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शुक्रवार, 03 अगस्त, 2007 को 06:15 GMT तक के समाचार
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कुछ विश्व कविताएँ
जॉर्ज डे लिमा
पुर्तगाली कवि
(1893-1953)

विशाल हाथ

चित्रांकन-लाल रत्नाकर
चित्रांकन-लाल रत्नाकर

आँधी-तूफ़ान की रातपाली अंदर,
रहस्य कैरावल; हल्कापाल-जहाज़ उधर जाता है.
समय घूमता है, और पानियों को निराश करता है,
हवा रोती है मनहूस ज़ोर ज़ोर.
रहस्य कैरावल उधर जाता है.
इस जहाज़ उपर
कौन हाथ है इतना बड़ा
समुद्र तक से भी?
पाइलट का हाथ?
हाथ किसका?
कैरावल डूबता है,
समुद्र खड़ा है सियाह,
समय घूमता है.
इस जहाज़ उपर
बड़ा हाथ
बहते ख़ून सना है.
कैरावल उधर जाता है.
समुद्र पछाड़े खाता है,
भूमि ग़ायब होती है,
तारे गिरते हैं.
कैरावल जारी रहता है और
उपर इस जहाज़ के
सनातन हाथ
है वहाँ.

* * * * * * * *

काव्य का वितरण

मैंने लिया वनस्पतियों से जंगली शहद,
मैंने लिया नमक पानियों से, मैंने रोशनी ली आकाश से.
सुनो, मेरे भाइयों मैंने काव्य लिया सबकुछ से
इसे देवता को अर्पित करने वास्ते.
मैंने नहीं खोदा था सोना धरती से
या चूसा जोंक की तरह ख़ून अपने भाइयों का.
सरायवासियो मुझे अकेला होने दो.
फेरीवालो और साहूकारो
मैं फासलों को गढ़ सकता हूँ
तुम्हें अपने से परे रखने के लिए.

जीवन एक विफलता है,
मैं विश्वास करता हूँ ईश्वर के जादू में.
बसेरू मुर्गे बांग नहीं दे रहे,
दिन उतरा नहीं है.
मैंने देखा जहाज़ों को जाते और आते.
मैंने देखा दुर्दशा को जाते और आते.
मैंने देखा चर्बीले आदमी को आग में.
मैंने देखा सर्पीलाकारों को अंधेरे में.
कप्तान, कहाँ है कांगो?
कहाँ है संत ब्रैंडॉन का टापू?
कप्तान, कितनी काली है रात!
ऊँची नस्लवाले कुत्ते भौंकते हैं अंधेरे में.
ओ!अछूतों, देश कौन सा है
कौन सा है देश जिसकी तुम इच्छा रखते हो?
मैंने लिया वनस्पतियों से जंगली शहद,
मैंने लिया नमक पानियों से, मैंने रोशनी ली आकाश से.
मेरे पास केवल काव्य है तुम्हें देने को.
बैठ जाओ, मेरे भाइयों.

* * * * * * * * * *

पेडरो सेलिनास
स्पैनिश कवि
1891-1951

चित्रांकन-हेम ज्योतिका
चित्रांकन-हेम ज्योतिका

जागो दिन बुलाता है तुम्हें

जागो. दिन बुलाता है तुम्हें
तुम्हारे जीवनओर, तुम्हारा स्वधर्म.
और जीने के लिए, ज़्यादा कुछ नहीं.
जड़ से उखाड़ फेंको उदासी की रात और अंधेरा
जिसने ढँक ली तुम्हारी देह
इंतज़ार किया जिसके लिए रोशनी ने
पंजों के बल भोर में.
खड़े होओ, बल दो ईमानदार
सरल इच्छा को होने
एक शुद्ध छरहरा कौमार्य.
आजमाओ अपने शरीर की धातु को.
ठंडी, गर्म? तुम्हारा रक्त
बतलाएगा बर्फ़ के सामने
या खिड़की के पीछे.
रंग
बोलेगा तुम्हारे गालों का.
और देखो लोगों की ओर.
बाक़ी करना कुछ नहीं है
सिवाए जोड़ने के
अपने मुकम्मल को अगले दिन तक.
बीड़ा तुम्हारा अपने जीवन को ऊँचा ले जाना है,
और खेलो इस संग, इसे फेंको
बादलों तक जाती एक आवाज़ की तरह
तो शायद यह दोबारा पा ले रोशनी
जो चली गई थी पहले ही हम से.
तुम्हारा भाग्य है वह जीने के लिए.
कुछ मत करो.
तुम्हारा काम तुम हो, ज़्यादा कुछ नहीं.

* * * * * * * * * *
अंग्रेज़ी से भाषांतर- पीयूष दईया

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