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त्योहारों का संगम है एडिनबरा महोत्सव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबरा शायद दुनिया का एकमात्र शहर है जहाँ पूरे साल त्योहारों का मौसम रहता है. अगस्त में यहाँ पर्यटकों की चहलकदमी कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाती है. दरअसल, सिर्फ़ अगस्त में ही एडिनबरा में आठ अलग-अलग तरह के फेस्टिवल होते हैं. नौ घंटे के थकाऊ सफर के बाद में एडिनबरा पहुँचा, लेकिन यहाँ पहुँचते ही ठंडी हवा के झोंके के साथ कान में पश्चिमी अफ्रीका के लोक संगीत की मीठी आवाज़ ने एक पल में सारी थकावट दूर कर दी. संगीत का मेला पश्चिमी अफ्रीका के लोकसंगीत में बांस के वाद्ययंत्रों पर फ्रांस के कलाकारों को थिरकते देखना एक नया अनुभव था. एडिनबरा की पहली झलक से ही मन रोमांचित हो उठा. सड़कों पर निगाह डाली तो चारों तरफ सिर्फ पोस्टर और कलाकारों की तस्वीरें ही नज़र आईं. ऐसा लगा मानो पूरा शहर त्योहारों के रंग में रंगा हुआ है. हर दूसरे मोड़ पर या तो संगीत की एक नई धुन सुनाई देती या फिर हैरतंगेज़ कारनामें करते कलाकार. अगस्त में एडिनबरा में आठ फेस्टिवल होते हैं. इनमें एडिनबरा इंटरनेशनल फेस्टिलव सबसे ज़्यादा मशहूर है और इसका ऐतिहासिक महत्व भी है. दूसरे विश्वयुद्ध की कड़वी यादों के भुलाने के लिए 1947 में इस त्योहार की शुरुआत हुई थी. इसमें दुनियाभर के कलाकारों को आमंत्रित किया जाता है. 1947 से अब तक में इस फेस्टिवल ने कई बदलाव देखे हैं, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला है तो इस फेस्टिवल को लेकर कलाकारों का जज़्बा. शायद इसलिए हर कलाकार यहाँ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करता है. कलाकारों का जमावड़ा इस साल एडिनबरा इंटरनेशनल फेस्टिवल में 20 से भी ज्यादा देशों के 2300 कलाकारों ने हिस्सा लिया. सिर्फ़ इंटरनेशनल फेस्टिवल में ही करीब 152 कार्यक्रम हुए.
आठ अगस्त को शुरू हुआ एडिनबरा इंटरनेशनल फेस्टिवल 31 अगस्त को शानदार आतिशबाज़ी के साथ खत्म होगा. इस साल 400 किलो से ज़्यादा और करीब एक लाख अलग-अलग तरह के पटाखों का इस्तेमाल किया जाएगा. बीते साल इस आतिशबाज़ी को देखेने के लिए ढ़ाई लाख से ज़्यादा लोग जुटे थे. एडिनबरा इंटरनेशनल फेस्टिवल की प्रवक्ता सुशी बर्नेट फेस्टिवल की सफलता से बेहद खुश हैं. बर्नेट कहती हैं, “हम हर साल कुछ नया करने की कोशिश करते हैं और वर्ष 2008 की हमारी थीम से दर्शक बेहद खुश हैं.” एडिनबरा इंटरनेशनल फेस्टिवल भले ही खूब लोकप्रिय हो, लेकिन फ्रिंज फेस्टिवल एडिनबरा के त्योहारों की आत्मा है. फ्रिंज में हर साल हज़ारों कलाकार हिस्सा लेते हैं. यहाँ आने वालों में से क़रीब 75 फ़ीसदी दर्शकों ने तीन से 25 अगस्त तक चले फ्रिंज फेस्टिवल में शिरकत की. सांस्कृतिक पहचान एडिनबरा मेला भी इस फेस्टिवल की मशहूर इवेंट है. एडिनबरा मेले में स्कॉटलैंड के सांस्कृतिक मिश्रण की शानदार झलक मिलती है. विदेश और संस्कृति मंत्री लिंडा फैबियानी कहती हैं, “एडिनबरा मेला हमारे देश की सांस्कृतिक भिन्नता को दर्शाता है और ये एडिनबर्ग के त्योहारों का एक अहम हिस्सा है.” दरअसल, एडिनबरा मेला एशियाई मूल के कलाकारों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इस साल इस मेले में नाटकों के ज़रिए दक्षिण एशिया के कई मुद्दों को उठाने की भी कोशिश की गई. एक ऐसे ही नाटक ‘जिहाद, एन इनर स्ट्रगल’ में एक ऐसे मुस्लिम युवक के अंतर्द्वंद्व को दर्शाने की कोशिश की गई जो पश्चिमी सभ्यता के रंग में पूरी तरह से रंग चुका है. नाटक के निर्देशक फ़ारुख़ ख़ान के मुताबिक अमेरिका में ट्विन टावर्स पर हुए आतंकी हमले के बाद उन्हें इस नाटक को लिखने की प्रेरणा मिली. फ़ारुख़ ख़ान के मुताबिक इस नाटक के ज़रिए उन्होने युवा पीढ़ी को ये संदेश देने की कोशिश की है कि युवाओं को अपना रास्ता खुद तलाशना चाहिए, क्या सही है और क्या ग़लत है इसका फैसला उन्हें खुद करना होगा. इसके अलावा ऑरकेस्ट्रा टिपिका इंपीरियल, लंदन कम्युनिटी गॉस्पेल चॉयर, और तारीख़ ख़ान के लेगेसी बैंड ने भी मेले में चार चाँद लगाए. | इससे जुड़ी ख़बरें खुशनुमा मौसम ने बदला लंदन का मिज़ाज10 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना प्रेमियों का देश...या..24 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना तलाक़ के लिए सबसे बड़ा मुआवज़ा03 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना मुलाक़ात एक 'ख़तरनाक अपराधी' से28 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना अपनी पहचान चाहते हैं ब्रिटेन के हिंदू11 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 'डायना-डोडी की हत्या नहीं की गई'14 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना महिलाओं में ख़तना की प्रथा की निंदा02 जून, 2006 | पहला पन्ना क्या उपयोगिता रही स्काईलैब की!03 मई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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