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भारतीयों को मिला ऐशडेन अवार्ड | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो भारतीयों ने अक्षय ऊर्जा के लिए प्रतिष्ठित ऐशडेन अवार्ड जीता है. ऐशडेन पुरस्कारों को ग्रीन ऑस्कर भी कहा जाता है. गुरुवार रात लंदन के रॉयल ज्योग्राफ़िकल सोसाइटी में इन दोनों भारतीयों गोवर्धन सिंह राठौर और हेमंत लांबा को पुरस्कृत किया गया. इस मौक़े पर सर डेविड एटेनबरो और ब्रिटेन में अक्षय ऊर्जा विकास आयोग के प्रमुख जोनाथन पॉरिट भी मौजूद थे. विजेताओं में पाकिस्तान के मैसून ज़मीर और मिराज ख़ान भी शामिल थे. विजेताओं ने बाद में प्रिंस चार्ल्स से मुलाक़ात की. योगदान गोवर्धन सिंह राठौर राजस्थान के रणथंम्भौर में प्राकृतिक सोसाइटी के संस्थापक हैं. राठौर को जलवायु संरक्षण श्रेणी में पुरस्कार मिला.
पुरस्कार में उन्हें 30 हज़ार पाउंड यानी क़रीब 20 लाख रुपए मिले. राठौर ने रणथम्भौर बाघ अभ्यारण्य के आसपास के गाँवों को खाना पकाने के लिए बायो गैस उपलब्ध कराया ताकि आसपास का इलाक़ा हरा-भरा रह सके. दूसरी ओर हेमंत लांबा और उनकी टीम ने दक्षिणी भारत के अरुविल में अक्षय ऊर्जा के ऐसे आसान स्रोतों से लोगों को अवगत कराया जो न सिर्फ़ सस्ते थे बल्कि जिनका आसानी से उपयोग भी हो सकता था. उन्होंने सौर पैनल को देश के 12 राज्यों में लोकप्रिय बनाया जिससे 80 हज़ार लोगों को फ़ायदा पहुँचा. भारत की बीनू परथन को उप-विजेता चुना गया. आईटी पॉवर की बीनू परथन को धुआँ रहित कम ईंधन पर काम करने वाला स्टोव बनाने के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया. इस चूल्हे के कारण लकड़ी की खपत में 70 फ़ीसदी की कमी आई. |
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