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लेखक नॉर्मन मेलर का निधन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित अमरीकी लेखक नॉर्मन मेलर का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. वो लंबे अरसे से गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे थे. मेलर दो बार पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित किए गए. पहली बार वर्ष 1968 में अपनी कृति 'आर्मीज़ ऑफ़ द नाइट' के लिए और वर्ष 1979 में 'द एक्सक्यूशनर्स सॉंग' के लिए. वो अपने तीखे गद्य लेखन के लिए मशहूर थे. उन्हें नारीवादी आंदोलन का विरोधी भी समझा जाता था. नॉर्मन मेलर की आख़िरी कृति 'द कैसल इन द फॉरेस्ट' इसी साल रिलीज़ हुई है. पिछले महीने ही नॉर्मन के फेफड़े की सर्जरी हुई थी. वर्ष 1923 में न्यू जर्सी में जन्मे नॉर्मन मेलर ने दर्जनों लेख, पटकथाएँ और कविताएँ लिखी. इराक़ और वियतनाम युद्ध पर उन्होंने अपनी लेखनी के ज़रिए कड़ी टिप्पणी की. वो ख़ुद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सेना में शामिल थे और इसमें मिले अनुभवों के आधार पर मेलर ने वर्ष 1948 में 'द नेकेड एंड द डेड' नामक उपन्यास लिखा जिससे उन्होंने काफी ख़्याति बटोरी. उनकी रचनाओं में अक़्सर हिंसा, सेक्स सामग्री और ऐसे विचारों का समावेश रहा जिनके कारण उन्हें आलोचनाओं का शिकार भी बनाना पड़ा. | इससे जुड़ी ख़बरें सर सलमान की चौथी शादी टूटी02 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस रुश्दी पर कूटनीतिक विवाद गहराया20 जून, 2007 | भारत और पड़ोस मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास ‘कपीश’ का अंश30 मार्च, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'सद्दाम का उपन्यास' बिक्री के लिए19 मई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस मारकेज़ के उपन्यास की जाली प्रतियाँ20 अक्तूबर, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस झाड़ू-पोंछे से लेखिका बनने का सफ़र29 अगस्त, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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