|
बाघों को बचाने की प्रधानमंत्री की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि बाघों को अवैध शिकारियों से बचाने के लिए ज़रूरी है कि कड़े क़दम उठाए जाएँ. राजस्थान के रणथंभौर नेशनल पार्क के दौरे पर गए प्रधानमंत्री ने कहा कि बाघों को बचाने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति बनाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि इसके लिए ज़रूरी है कि जंगलों पर जनसंख्या का दबाव कम करने के प्रयास किए जाएँ. राजस्थान के अभयारण्यों से बाघों के बड़ी तादाद में लापता होने की चर्चा तेज़ होने के बाद प्रधानमंत्री वहाँ पहुँचे. भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक लिखित बयान में बताया है कि पिछले पाँच वर्षों में 400 से अधिक बाघ लापता हो चुके हैं. बाघों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने एक कार्यदल का गठन किया है और पर्यावरणविद् सुनीता नारायण को उसका प्रमुख बनाया गया है. प्रधानमंत्री ने वन अधिकारियों से विस्तार से बातचीत की और बाघों के संरक्षण को एक महत्वपूर्ण काम बताया. भारत में इस समय बाघों की कुल संख्या लगभग साढ़े तीन हज़ार आँकी गई है लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि यह आँकड़ा वास्तविक संख्या से अधिक हो सकता है. सुंदरबन इसी बीच पश्चिम बंगाल के सुंदरबन डेल्टा के बाघों को बचाने के लिए एक ख़ास अभियान की शुरूआत की जा रही है, इसके तहत बूढ़े बाघों के लिए विशेष सुरक्षित क्षेत्र बनाया जाएगा. जो बाघ बूढ़े हो चुके हैं और ख़ुद शिकार नहीं कर सकते सरकार उनकी देखभाल की ज़िम्मेदारी लेगी ताकि वे अवैध शिकारियों के हत्थे न चढ़ जाएँ. अधिकारियों का कहना है कि इससे बाघों की तादाद में आ रही गिरावट को रोकने में मदद मिलेगी. सुंदरबन के मुख्य वन संरक्षक अतनु राहा ने बीबीसी को बताया कि नई व्यवस्था के तहत 'बाघों के लिए वृद्धाश्रम' बनाया जाएगा. उनका कहना है कि बाघों को उनके प्राकृतिक वातावरण में ही रखा जाएगा ताकि वे ख़ुद को बंधा हुआ न महसूस करें लेकिन उन्हें आबादी से दूर रखा जाएगा क्योंकि बूढ़े बाघ आसान शिकार की तलाश में अक्सर लोगों या पालतू जानवरों पर हमला करते हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||