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बुधवार, 10 अक्तूबर, 2007 को 12:37 GMT तक के समाचार
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एक सपने का सच हो जाना...

अमिताभ बच्चन और दुर्गेश उपाध्याय
भूतनाथ की शूटिंग के दौरान अमिताभ जी से मिलना एक नया अनुभव था
मेरा पत्रकारिता का करियर अभी बहुत लंबा तो नहीं है लेकिन इतना ज़रुर है कि इतने कम समय में ही मुझे फ़िल्मी दुनिया से जुड़ी कई दिग्गज हस्तियों के साक्षात्कार करने का मौका मिला है.

और सच बताऊँ तो इन फ़िल्मी हस्तियों के साथ चटपटी और दिलचस्प बातें करना मुझे अच्छा भी लगता है.

लेकिन अमिताभ बच्चन जैसे सदी के महानायक से रूबरु होना एक ऐसा अनुभव था जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है.

हाल ही में मुझे उनसे एक इंटरव्यूह के सिलसिले में मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. मेरे साथ हमारी ऑनलाइन संपादक सलमा ज़ैदी भी थीं जो लंदन से आईं हुई थीं.

हालाँकि अपने व्यस्त शूटिंग शेड्यूल के चलते हमारी मीटिंग एक दिन टली लेकिन आखिरकार हम उन तक पहुंच ही गए. यहां पर ये बता दूं कि उनसे मिलने के लिए हमें खासी मशक्कत भी करनी पड़ी लेकिन ऐसा शायद उनके व्यस्त कार्यक्रम के चलते हुआ.

अभिनय के पर्याय

अमिताभ बच्चन भारतीय फ़िल्म जगत का वो नाम है जिसे पूरी दुनिया जानती है. अभिनय के पर्याय बन चुके इस कलाकार की प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया मानती है. चकाचौंध से भरी इस फ़िल्मी दुनिया में और भी कई बड़े नामचीन सितारे हैं लेकिन अमिताभ की जगह औरों से कहीं अलग और अनोखी है.

पिछले तीन दशकों से हिंदी फ़िल्मों पर अपनी अभिनय की अमिट छाप छोड़ने वाले सदी के इस महानायक के बिना शायद भारतीय सिनेमा का इतिहास पूरा नहीं होता है.

मुंबई के बांद्रा इलाके में स्थित महबूब स्टूडियो में अमिताभ,रवि चोपड़ा की अगली फिल्म भूतनाथ की शूटिंग में व्यस्त थे.

हम तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार वहां पहुंचे, पूरे रास्ते गाड़ी में मैं यही सोचता रहा कि आज का दिन शायद मेरी ज़िंदगी का यादगार दिन है, क्योंकि कहीं न कहीं हर भारतीय की तरह मेरा भी ये सपना था कि अमिताभ बच्चन से मिलूँ और उनसे कुछ कहूं और उनके साथ कुछ वक़्त बिताने का मौका मिले.

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे अमिताभ बच्चन से मिलने की इच्छा न हो और भई हो भी क्यों न,कहीं न कहीं वो हर भारतीय के दिलोदिमाग़ में बसे जो हुए हैं.

सबसे पसंदीदा किरदार

मैने उनकी हर हिट फ़िल्म देखी है और खासतौर से अग्निपथ के विजय-दीनानाथ चौहान का किरदार मुझे बहुत अच्छा लगता है.

हम तयशुदा समय से पहले ही पहुंच गए थे इसलिए हमें थोड़ी दूरी पर इंतज़ार करने के लिए कहा गया. आखिरकार वो क्षण भी आया कि जब हम अमिताभ से मिले. अपना शॉट पूरा करके तुरंत वो सीधे हमारे पास आए.

जैसे ही वो हमारे पास आए एक पल के लिए तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि अमिताभ खुद चलकर हम तक आए हैं,क्योंकि कहीं न कहीं मेरा वो सपना जो कि उनसे व्यक्तिगत तौर पर मिलने और ढेर सारी बातें करने का था वो पूरा होता दिख रहा था.

वो पूरी तरह से मेकअप में थे. अभिवादन के बाद वो हमें अपनी वैन में ले गए, जिसमें वो अक्सर शूटिंग के वक़्त आराम के लिए इस्तेमाल करते हैं. इस बीच वो पूरी तरह से शांत थे हांलाकि वो थके हुए थे लेकिन उनकी आँखों में चमक थी.

उनका लंबा क़द और भारी लेकिन मधुर आवाज़ किसी का ध्यान बरबस अपनी तरफ़ खींचने के लिए काफ़ी है. इतने सालों से लगातार अपनी फ़िल्मों के ज़रिए वो लोगों के चहेते बने हुए हैं लेकिन यकीन मानिए आपको उनसे मिलकर बिल्कुल ऐसा नहीं लगेगा की आप सदी के महानायक के सामने बैठे हुए हैं.

पूरी बातचीत के दौरान एक बात जो ख़ासतौर से मैने महसूस की वो ये कि अमित जी अपनी बातचीत में बिल्कुल स्पष्ट हैं. भाषा ऐसी कि आप मंत्रमुग्ध हो जाएं. हिंदी बोलते समय आप कहीं से भी उनके मुंह से किसी अंग्रेज़ी भाषा का कोई शब्द नहीं सुन पाएंगे.

सामने बैठे हुए व्यक्ति को चाहे वो किसी उम्र का हो वो पूरा सम्मान देते हैं. पूरी बातचीत के दौरान वो काफ़ी खुश दिखे और हमसे ढेर सारी बातें कीं.

आमतौर पर फ़िल्मी कलाकारों में एक बनावटीपन दिखता है लेकिन इसके उलट अमिताभ अपनी बातचीत में बहुत ही सरल हैं.

पैंसठ साल की उम्र में भी अमिताभ बच्चन में गज़ब की ताज़गी और चुस्ती है. पूरी बातचीत के दौरान उन्होंने एक पल को भी महसूस नहीं होने दिया कि वो कितने बड़े और व्यस्त कलाकार हैं. और तभी मुझे एहसास हुआ कि क्यों अमिताभ करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत हैं.

सच में औरों से जुदा हैं अमिताभ.

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