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शनिवार, 19 अप्रैल, 2008 को 13:14 GMT तक के समाचार
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बीआर चोपड़ा की यादगार फ़िल्मों का विशेष उत्सव
वक़्त
बीआर चोपड़ा ने नया दौर और वक़्त जैसी बेहतरीन फ़िल्में बनाई हैं
भारतीय फ़िल्म इतिहास में फ़िल्मकार बीआर चोपड़ा का नाम बड़ा अदब से लिया जाता है. उनके 94वें जन्मदिन के मौके पर दिल्ली में बीआर चोपड़ा की फ़िल्मों का विशेष उत्सव मनाया जा रहा है.

शुक्रवार शाम को शुरु हुए फ़ेस्टिवल में इंसाफ़ का तराज़ू फ़िल्म दिखाई गई.

उत्सव के दौरान छोटी सी बात, नया दौर और वक़्त जैसी क्लासिक फ़िल्में देखने को मिलेंगी.

खराब सेहत के कारण बीआर चोपड़ा ख़ुद समारोह में शामिल नहीं हो सके.फ़िल्मोत्सव का उदघाटन बीआर चोपड़ा के भाई और मशहूर फ़िल्मकार यश चोपड़ा ने किया.

उन्होंने कहा, "मेरे भाई ने अपने हिसाब से फ़िल्में बनाईं- वो भी ऐसे समय में जब लोग ऐसी फ़िल्मों की व्यावसायिक सफलता को लेकर आशंकित रहते थे क्योंकि ये फ़िल्में कुछ हटकर होती थीं, उस समय जिस तरह की कहानियों का चलन था, बीआर चोपड़ा जी की कहानियाँ उनसे जुदा होती थी."

बीआर चोपड़ा ने अपनी फ़िल्मों में विधवा पुनर्विवाह, वेश्यावृत्ति जैसे कई विषयों को उठाया.

यादगार फ़िल्में

1957 में आई उनकी फ़िल्म नया दौर में नेहरू काल के आर्दश झलकते हैं तो 1958 में आई साधना वेश्यावृत्ति के मुद्दे पर समाज से सवाल करती नज़र आती है.

गुमराह, हमराज़,क़ानून और निकाह जैसी फ़िल्में का नाम उनकी बनाई फ़िल्मों की सूची में शामिल है.

हालांकि बीआर चोपड़ा की ज़्यादातर फ़िल्में किसी न किसी सामाजिक मुद्दे पर आधारित होती थीं लेकिन इन प्रयोगात्मक फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर भी कमाल दिखाया.

नया दौर की कहानी को कई टॉप निर्देशकों ने ठुकरा दिया था लेकिन बीआर चोपड़ा ने रिस्क लिया और फ़िल्म बनाई.

बीआर चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा ने इस मौके पर कहा, "मेरे पिता काम को अंजाम देने में विश्वास रखते हैं. मेरे लिए वो सर्वश्रेष्ठ निर्देशक हैं और रहेंगे."

नया दौर का रंगीन वर्ज़न भी कुछ समय पहले रिलीज़ किया गया था.

फ़िल्म उत्सव में बीआर चोपड़ा के जीवन पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र भी दिखाया गया.

इस समारोह में यश चोपड़ा के अलावा राज बब्बर, निर्देशक बासु चटर्जी, संगीतकार रवि और निर्माता बॉबी बेदी ने हिस्सा लिया.

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