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चिंपान्ज़ी की बनाई पेंटिंग 12 हज़ार पाउंड की | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन में एक नीलामीघर में चिंपान्ज़ी की बनाई तीन पेंटिंगें 12 हज़ार पाउंड में बिकी हैं. कांगो नाम के एक चिंपान्ज़ी ने ये तीन पेंटिंग्स बनाई थी जिनकी क़ीमत 800 पाउंड रखी गई थी लेकिन जब बोली लगनी शुरु हुई तो क़ीमत 12 हज़ार पाउंड पर जाकर ख़त्म हुई. कांगो की इन पेंटिग्स को खरीदा अमरीका के हॉवर्ड होंग ने. नीलामीघर बॉनहैम्स का कहना है कि इन पेंटिंगों को खरीदने के लिए काफ़ी उत्साह था और तीनों पेंटिंगों की एक साथ ही क़ीमत लगाई गई थी. पेंटर और जानवरों के व्यवहार के जानकार डेसमंड मोरिस ने लंदन के आईसीए में जानवरों द्वारा बनाई चित्रों की एक प्रदर्शनी लगाई थी जहां ये चित्र सबसे पहले दिखाए गए थे. नीलामीघर बॉनहैम्स का कहना है कि मोरिस ने चिंपान्ज़ियों को समझने की चेष्टा की है और इसी का नतीजा थीं कांगो का पेंटिंग बनाना.
कांगो ने 1950 के दशक में 400 से अधिक पेंटिंगें बनाई हैं और इस पर कला जगत की प्रतिक्रिया मिली जुली रही है. बॉनहैम्स के निदेशक हॉवर्ड रुतकोवस्की कहते हैं कि ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि चिंपान्ज़ी की बनाई पेंटिंगों की नीलामी हुई हो. उन्होंने कहा " मुझे नहीं लगता किसी और ने इस तरह की बात सोची होगी. मुझे लगता है कि दूसरे नीलामी घर ऐसा करने को पागलपन समझ रहे हों. " बॉनहैम्स में बिक्री के लिए एंडी वारहोल की प्रसिद्ध पिस्स पेंटिंग भी है. ये पेंटिंग कुछ अजीब ढंग सें बनाई जाती थीं. इन पेंटिंगों के लिए तांबे की पेंट लगा कर कैनवस तैयार किया जाता था और फिर लोग उस पर पेशाब करते थे. 1979 में बनी इस पेंटिंग की क़ीमत फिलहाल रखी गई है 35000 पाउंड से 45000 पाउंड के बीच. |
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