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मंगलवार, 20 फ़रवरी, 2007 को 17:34 GMT तक के समाचार
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पर्यटन को उद्योग बनाने का अधूरा सपना

यमनोत्री
राज्य के धार्मिक पर्यटन स्थल बहुत लोकप्रिय हैं
जिन लोगों ने स्विट्ज़रलैंड में आल्प्स की चोटियाँ देखीं हैं और जो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में हिमायल की चोटियाँ देख चुके हैं वे दोनों की आसानी से तुलना कर सकते हैं.

आश्चर्य नहीं यदि इस तुलना के बाद वे पाते हैं कि प्राकृतिक सौंदर्य में दोनों की कोई तुलना नहीं और हिमालय की चोटियाँ लाजवाब हैं.

लेकिन सुविधाओं की यदि बात करें तो भारत से स्विट्ज़रलैंड जाना शायद पिथौरागढ़ जाने से ज़्यादा आसान हो.

और यही वादा था पिछली सरकारों का कि वह उत्तराखंड में पर्यटन की सुविधाओं का विकास करेंगी, लेकिन पूरा नहीं हो सका.

कांग्रेस के नेता और पार्टी की ओर से प्रचार की कमान संभाले कृपाशंकर सिंह इस वादे के पूरा न होने के सवाल पर स्वीकार करते हैं, "इसमें क्या शक है कि उत्तराखंड जैसा राज्य भारत या पूरी दुनिया में नहीं है लेकिन पर्यटन को विकसित करने में कई व्यावहारिक दिक़्कतें आई हैं."

 पर्यटन के क्षेत्र में जितना काम होना चाहिए था, उसका दस प्रतिशत काम ही हो सका है और 90 प्रतिशत होना बचा है
कृपाशंकर सिंह, कांग्रेस नेता

वे मानते हैं, "पर्यटन के क्षेत्र में जितना काम होना चाहिए था, उसका दस प्रतिशत काम ही हो सका है और 90 प्रतिशत होना बचा है."

लेकिन पिथौरागढ़ के होटल व्यवसायी आलोक पुनेठा कहते हैं, "दरअसल सरकारों ने पर्यटन के लिए अब तक कुछ किया ही नहीं है."

उनका आरोप है कि पर्यटन व्यवयाय या उद्योग अभी राजनीतिक दलों के एजेंडा में ही नहीं है.

आलोक कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि पर्यटन है ही नहीं. लेकिन वह कुछ ही ज़िलों तक सीमित है. अगर सच में पर्यटन को बढ़ाना है तो नई-नई जगहें विकसित करनी होंगी."

वे मानते हैं कि पिथौरागढ़ के मुन्सियारी को यदि विकसित किया जा सका तो अगले चार-पाँच सालों में यह दुनिया के बड़े पर्यटन स्थलों के रुप में जाना जाएगा.

रोज़गार

आलोक पुनेठा की तरह दैनिक जागरण अख़बार के ब्यूरो प्रमुख डॉ दीपक उप्रेती भी मानते हैं कि पर्यटन को विकसित करने का मतलब है नए पर्यटन स्थलों का विकास.

 पिछले सात सालों में सरकार ने किसी भी नए पर्यटन स्थल को विकसित करने की कोशिश नहीं की
डॉ दीपक उप्रेती

वे कहते हैं, "पिछले सात सालों में सरकार ने किसी भी नए पर्यटन स्थल को विकसित करने की कोशिश नहीं की."

होटल व्यवसायी और स्थानीय लोग मानते हैं कि अल्मोड़ा से लेकर रानीखेत और हरिद्वार से लेकर बद्रीनाथ-केदारनाथ तक जो विकसित पर्यटन स्थल हैं वो इस बात का सबूत हैं कि इससे पर्याप्त संख्या में लोगों को रोज़गार मिल सकता है.

लेकिन ये सभी पर्यटन स्थल पर्याप्त लोकप्रिय हैं और वहाँ पहुँचने वाले पर्यटकों की संख्या पर्याप्त है.

डा उप्रेती कहते हैं, जब तक ढाँचे का विकास नहीं होगा कुछ नहीं हो सकता. उदाहरण देते हुए वे बताते हैं कि पिथौरागढ़ में 12 साल पहले एक हवाई पट्टी बनी थी लेकिन उसका विकास कभी नहीं किया गया.

ज़ाहिर है कि पर्यटन, जो बेरोज़गारी झेल रहे एक राज्य में रोज़गार मुहैया कराने का एक बड़ा साधन हो सकता है, चुनावी घोषणा पत्रों में कोई बड़ा मुद्दा नहीं है.

अलबत्ता यह नारा ज़रुर है कि पर्यटन उद्योग को विकसित किया जाएगा.

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