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भारतीय फ़िल्मों से पाबंदी हटेगी! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में सरकारी पाबंदी के बावजूद भारतीय फ़िल्में ख़ासी लोकप्रिय हैं और मुग़लेआज़म, ताजमहल और ...गोल वहाँ के सिनेमाघरों में पहले ही प्रदर्शित हो चुकी हैं और अब ऐसी संभावना नज़र आ रही है कि जोधा-अकबर और आने वाली सभी भारतीय फिल्में पाकिस्तान के सिनेमाघरों में आसानी से देखने को मिल जाएँ. पाकिस्तान के संस्कृति और पर्यटन मामलों पर सीनेट की स्थाई समिति ने एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें पाकिस्तानी सिनेमाघरों में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन को अनुमति देना शामिल है. पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध है. 1965 के युद्ध के बाद सरकार ने हालाँकि केवल पांच वर्षों के लिए प्रतिबंध लगाया था जो आज तक भी बरक़रार है. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने हाल ही में कुछ फिल्मों को प्रदर्शन की अनुमति दी थी जिनमें मुग़लेआज़म और ताजमहल शामिल हैं. भारतीय फ़िल्म गोल इन दिनों पाकिस्तान के सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है और सिनेमाघरों के मालिकों का कहना है कि भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन से देश के सिनेमाघरों में एक नई जान आ गई है. सीनेट की स्थाई समिति के अध्यक्ष ज़फ़र इक़बाल चौधरी ने बीबीसी को बताया, “हमने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और एक सप्ताह के भीतर कैबिनेट को भेज दिया जाएगा जिसे कार्यवाहक प्रधानमंत्री मंज़ूरी का इंतज़ार किया जाएगा." प्रतिस्पर्धा ज़फ़र इक़बाल चौधरी ने कहा कि पाकिस्तानी फिल्मजगत में अच्छी फिल्में नहीं बनने के कारण यह फैसला लिया गया है और इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन होने से प्रतिस्पर्धा की वजह से पाकिस्तान में भी अच्छी फिल्में बनना शुरू हो जाएंगी.
उन्होंने कहा, “मुग़लेआज़म और ताजमहल के प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान ने ख़ुदा के लिए फिल्म बनाई जो काफ़ी लोकप्रिय हुई.” ग़ौरतलब है कि में फ़िल्म प्रदर्शकों और वितरकों के संगठन पाकिस्तान फ़िल्म एक्ज़ीबिटर एसोसिएशन ने पिछले साल भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन के खिलाफ़ सिंध हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें इस प्रतिबंध को ग़ैर क़ानूनी कहा गया था. पाकिस्तान फ़िल्म एक्ज़ीबिटर एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा था कि पाकिस्तान में अच्छी फिल्में न बनने के कारण कुछ सालों में 925 सिनेमाघर बंद हो चुके हैं और कई सिनेमाघर तो शॉपिंग प्लाज़ा में तब्दील हो चुके हैं. सिनेमाघरों की चिंता पाकिस्तान फ़िल्म एक्ज़ीबिटर एसोसिएशन ने सीनेट की स्थाई समिति के फैसले का स्वागत किया है. कराची में निशात सिनेमाघर के संचालक नवाज़ हज़ुरुल हसन ने कहा कि सरकार ने कभी भी सिनेमाघरों को उद्योग का दर्जा नहीं दिया जिसकी वजह से फिल्में बनना कम हो गईं और अब यह हाल है कि कोई भी अच्छी फिल्म नहीं बन रही.
उन्हों ने कहा, “सरकार ने भारतीय फिल्मों पर तो प्रतिबंध गया दिया है लेकिन केबल टेलीविज़न पर सब नई भारतीय फिलमें दिखाई जा रही हैं. अगर सिनेमा पर प्रतिबंध है तो केबल टेलीविज़न पर क्यों नहीं. सरकार इस पर विचार करे और अगर प्रतिबंध है तो सब के लिए हो.” नवाज़ हज़रुल हसन ने कहा कि भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन से हमारी संस्कृति पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि पहले ही हर घर में भारतीय फिल्में और ड्रामे बहुत देखे जाते हैं. उन्होंने कहा, "अगर हमारी संस्कृति पर असर पड़ता को पहले पड़ चुका होता. फ़िल्मों पर सरहदों की पाबंदी नहीं होनी चाहिए." ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों देखने के लिए काफ़ी भीड़ उमड़ती है और टेलीविज़न धारावाहिकों के साथ-साथ गानों की सीडी, वीसीडी और डीवीडी हर दुकान पर मिल जाती हैं लेकिन हाल के समय में लोगों ने भारतीय फ़िल्मों की वजह से सिनेमाघरों का रुख़ किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें परदे पर बिकिनी नहीं पहन सकतीः रीमा ख़ान27 दिसंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस फ़हमीदा को हिंदी शब्दों से ख़ास लगाव23 अक्तूबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस क्या भूलें क्या याद करें...17 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस पाकिस्तान ने क्यों रोका क़ाफ़िला का प्रदर्शन?13 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस सरहदें नहीं जानता साहित्य16 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'भर चुके ज़ख़्मों को अब न खरोंचा जाए'07 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'आवारापन' से मालामाल पाकिस्तानी सिनेमाघर01 अगस्त, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस वो भी क्या दिन थे......03 फ़रवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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