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'न मैने भारत छोड़ा है, न भारत ने मुझे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एक पेंटिंग के मामले में क़ानूनी कार्रवाई झेल रहे 92-वर्षीय मशहूर चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन का कहना है कि न तो भारत ने उन्हें छोड़ा है और न ही उन्होंने भारत को छोड़ा है. हुसैन आजकल दुबई में रह रहे हैं और न्यूयॉर्क के दौरे पर हैं. चित्रकार एमएफ़ हुसैन काफ़ी समय बाद न्यूयॉर्क में कला प्रेमियों और अपने चाहने वालों के साथ थे. वह न्यूयॉर्क में उभरते हुए भारतीय कलाकारों के चित्रों की एक प्रदर्शनी के उदघाटन समारोह में मुख्य अतिथि की हैसियत से पहुँचे हैं. इस साल फ़रवरी में जिस चित्र के कारण हुसैन फिर विवादों में घिरे है उसमें तिरंगे झंडे में लगने वाले अशोक चक्र के सामने खड़ी एक महिला का चित्र बनाया था. उस चित्र में महिला को निर्वस्त्र दिखाया गया था और उसके शरीर पर कई राज्यों के नाम लिखे हुए थे. इस चित्र का विरोध कर रहे संगठनों का आरोप है कि ये 'भारत माता' का चित्र है और जिस तरह से इसे बनाया गया है वह भारतवासियों और हिंदुओं की भावनाओं का अपमान है. हुसैन के ख़िलाफ़ लोगों की भावनाएँ आहत करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. 'भारत छोड़ा नहीं है' भारत के पिकासो कहलाए जाने वाले हुसैन इस विवाद के बाद से ही करीब एक साल से भारत से बाहर ही रह रहे हैं और अब वह दुबई में डेरा जमाए हुए हैं. हालाँकि हुसैन इस संदर्भ में माफ़ी भी मांग चुके हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारत को याद करते हैं, तो हुसैन का कहना था, "मैंने भारत कोई छोड़ थोड़ी दिया है कि मैं उसके छूटने का ग़म मनाने लगूँ. पहले भी मैं भारत से बाहर आकर काम किया करता था." उनका कहना था, "पिछले करीब 50 सालों से मै न्यूयॉर्क, पेरिस और लंदन में आकर काम करता रहा हूँ, उसी तरह अब भी बाहर हूँ. मैंने भारत को या भारत ने मुझको कोई छोड़ थोड़े ही दिया है." उनका कहना था, "अब लोग अपने देश से बाहर काम के सिलसिले में तो जाते ही रहते हैं. लोग पाँच-पाँच साल मुल्क से बाहर रहते हैं और मुझे तो अभी एक साल ही हुआ है." उन्होनें यह तो नहीं बताया कि वह कब भारत जाएँगे, लेकिन हुसैन का कहना है कि उन पर कोई पाबंदी नहीं लगी है और वह जब चाहें भारत आ जा सकते हैं. उनका कहना है कि वह दुबई और लंदन में म्यूज़ियम बना रहे हैं और उसी में व्यस्त हैं. उनका कहना था कि इसके अलावा उनका चित्र बनाना भी जारी है. हुसैन का कहना था कि ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते हैं और इस विवाद के कारण उनका काम करने का तरीका प्रभावित नहीं हुआ है न ही उनकी आज़ादी पर इसका कोई असर पड़ा है. 'हज़ारों साल से कला मौजूद' हुसैन ने कहा कि भारत में जनतंत्र है और लोगों को आज़ादी है कि वह इनके चित्र को किस प्रकार देखते और समझते हैं. लेकिन उन्होनें यह भी कहा कि भारत में कला को कोई रोक नहीं सकता. हुसैन बोले, "पिछले पाँच हज़ार सालों से भारत में कला मौजूद है और कभी कोई उसे रोक नहीं सका है. और आज भी आप देखें तो कला के क्षेत्र में प्रगति ही हो रही है. और अब तो पश्चिमी देशों में भी भारतीय कला का लोहा माना जा रहा है." हुसैन का कहना था, "पेंटर तो बहुत से लोग बन सकते हैं लेकिन कलाकार कोई चंद सालों में नहीं बन जाता. उसके लिए पूरी ज़िंदगी कला को ही समर्पित करनी पड़ती है तब जाकर कोई कलाकार पैदा होता है." हुसैन ने यह भी कहा कि अब वह एक नई फ़िल्म पर भी काम कर रहे हैं जो एक कॉमेडी फ़िल्म होगी. फ़िल्म की शूटिंग इस साल अक्तूबर महीने में शुरू होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें हिटलर की पेंटिंग 5200 पाउंड में बिकी03 नवंबर, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस शेक्सपियर की पेंटिंग " नकली"22 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस कूची से कपड़े उतारने की कला08 अक्तूबर, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस जॉर्ज बुश की नग्न पेंटिंग हटाई गई09 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना हुसैन की 100 तस्वीरों के 100 करोड़10 सितंबर, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस हुसैन के कैनवास से एक और फ़िल्म 02 अप्रैल, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस कला-संस्कृति का द्वार था दरभंगा31 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस शौचालय में मिला खज़ाना 28 अप्रैल, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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