडाइक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जाने माने लेखक और दो बार प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीत चुके जॉन अपडाइक का अमरीका में निधन हो गया है. वो 76 वर्ष के थे. उनकी किताबों के प्रकाशक ने बयान जारी कर कहा है कि अपडाइक को फेफड़े का कैंसर था. जॉन अपडाइक की रैबिट इज़ रीच और रैबिट एट रेस्ट को दुनिया भर में पसंद किया गया था. उन्होंने अपने करियर में पचास से अधिक पुस्तकें लिखीं और उन्हें कई अवार्ड मिले. उनकी रैबिट ट्रायलॉजी की दो किताबें अत्यंत लोकप्रिय रहीं जबकि रैबिट एट रन को कम लोगों ने पसंद किया था लेकिन अपडाइक का नाम हमेशा ही रैबिट ट्रायलॉजी के लिए लिया जाता रहा है. अपडाइक को न केवल दो बार अमरीका का प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार मिला बल्कि उन्हें दो बार नेशनल बुक अवार्ड भी दिया गया. उन्होंने कविताएं, आलोचना, उपन्यास और छोटी कहानियां लिखी हैं. अपडाइक ने सेक्स, तलाक और युद्ध के बाद अमरीका के छोटे शहरों के जीवन को मुद्दा बनाकर लेखन कार्य किया जिन्हें अमरीका में ही नहीं पूरी दुनिया में पसंद किया गया. साहित्यिक आलोचक अपडाइक को बेहतरीन लेखक का दर्जा देते हैं और मानते हैं कि उन्होंने अपनी पीढ़ी के मुद्दों को बेहतरीन आवाज दी. है. | इससे जुड़ी ख़बरें मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास ‘कपीश’ का अंश30 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस लेखक नॉर्मन मेलर का निधन10 नवंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस धूम मचाने फिर आएगा हैरी पॉटर?30 दिसंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस चेतन की नज़र में युवा भारत....08 मई, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'कहानी कहने का फ़न आना चाहिए'18 मई, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस ‘अफ़ीम थी ब्रितानी राज की ताकत’24 जून, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'एक ख़ास तबक़ा डरता है...ये सोच आगे न जाए...'09 जुलाई, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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