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रणथंभौर के पर्यटन व्यवसाय में खलबली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान हाईकोर्ट ने बाघों की आश्रय स्थली रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है. अचानक आए अदालत के इस निर्णय से वहाँ पर्यटन व्यवसाय के क्षेत्र में अफ़रातफ़री मच गई है. वन विभाग ने कहा है कि इस अदालती आदेश का अध्ययन किया जा रहा है. अदालत के इस हुक्म से जंगली जानवरों की झलक देखने के लिए रणथंभौर पहुँचे देशी-विदेशी पर्यटक निराश हो गए हैं. हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश गिरिराज गोयल और आठ अन्य की एक याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है. अदालत ने उद्यान के रखरखाव के लिए सरकारी वाहनों के प्रवेश की इज़ाजत ज़रूर दी है और सरकार से जवाब तलब किया है. अब इस मामले पर सोमवार को सुनवाई की उम्मीद है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि पर्यटक वाहनों के प्रवेश की नियम व शर्त्तें तय करने का अधिकार वन विभाग को है जबकि पर्यटन विभाग बिना किसी अधिकार के इस काम को कर रहा है. इन याचिकाकर्ताओं ने पर्यटन वाहनों के लिए कोई ठोस रणनीति बनाने की मांग की है. खलबली रणथंभौर के फील्ड डायरेक्टर एम एल मीणा ने बीबीसी को बताया कि अदालती आदेश के बाद वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह से रोक दिया गया है. हम इस बारे में कानूनी विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं. यकायक पैदा हुई इस नई स्थिति से होटलों और सैलानियों में खलबली मच गई है. सवाई माधोपुर के होटल रीजेंसी के अरविंद जैन, कहते हैं, '' अचानक आए आदेश से पर्यटन व्यवसाय को धक्का लगा है. हमारे लिए विदेशी सैलानियों को नए हालात के बारे में समझा पाने में कठिनाइयाँ हो रही है क्योंकि वे महीनों पहले बुकिंग कराकर हज़ारों किलोमीटर से यहाँ पहुँचते हैं.'' इसी होटल में ठहरे फ्रांस के टोरनोवेलेस्की ने बीबीसी से कहा, '' मुझे बहुत दुख हुआ है क्योंकि मेरा यहाँ आने का मकसद महज बाघों का विचरण देखना था.'' प्रतिदिन 80 वाहन सैलानियों को लेकर उद्यान में दो पारियों में आवाजाही करते थे. प्रत्येक पारी में बीस जिप्सी और बीस कैंटर जाते थे. वहाँ रणथंभौर रोड पर पचास होटल हैं और प्रतिदिन 700 से 800 पर्यटकों की आमद रहती थी. होटल टाइगर डैन के पैट्रिक कहते हैं,'' हमारे यहाँ आज छह ब्रितानी, चार फिनलैंड के और बीस भारतीय सैलानी रुके हुए हैं. वे सभी परेशान हैं और हमें उन्हें समझाने में दिक्कत आ रही है.'' फिनलैंड से आए मैटी बहुत नाराज थे. कहने लगे कि महीनों पहले होटल बुक कराकर यहाँ पहुँचे थे. इससे पहले कोर्बेट नेशनल पार्क में भी हमारे साथ यही हुआ. उनके साथ आईं सिल्विया भी गुस्से में थीं. दिल्ली से बीस लोगों के साथ आए अनूप कहते हैं कि उन्हें बहुत पीड़ा हुई है. हमें तो खाली हाथ लौटना पड़ेगा. रियासत काल में जयपुर के महाराजाओं की निजी शिकारगाह रहा रणथंभौर उद्यान 392 वर्ग किमी में फैला है. इसमें से 274 वर्ग किमी आंतरिक क्षेत्र यानि कोर एरिया है. यहाँ वन्य प्राणियों का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसे 1980 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें बाघ के घर गायों का धावा19 सितंबर, 2002 | पहला पन्ना बाघों को बचाने की प्रधानमंत्री की अपील25 मई, 2005 | भारत और पड़ोस वनराज की खाल का बढ़ता बाज़ार27 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत में घटते बाघों की चिंता13 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस भारत में बाघों की गिनती का कार्यक्रम16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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