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दिल की बात है 'बॉन्डिंग' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुज़रे ज़माने की मशहूर बॉलीवुड अदाकारा वैजयंतीमाला ने अपनी आत्मकथा 'बॉन्डिंग' में अपने बचपन से अब तक के सफ़र का चित्र उकेरा है. वो कहती हैं कि यह आत्मकथा उनके दिल की बात है क्योंकि इसे दिल से लिखा गया है. उन्होंने बताया कि बॉन्डिंग में उन्होने अपने बचपन से अब तक के सफ़र का चित्र उकेरा है कि कैसे उनके अंदर नृत्य को लेकर दीवानगी जगी, फिर उनका फिल्म इंडस्ट्री में आना कैसे हुआ. आत्मकथा में उन्होंने चमनलाल बाली से विवाह, राजनीतिक जीवन में प्रवेश और फिर पति की मृत्यु के बाद के अपने जीवन जैसे विषयों पर चर्चा की है. इस आत्मकथा का लोकार्पण केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने किया. सफ़र वैजयंती माला पहली ऐसी दक्षिण भारतीय अभिनेत्री थीं जिन्होंने हिंदी सिनेमा में ऊँचाइयों को छुआ और पूरे देश में स्टार का दर्जा रखने वाली अभिनेत्री बनीं. दिग्गज सिने अभिनेता दिलीप कुमार के साथ उनकी जोड़ी काफी लोकप्रिय रही थी. वैजयंती माला अपनी सफलता का श्रेय अपनी नानी यदुगिरी देवी को देती हैं जिन्होंने उनका पालन पोषण करने के साथ उन्हें नृत्य की शिक्षा भी दिलाई जो बाद में उनके करियर का आधार बना.
वो बताती हैं, "उस ज़माने में आज की तरह प्रतिस्पर्धा नहीं हुआ करती थी, लेकिन मुक़ाबला खुद से हुआ करता था. इसलिए जो काम मिला उसे पूरी मेहनत और लगन से किया बस. फिर कभी सफलता मिली और कभी असफलता लेकिन ईमानदारी से अपना काम करना जारी रखा." उन्होंने बताया कि उनके दोस्त और शुभचिंतक अक्सर आत्मकथा लिखने के बारे में कहते थे लेकिन उन्होंने कभी इसके लिए योजना नहीं बनाई थी. . वैजयंती माला कहती हैं कि पिछले चार-पांच सालों में उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को डायरी में लिखना शुरू किया. वो अक्सर अपने साथ पेन और कागज रखती थीं ताकि जब भी कुछ महत्वपूर्ण याद आया उसे लिख लिया जाए. पिछले महीने उन्होंने अपने भरतनाट्यम नृत्य के डीवीडी भी जारी किए थे. उन्होंने बताया कि वह इस नृत्य को लेकर काफी शोध करती हैं और उनकी कोशिश है कि प्राचीन समय में मंदिरों में किए जाने वाले नृत्यों के बारे में जानकारी जुटाकर उसे आज की युवा पीढ़ी के लिए सामने लाया जाए. वैजयंतीमाला ने कहा "आज फ़िल्मों में नृत्य का गिरता स्तर चिंताजनक है, पहले फ़िल्मों में नृत्य या डांस का कलात्मक आधार होता था लेकिन आजकल इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जाता". उन्होंने कहा कि हाल में उन्होंने देवदास फ़िल्म देखी जो काफी बेहतर थी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 'नया दौर' और 'मुग़ले आज़म' जैसी पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्मों का रंगीन संस्करण बिल्कुल स्वाभाविक लग रहा था जो कि वास्तव में सराहनीय है. | इससे जुड़ी ख़बरें अभिनेत्री पद्मिणी का निधन 25 सितंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना पाया है बॉलीवुड?03 फ़रवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'बदलते भारत का आईना है सिनेमा'01 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'नए लोगों में जुनून की कमी'02 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस हिंदी सिनेमाः सब कुछ सच्चा, चेहरा झूठा03 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस हीरो: कड़ी चुनौती से अभिनयहीनता तक05 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस नायिकाओं की भूमिका बदली, जगह नहीं02 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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