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'कमलेश्वर का जाना कल्पना से परे की बात' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कमलेश्वर हमें छोड़कर चला गया. इस बारे में क्या कहूँ...क्या कह भी सकता हूँ. यह नया वर्ष इस तरह की ख़बर लेकर आएगा, ऐसा नहीं सोचा था. हमारी दोस्ती 50 बरस पुरानी है. हमने साथ-साथ लिखना शुरू किया. साथ-साथ सीखा और काम किया. कमलेश्वर तो मुझसे दो-तीन साल छोटे थे. इतनी जल्दी और इस तरह चले जाएँगे, ऐसी उम्मीद नहीं थी और यह बात मेरे लिए कल्पना से परे है. कमलेश्वर का न होना मेरे लिए कुछ इस तरह से है जैसे किसी का हवा-पानी कम कर दिया जाए. जीवन के कई दौर हमने साथ ही बिताए. इनमें से कुछ अच्छे भी थे और कुछ बुरे भी. बचपन और लड़कपन के दिनों से हमारा साथ रहा है. कमलेश्वर की स्थिति लगभग एक स्टार वाली स्थिति थी. हालांकि उनके लेखन को लेकर कई तरह की बातें भी होती रही हैं. कई तरह के मतभेद भी रहे हैं. कोई कहता था कि उनके लेखन में स्टारडम ज़्यादा है तो कुछ और बातें कहता रहा है. कई लोग कहते हैं कि कमलेश्वर अपने आप को स्थापित करने में बहुत कुशल थे. ख़ास पहचान मैं समझता हूँ कि कमलेश्वर एक बहुत अच्छे रचनाकार थे. बहुत ख़ूबसूरत ज़बान लिखते थे. हाथ की लिखावट तो ऐसी थी कि किसी को भी ईर्ष्या हो सकती थी. कुल मिलाकर वो एक व्यक्तित्व भर नहीं थे बल्कि कई व्यक्तित्वों को अपने में समेटे हुए थे. बहुत ही जीवंत व्यक्तित्व था उनका. कमलेश्वर जैसा जीवंत व्यक्तित्व मेरे पास दूसरा नहीं रहा. बहुत ही रचनात्मक थे वो. मुझे याद है कि शुरुआती दौर में भी कमलेश्वर मेरे बारे में और मोहन राकेश के बारे में तरह-तरह के चुटकुले बनाकर सुनाया करते थे. और यह धक्का तो वर्ष की शुरुआत में ही लग गया है हमें. हालांकि मैं भाग्यवादी नहीं हूँ पर सोचता हूँ कि यह बरस न जाने और क्या-क्या दिखाएगा. (पाणिनी आनंद से बातचीत पर आधारित) | इससे जुड़ी ख़बरें पत्रकारिता की कालजयी परंपरा 15 सितंबर, 2006 | पत्रिका देश को भावनात्मक रूप से जोड़ती है हिंदी10 अगस्त, 2006 | पत्रिका मुक्तिबोध के साथ तीन दिन12 जुलाई, 2006 | पत्रिका साहित्य का सांस्कृतिक करिश्मा22 जून, 2006 | पत्रिका साहित्यकार अमृता प्रीतम नहीं रहीं31 अक्तूबर, 2005 | पत्रिका साहित्यकार निर्मल वर्मा का निधन26 अक्तूबर, 2005 | पत्रिका अदीबों की अदालत है 'कितने पाकिस्तान'29 दिसंबर, 2003 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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