| हरियाणा में अब ग्रामीण पर्यटन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में राजमार्ग पर्यटन की पहल करने वाले हरियाणा राज्य में अब पर्यटन का एक नया स्वरूप सामने आया है - ग्रामीण या फ़्रार्म हाउस पर्यटन. शहरों की भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी से ऊब चुके लोग अब ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर शांति के पल खोजने लगे हैं. साथ ही शहरी बच्चों को गाँव की ज़िंदगी से रूबरू करवाने के इच्छुक लोग भी ग्रामीण या फ़्रार्म हाउस पर्यटन का फ़ायदा उठा रहे हैं. दिल्ली के आसपास फ़रीदाबाद, रोहतक और करनाल में स्थित लगभग तेरह फ़ार्म हाउस शहरों में रहने वालों को छुट्टियाँ व्यतीत करने और गाँव की ज़िंदगी से परिचित होने का मौक़ा देते हैं. वहाँ खेतों में चहलक़दमी की जा सकती है या फिर तालाब के किनारे ठंडी हवा में बैठ कर अपना समय व्यतीत किया जा सकता है. बच्चे बैलगाड़ी या ऊँट की सवारी कर सकते हैं या पतंग उड़ा सकते हैं. यहाँ तक कि महिलाएँ तो गाय का दूध दोहने, चक्की चलाने या मट्ठा निकालने की आज़माइश भी कर सकती हैं.
मौन्ट्रियल से भारत आई 17 वर्षीय अंतया ने फ़्रार्म हाउस की ज़िंदगी का अनुभव किया. उनका कहना था कि उनके लिए गाय दोहना और मुर्ग़ियों के साथ दौड़ना, मौन्ट्रियल की उनकी ज़िंदगी से बिल्कुल अलग था और उनके लिए एक नया अनुभव था. ऐसे ही एक फ़्रार्म हाउस सुरजीवन फ़ार्म की मालकिन अल्का श्रीवास्तव कहती हैं कि वहाँ पर्यटक सदियों पुरानी गाँव की ज़िंदगी का मज़ा उठा सकते हैं. उनका मानना है कि ज़्यादातर पर्यटकों के लिए, उनकी ये छुट्टियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें वे कभी भुला नहीं पाते.
हरियाणा सरकार के पर्यटन सचिव भास्कर चटर्जी कहते हैं, "राज्य सरकार ने एक सर्वे के बाद इस तरह के पर्यटन की शुरुआत की और फ़ार्म मालिकों की तरफ़ से भी उन्हें काफ़ी सहयोग मिला." ब्रिटेन से आई पर्यटक नीलांजना का कहना है कि दो दिन की छुट्टियों के दौरान जिस तरह वे मिट्टी की झोंपड़ी में रहीं, पेड़ों से फल तोड़े, खेतों में भूसे के ढेर पर कूदीं, यहाँ तक कि गाँव की पंचायत में भी भाग लिया, वो सब उनके लिए एक अनोखा अनुभव था. हरियाणा सरकार का मानना है कि उनके छोटे राज्य में प्राकृतिक संपदा कम है लेकिन वहाँ पर इस तरह के पर्यटन को प्रोत्साहित करके, राज्य की आमदनी बढ़ाई जा सकती है. |
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