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शेक्सपियर की पेंटिंग " नकली" | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महान नाटककार शेक्सपियर की प्रसिद्ध पेंटिंग को लेकर जारी विवाद का पटाक्षेप हो गया है और विशेषज्ञों का कहना है कि यह पेंटिंग नकली है. विशेषज्ञों के अनुसार शेक्सपियर की फ्लावर पोर्ट्रेट नामक पेंटिंग उनके जीवनकाल में नहीं बनाई गई जैसाकि इस पेंटिंग के बारे में कहा जा रहा था. पेंटिंग पर लिखी इबारत के अनुसार यह 1609 में बनकर तैयार हुआ लेकिन जांच के बाद पता चला है कि यह पेंटिंग 19वीं शताब्दी में बनाई गई है. यह विवादास्पद पेंटिंग इस समय रॉयल शेक्सपियर कंपनी के पास है जिसे लेकर हमेशा से अलग अलग बयान आते रहे हैं. अब लंदन की प्रतिष्ठित नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी के विशेषज्ञों ने पुष्टि कर दी है कि यह पोर्ट्रेट नकली है. वैज्ञानिक छानबीन के अनुसार पेंटिंग में गहरे धंसे कुछ तत्व 16 वीं सदी के ज़रुर कहे जा सकते हैं. शेक्सपियर की यह फ्लावर पेंटिंग 16 वीं सदी की एक अन्य पोर्ट्रेट के ऊपर बनाई गई है जिसे इसके मालिक डेसमंड फ्लावर ने रॉयल शेक्सपियर कंपनी को दान दिया था. नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी में अगले साल शेक्सपियर के कार्यों की एक प्रदर्शनी लगनी है और विशेषज्ञ इसके लिए पोर्ट्रेट आदि जुटा रहे हैं. फ्लावर पोर्ट्रेट के अलावा शेक्सपियर की और दो पेंटिंगों चैंडस पोर्ट्रेट और ग्राफ्टन पोर्ट्रेट की भी जांच की जा रही है. नेशनल गैलरी की 16 वीं सदी के सामानों की विशेषज्ञ तारन्या कूपर कहती हैं कि किसी ने फ्लावर पोर्ट्रेट में जानबूझकर गड़बड़ी की है. कुछ लोगों का मानना है कि यह पेंटिंग शेक्सपियर के जीवनकाल यानी 16वीं सदी में बनी जबकि अन्य लोग मानते हैं कि इसे बाद में बनाया गया. कूपर कहती हैं " हमें लगता है कि यह पेंटिंग 1818 से 1840 के बीच कभी बनाई गई है जब शेक्सपियर के नाटकों में लोगों की दिलचस्पी एक बार फिर बढ़ी थी." अगले साल नेशनल पोर्ट्रेट गैलरी के 150 साल हो रहे है और इस अवसर पर कई भव्य प्रदर्शनियों का आयोजन हो रहा है. |
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