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बांग्लादेश ने बनवाया अपना ताजमहल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत इमारत के रूप में जाने जाने वाले ताजमहल की एक प्रतिमूर्ति तैयार की गई है. बांग्लादेश के ग्रामीण इलाके सोनारगाँव में बनाए गए इस ताजमहल के दरवाज़े जनता के लिए मंगलवार से खोले जा रहे हैं. बीबीसी संवाददाता मार्क डमेट के अनुसार, "इस ताजमहल पर पाँच करोड़ 80 लाख डॉलर की लागत आई है." इसके मालिक अहसानुल्लाह मोनी ने कहा कि उन्होंने ताजमहल की प्रतिमूर्ति इसलिए बनवाई है ताकि उनके देश के ऐसे बुज़ुर्ग और महिलाएं जो भारत न जा सकते हो, वो शाहजहाँ के प्यार की मिसाल ताजमहल की ख़ूबसूरती को देख सकें. बांग्लादेशी फ़िल्मों के सफल निर्देशक मोनी ने कहा कि राजधानी ढाका से एक घंटे की दूरी पर स्थित उनकी यह प्रतिमूर्ति विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी. आसान और सस्ता मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में आगरा में यह मक़बरा बनवाया था.
ताजमहल को बनाने में 17वीं शताब्दी में जहाँ 20 साल और 20 हज़ार कामगार लगे थे वहीं आधुनिक तकनीक के कारण मोनी का ये ताज पाँच वर्षों में बन गया और इसे बनाने में उतने कामगारों की भी ज़रूरत नहीं पड़ी. लेकिन ये उतना आसान और सस्ता भी नहीं था. मोनी कहते हैं कि उन्होंने इसके लिए संगमरमर और ग्रेनाइट इटली से मंगवाए और हीरे बेल्जियम से मंगवाए. इसे बनवाने के लिए उन्होंने अपने आर्किटेक्टों को पहले ताजमहल देखने के लिए भारत भेजा ताकि वे असली ताज के आकार की सही पैमाइश लेकर बेहतरीन नक़ल तैयार कर सकें. अभी इसके आसपास के तालाबों और बागों इत्यादि का काम अब भी पूरा नहीं हुआ है. उसके बाद ही बांग्लादेश के नागरिक ये तय कर पाएंगे कि मोनी का ताजमहल असली ताज की ख़ूबसूरती और पवित्रता की असली नक़ल है या नहीं. |
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