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'मुग़ले आज़म' को रंगों में ढालेंगे हुसैन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मशहूर चित्रकार एमएफ़ हुसैन 'मुग़ले आज़म' की भव्यता को रंगों में ढाल कैनवास पर उतराने जा रहे हैं. वे फ़िल्म पर आधारित विशेष चित्र बना रहे हैं जिन्हें लंदन में रखा जाएगा. एमएफ़ हुसैन मुग़ले आज़म पर आधारित करीब 50 चित्रों पर काम कर रहे हैं. इन्हें लंदन के एक म्यूज़ियम में रखा जाएगा. फ़िल्मकार के आसिफ़ की फ़िल्म मुग़ले आज़म आज भी लोगों के दिलो-दिमाग़ में ताज़ा है. एमएफ़ हुसैन ने बीबीसी से बातचीत में बताया, “मुग़ले आज़म क्लासिकल फ़िल्म बनी थी. उसी पर मैं पेंटिंग भी बना रहा हूँ. करीब 40-50 पेंटिंग है. लंदन में म्यूज़ियम बन रहा है. या कहूँ कि के आसिफ़ की याद में ये म्यूज़ियम है.” एमएफ़ हुसैन कहते हैं कि ये फ़िल्म उनके दिल के बेहद करीब है और वे निजी तौर पर इससे जुड़े हुए थे. उस दौर को याद करते हुए हुसैन ने बताया, “जब मुग़ले आज़म बन रही थी तो के आसिफ़ साहब ने मुझे कहा कि युद्ध के दृश्य फ़िल्माने हैं, इसलिए मैं उन्हें युद्ध के समय के स्केच और उसमें पहने जाने वाले कवच वगैरह के स्केच लाकर दूँ. मैने उन्हें वो स्केच दिए.” ‘मुग़ले आज़म बनाने की गुस्ताख़ी नहीं’
आज जब शोले, डॉन, उमराव जान जैसी क्लासिक फ़िल्मों को फिर से बनाया जा रहा है तो बातों-बातों में बात उठी कि क्या कभी मुग़ले आज़म भी दोबारा बन सकती है? सवाल सुनते ही एमएफ़ हुसैन तपाक से जबाव देते हैं, “मुग़ले आज़म को दोबारा नहीं बनाया जा सकता. अगर मुझे भी मौका मिले कि मैं मुग़ले आज़म बनाऊँ तो भी ये गुस्ताख़ी मैं कभी नहीं करूँगा.” के आसिफ़ के ज़िक्र पर भावुक हुए हुसैन कहते हैं, “मुग़ले आज़म के लिए के आसिफ़ चाहिए और इस वक़्त के आसिफ़ मिलना मुश्किल है. वो जो पैशन, विज़न, उत्साह चाहिए वो कहाँ मिलेगा.” एमएफ़ हुसैन आज भी के आसिफ़ के परिवार के बेहद करीब हैं. मुग़ले आज़म दोबारा बनाने की बात जब छिड़ी तो के आसिफ़ के बेटे अक़बर आसिफ़ का कहना यूँ था, “जहाँ तक मुग़ले आज़म दोबारा बनाने की बात है तो कोशिश करने से तो कुछ भी हो सकता है. लेकिन मैं ये कोशिश कर अपने पिता की रूह को तकलीफ़ नहीं देना चाहता कि वे तढ़पकर कहें कि ये तुमने क्या ग़लती कर दी. दूसरों को करने दें, मैं देखूँगा.” एमएफ़ हुसैन ने बताया कि ये चित्र नवंबर तक तैयार हो जाएँगे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'न मैने भारत छोड़ा है, न भारत ने मुझे'12 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस अमरीका में भारतीय कला की नक़ल08 अप्रैल, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस दो और भारतीय फ़िल्में पाकिस्तान जाएँगी08 फ़रवरी, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस हुसैन की 100 तस्वीरों के 100 करोड़10 सितंबर, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस हुसैन के कैनवास से एक और फ़िल्म 02 अप्रैल, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस रंग भरे जा रहे हैं पुरानी फ़िल्मों में04 अगस्त, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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