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महान ऑपेरा गायक पावारोत्ती का निधन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के महानतम ऑपेरा गायकों में से एक माने जाने वाले इटली के लुचानो पावारोत्ती का गुरूवार को 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके मैनेजर ने बताया कि पावारोत्ती ने उत्तरी इटली के अपने घर में अंतिम सांस ली. पावारोत्ती अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित थे. पावारोत्ती का जुलाई, 2006 में न्यूयार्क में कैंसर का आपरेशन किया गया था. उसके बाद पावारोत्ती कभी सार्वजनिक रूप से नज़र नहीं आए. पावारोत्ती को बुखार होने के बाद पिछले आठ अगस्त को इटली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वो एक हफ्ते पहले ही अपने घर वापस आए थे. महान कलाकार पावारोत्ती लगातार 40 साल से ऑपेरा गायन के बेताज बादशाह रहे हैं. मैडोना और एल्टन जॉन जैसे पाप स्टारों की तरह पावारोत्ती भी स्टार रहे हैं और उन्हें बेहद पसंद किया जाता था. पावारोत्ती को ऑपेरा गायकी को फिर से नई प्रसिद्धि दिलाने का श्रेय दिया जाता है. खासतौर पर उनकी एक धुन दुनियाभर में फुटबॉल की सबसे लोकप्रिय धुन बन गई थी. गौरतलब है कि इटली का ऑपेरा गायन पश्चिमी देशों की परंपरागत संगीत विधा माना जाता है. इसमें किसी कहानी या घटनाक्रम को संगीतबद्ध गायन के जरिए प्रदर्शित किया जाता है. पावारोत्ती ने अपनी पहली पत्नी आडुआ के साथ 35 वर्ष वैवाहिक जीवन बिताने के बाद 1996 में तलाक़ ले ली थी. उन दोनों के तीन बेटियाँ हैं. उसके बाद वह अपनी सेक्रेटरी निकोलेटा के साथ रहने लगे. उनके जुड़वाँ बच्चे पैदा हुए लेकिन केवल एक बेटी एलिस जीवित बची. बाद में एक भव्य समारोह में उन्होंने निकोलेटा से विवाह कर लिया. संवेदना लंदन के रॉयल ऑपेरा हाउस के पूर्व निदेशक सर जेरेमी आइज़ैक्स कहते हैं, "उनकी आवाज़ ऐसी थी जो आपको मंत्रमुग्ध कर देती थी, जब वो गीत के चरम पर पहुँचते थे तो आपकी गर्दन के पीछे के रोंगटे तक खड़े हो जाते थे. उनकी आवाज़ संगीतमय थी और उनकी आवाज़ बड़ी थी, भारी भरकम." लुचाने पावारोत्ती फ़ुटबॉल खिलाड़ी बनना चाहते थे लेकिन चार साल से ही गाने की ऐसी लगन लगी कि युवावस्था में जब फ़ैसले की घड़ी आई तो फ़ुटबॉल भूल गए. पूर्व हो या पश्चिम, शास्त्रीय संगीत के सुनने वाले कम ही होते हैं. लेकिन शायद यही पावारोत्ती की ख़ासियत थी– वो इतालवी ऑपेरा को आम लोगों तक पहुँचा पाए. पावारोत्ती उत्तरी इटली के मोदीना शहर में पैदा हुए और बीस साल की उम्र में ऑपेरा गाना शुरू किया. 1941 में लंदन के कोवेंट गार्डन में पावारोत्ती को लोगों ने सर आँखों पर बिठाया और फिर उन्होंने कभी पलटकर नहीं देखा. 1986 के बाद से तो वो एक बार गाने के 40 लाख रुपए तक लेने लगे. लोकप्रियता हो तो ऐसी, यूँ तो दुनिया भर के करोड़ों लोग पावारोत्ती को भावभीनी विदाई दे रहे हैं. रोम में सड़कों पर लोग रोते तक देखे गए. एक व्यक्ति ने कहा, "पावारोत्ती का जाना एक बहुत ही बड़ा आघात है. वो एक महान गायक थे. और ये दुनिया भर के लोगों के लिए एक बड़ा आघात है." जबकि दूसरे का कहना था, "संगीत की दुनिया का एक महान आदमी आज नहीं रहा. मुझे उनके जाने का बहुत दुःख है क्योंकि मैं बरसों से उनके गायन का प्रशंसक रहा हूँ." लुचानो पावारोत्ती को पिछले साल कैंसर हो गया था और तभी से वो स्टेज पर कम से कम दिखने लगे थे लेकिन पिछले एक महीने से उनकी तबीयत ख़राब थी और गुरुवार की सुबह उन्होंने अपने जन्मस्थल मोदीना के पास अपने घर में आख़िरी साँस ली. | इससे जुड़ी ख़बरें लंदन के मंच पर गांधी का सत्याग्रह17 अप्रैल, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस लंदन में ब्रास बैंड की गूँज03 जुलाई, 2004 | पहला पन्ना संगीतमय नाटक में शिल्पा होंगी स्टार27 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस रंगों में ढलते संगीत के सुर24 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस रबींद्र संगीत की अमरीकी साधिका17 जुलाई, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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