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डॉलर से नहीं दिखेगा ताजमहल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के बहुत से चर्चित पर्यटक स्थलों को विदेशी पर्यटक अब डॉलर दे कर नहीं देख पाएंगे और इन पर्यटन स्थलों में ताजमहल भी शामिल है. सरकार की तरफ़ से ज़ारी एक निर्देश में कहा गया है कि विदेशी पर्यटकों को दाख़िले के शुल्क का भुगतान डॉलर के बदले रुपए में ही करना होगा. हाल के महीनों में डॉलर की क़ीमत में आई गिरावट के मद्देनज़र ये क़दम उठाया गया है ताकि पर्यटन से होने वाली आमदनी में कोई घाटा न हो. अब तक ताजमहल जैसे पर्यटन स्थलों में विदेशी पर्यटकों के लिए डॉलर या रुपए में भुगतान करने का विकल्प खुला था. सरकार का यह फ़ैसला ‘भारतीय पुरातत्व संस्थान’ यानी एएसआई की देखरेख वाले क़रीब 120 पर्यटन स्थलों पर लागू होगा. इनमें से कम से कम 27 स्थल विश्व विरासत की सूची में शामिल हैं, जिनमें ताजमहल भी एक है. यह निर्णय अगले सप्ताह से लागू हो जाएगा. इन पर्यटक स्थलों में दाख़िले के शुल्क के तौर पर 250 रुपए या 100 रुपए लिए जाएंगे. उधर विदेशी पर्यटक यह सवाल बार-बार उठाते रहे हैं इन पर्यटन स्थलों पर जाने के लिए भारतीय पर्यटकों को महज़ 10 से 20 रुपए ही क्यों देने पड़ते हैं. इस पर अधिकारियों का कहना है कि इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है क्योंकि अधिकांश भारतीयों की आमदनी विदेशी पर्यटकों की तुलना में काफ़ी कम होती है. रूपए का बढ़ता भाव पर्यटन मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, "ये दर अंतरराष्ट्रीय प्रचलन के अनुरूप और डॉलर के मूल्यों में हो रहे उतार-चढ़ाव के मद्देनज़र रखी गई है." प्रवक्ता ने कहा कि मंत्रालय चाहता है कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए जिससे आमदनी प्रभावित न हो. पर्यटन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "वैसे भी अधिकतर देशों में जो एक समान दर लागू है वह अधिकांश भारतीयों के लिए काफ़ी महंगी पड़ती है." हालांकि भारत सरकार ने यह भी फ़ैसला किया है कि सार्क देशों के नागरिकों और सरकार द्वारा जारी पीआईओ कार्ड धारकों यानी ऐसे लोग जो भारतीय मूल के हैं और विदेशों में रह रहे हैं, उन्हें उच्च दर नहीं देनी होगी. उल्लेखनीय है कि भारत को वर्ष 2006 में 40 लाख से भी ज़्यादा विदेशी पर्यटकों से साढ़े छह अरब डॉलर से ज़्यादा विदेशी मुद्रा की आमदनी हुई थी. |
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