|
ज़िंदगी अपने आप में रोमांस है: देवानंद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देवानंद कहते हैं कि ज़िंदगी अपने आप में एक रोमांस है और इसलिए इसके प्रति हमेशा सकारात्मक नज़रिया रखना चाहिए. एक समारोह में भाग लेने जयपुर आए देवानंद लोगों से दिल खोलकर मिले और उनके सवालों के बेलाग जवाब भी दिए. उनको इस बात का काफ़ी दुख है कि युवा राजनीति में नहीं आ रहे हैं. देव साहब ने कहा, '' मैं हर उस इंसान से मिलता हूँ जो मुझसे मिलना चाहता है. अगर कोई मुझसे मिलना चाहता है तो यह उसका हक़ है और मुझे कोई हक़ नहीं कि उससे न मिलूं.'' उन्होंने कहा, '' मेरे यहाँ आने वाले फ़ोन भी मैं ख़ुद उठता हूँ. हालांकि मेरे कई दफ़्तर चलते हैं और कई लोग काम करते हैं, लेकिन मुझे ये तो पता होना चाहिए कि मुझे किसने फ़ोन किया था.'' क्या उन्हें जीवन में कोई ख़राब अनुभव हुए? इसके जवाब में देवानंद कहते हैं, ''जीवन में ख़राब और अच्छा, दोनों अनुभव होते हैं. मेरी ज़िंदगी में ख़राब अनुभव भी हुए होंगे, मैं उनकी संख्या नहीं बता सकता. क्योंकि मेरा चरित्र ही ऐसा है कि जितनी बुरी चीज़ें होती हैं उन्हें एक सेकेंड में भूल जाता हूँ. इसलिए मैं मैं हूँ.'' देव साहब कहते हैं कि अगर सबको याद रखता तो अब तक कई मौतें आ गई होतीं. उन्होंने कहा कि एक ख़ूबसूरत ज़िंदगी बिना फूलों के नहीं हो सकती और फूल के साथ काँटे भी होते हैं. रोमांस और राजनीति किसी ने पूछा, आपने एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई थी, क्या हुआ? देवानंद ने जवाब दिया,'' दरअसल चुनाव बहुत नज़दीक थे और उम्मीदवार बनाने के लिए लोग भी जुटाने थे. दो-चार लोग आए और कहने लगे कि हमें नामित कर दीजिए. मैंने कहा चुनकर जाना एक बात है और नामांकित होना और बात है.'' देवानंद कहते हैं, '' इस देश की सबसे बुरी बात यह है कि युवा लोग राजनीति में नहीं आ रहे हैं. अगर युवा, पढ़े-लिखे और दूरदर्शी लोग सियासत में आ गए तो हिंदुस्तान से बेहतर कोई देश नहीं होगा.'' उन्होंने कहा, ''मैं वैसे बहुत तन्हा और एकाकी हूँ. लेकिन मेरे अंदर एक भीड़ है. मैं जहाँ चाहता हूँ, पहुँच जाता हूँ. जो दिल करे जाकर कर लेता हूँ, जिसे दिल चाहे मिल लेता हूँ.'' रूमानियत के बारे में देवानंद ने कहा,'' मुझे लगता है कि जीवन का हर लम्हा रोमांटिक है, हमारा प्रोफ़ेशन ही रोमांटिक है. राजनीति भी रोमांटिक है, अगर राजनीति में अपने देश से रोमांस कर रहे हैं तो आपका देश बहुत महान हो सकता है. लेकिन अगर देश से रोमांस नहीं कर रहे हैं तो गड़बड़ है. आप रोमांस से अलग नही हो सकते हैं.'' अपनी आत्मकथा 'रोमांसिंग विद लाइफ़' के बारे में देवानंद कहते हैं, ''इसमें सचाई बयां की गई है.'' |
इससे जुड़ी ख़बरें अब रंगीन बनेगी देवानंद की 'हम दोनों'08 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'मेरे रंगीन जीवन का लेखा है ये आत्मकथा'08 जनवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस कोशिश तो सबको करनी चाहिए19 अक्तूबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस ठहरा हुआ नहीं दिखना चाहिए14 सितंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||