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सरोद वादक शरन रानी का निधन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जानी मानी संगीतकार शरन रानी का मंगलवार को निधन हो गया. सरोद जैसे मर्दाने साज़ को बजाने वाली वो पहली महिला थीं जिसके कारण उनके प्रशंसक उन्हें ‘सरोद रानी’ के नाम से पुकारते थे. उनका देहांत उनके अस्सीवें जन्मदिन से एक दिन पहले हो गया. शरन रानी का जन्म 9 अप्रैल, 1929 को दिल्ली के एक जाने माने कायस्थ परिवार में हुआ था. उस समय लड़कियां के संगीत के क्षेत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की मनाही थी. लेकिन प्रतिकूल वातावरण के बावजूद उन्होंने सरोद में पारंगत हासिल की थी. उन्होंने उस्ताद अलाउद्दीन ख़ाँ और उस्ताद अली अकबर ख़ाँ से संगीत की शिक्षा ग्रहण की थी. वो पहली महिला थीं जिन्हें सरोद के कारण विभिन्न सम्मान मिले. संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण और राष्ट्रीय कलाकार की उपाधि से सम्मानित किया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें 'भारत का सांस्कृतिक दूत' कहा था. उन्होंने पंद्रहवीं शताब्दी के बाद बने हुए वाद्य यंत्रों का न केवल संग्रह किया बल्कि राष्ट्रीय संग्रहालय को दान में दे दिया. वो पिछले कुछ समय से बीमार थीं लेकिन अंत तक उनकी संगीत साधना थमी नहीं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'संगीत आँखों से सुना जा रहा है'23 अक्तूबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'संत संगीतकार थे बिस्मिल्ला ख़ान'21 अगस्त, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस शहनाई के बेताज बादशाह21 अगस्त, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस संगीतकार नौशाद का निधन05 मई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस संगीतकार ओपी नैयर का निधन28 जनवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'कमलेश्वर का जाना कल्पना से परे की बात'27 जनवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस महान ऑपेरा गायक पावारोत्ती का निधन06 सितंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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