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चर्चित पेंटर पारितोष सेन का निधन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के चर्चित पेंटर और कलाकार पारितोष सेन का कोलकाता में देहांत हो गया है. वे 90 वर्ष के थे. पिछले कुछ समय से वे बीमार चल रहे थे. पारितोष सेन को पिछले महीने साँस की समस्या के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वे जीवन रक्षक प्रणाली पर थे. उनका निधन कला के क्षेत्र में एक बड़ा नुक़सान माना जा रहा है. आधुनिक कला में अग्रणी पारितोष सेन ने कला की पढ़ाई पहले चेन्नई में की और फिर बाद में पेरिस में की जहाँ उनकी मुलाक़ात मशहूर चित्रकार पाब्लो पिकासो से हुई. कहा जा जाता है पिकासो से वो काफ़ी प्रभावित हुए. सेन ने दुनिया भर की यात्राएँ की और इसकी वजह से उनकी पेंटिंग में काफ़ी बदलाव आते रहे. परिचय पारितोष ने भारतीय कला का आधुनिकता से परिचय कराया. फ़्रांस सरकार ने उन्हें नोबेल विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की रचना पर आधारित बंगाली टाइपोग्राफ़ी डिज़ाइन करने की ज़िम्मेदारी दी थी. कोलकाता से प्रकाशित समाचार पत्र टेलीग्राफ़ ने लिखा है कि पारितोष सेन का संबंध ख़त्म हो रहे कलाकारों की नस्ल से था जो अपने शानदार घर और भीड़भाड़ वाली गलियों में भी समान रूप से सहज थे. सेन ने भारतीय कला के विषयों पर अंग्रेज़ी और बांग्ला भाषाओं में कई लेख लिखे हैं. जाने-माने कलाकार केजी सुब्रमण्यम ने पारितोष के निधन को बड़ी क्षति बताया है. उन्होंने कहा कि पारितोष सेन अपने दौर के बहुत बड़े कलाकार थे और मानव जीवन को बहुत गहराइयों के साथ देखते थे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मेरे चित्रों में मौत की छाया उभर आती है'16 जनवरी, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस सड़कों पर रिक्शे से कैनवस पर कूची तक28 मई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस चिंपान्ज़ी की बनाई पेंटिंग 12 हज़ार पाउंड की20 जून, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस भारतीय कला में आ रही है चमक11 फ़रवरी, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस कूची से कपड़े उतारने की कला08 अक्तूबर, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस आख़िरी साँस लेती एक कला27 फ़रवरी, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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