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साहित्यकार अमृता प्रीतम नहीं रहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी और पंजाबी की जानीमानी साहित्यकार अमृता प्रीतम का दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है. उपन्यास, कहानियों और कविताओं के ज़रिए पंजाब के जीवन के रंगों को दुनिया के सामने भावात्मक तरीक़े से प्रस्तुत करने वाली अमृता प्रीतम को वर्ष 1982 में साहित्य का शीर्ष सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया था. 1919 में गुजराँवाला में पैदा हुईं अमृता प्रीतम को पंजाबी भाषा की पहली कवयित्री माना जाता है.
उन्होंने कुल मिलाकर लगभग 100 पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी चर्चित आत्मकथा रसीदी टिकट भी शामिल है. अमृता प्रीतम उन साहित्यकारों में थीं जिनकी कृतियों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ. पिछले कई महीनों से बिस्तर पर पड़ीं अमृता प्रीतम को पिछले वर्ष भारत का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्मविभूषण दिया गया था. उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी दिया जा चुका है. अमृता प्रीतम का अंतिम संस्कार सोमवार को दिल्ली में किया जाएगा, आख़िरी समय में प्रख्यात चित्रकार और साहित्यकार उनके साथ रहे. बड़ा सदमा अमृता प्रीतम के निधन से साहित्य जगत को गहरा सदमा लगा है जबकि वह अभी हिंदी साहित्यकार निर्मल वर्मा की मृत्यु के शोक से उबर ही रहा था. अमृता प्रीतम की मौत की ख़बर सुनने के बाद लंदन में रहने वाले जाने-माने पंजाबी कवि अमरजीत चंदन ने कहा, "उनके जाने से सचुमच एक युग का अंत हो गया है, पंजाबी साहित्य का आज़ादी के बाद का युग अमृता प्रीतम के ही नाम से जाना जाता है." अमरजीत चंदन ने कहा, "अमृता प्रीतम ने अनेक विधाओं में लिखा और हर विधा में उन्होंने ऐसी चीज़ें लिखीं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. उन्होंने रसीदी टिकट जैसी आत्मकथा लिखी, तो पिंजर जैसा उपन्यास, उनकी अज आँखा वारिस शाह जैसी कविता तो अमर है." अमृता प्रीतम जनवरी 2002 में अपने ही घर में गिर पड़ी थीं और तब से बिस्तर से नहीं उठ पाईं. | इससे जुड़ी ख़बरें अमृता प्रीतम के साथ है उनका पाठक संसार23 जुलाई, 2004 | मनोरंजन अमृता प्रीतम को पद्म विभूषण25 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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