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गुरुवार, 21 जून, 2007 को 15:42 GMT तक के समाचार
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हिंदुस्तानी धुन छेड़ते विलायती साज़िंदे

बॉलीवुड ब्रास बैंड
ये बैंड शादियों में भारतीय फ़िल्मी गाने बजाता है
भारत में शायद ही कोई बारात हो जिसमें बैंडवाले 'आज मेरे यार की शादी है...' न बजाएँ.

ब्रिटेन में होने वाली शादियों में यह कमी खलती थी लेकिन बॉलीवुड ब्रास बैंड है न यह कमी दूर करने के लिए.

लेकिन फिर भी यह भारतीय बैंडों से थोड़ा अलग है. इसके ज़्यादातर साज़िंदे एशियाई नहीं बल्कि अंग्रेज़ हैं.

ज़री-गोटे वाली भारतीय पोशाकें पहनकर, हाथों में साज़ लिए ये अंग्रेज़ बिल्कुल उसी स्टाइल में हिंदी फिल्मों की धुनें बजाते हैं जैसे कि भारत के बैंड-बाजे वाले.

फिर उनके पास गानों की एक लंबी फ़ेहरिस्त भी मौजूद है–आज मेरे यार की शादी है..., मेंहदी लगा के रखना..., कजरारे..., तेरी रब ने बना दी जोड़ी..., तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त....

शुरुआत

बैंडबाजा बजाते हुए बारात के साथ जाना हो, लड़की वालों के यहाँ दूल्हे का स्वागत समारोह हो या फिर दीवाली मेला- बॉलीवुड ब्रास बैंड को हिंदी धुनें बजाते देख सभी आश्चर्यचकित रह जाते हैं.

बॉलीवुड ब्रास बैंड की शुरूआत स्ट्रीट बैंड, क्रोकोडाइल स्टाइल के रूप में हुई थी.

बॉलीवुड ब्रास बैंड
बॉलीवुड ब्रास बैंड को भारतीय शादियों में बजाने के प्रस्ताव आते हैं

फिर 1992 में लंदन के एक अंतरराष्ट्रीय उत्सव में उनकी मुलाक़ात हुई जबलपुर के श्याम ब्रास बैंड से. श्याम ब्रास बैंड से उन्होंने कुछ बॉलीवुड गाने सीखे और फिर देखते ही देखते वो बॉलीवुड ब्रास बैंड में तब्दील हो गए.

बैंड की एक सदस्या केय चार्लटन बताती हैं, “हम सांबा, लातिनी संगीत, अफ्रीकी संगीत बजाते थे. फिर हमें जबलपुर के श्याम ब्रास बैंड के साथ काम करने का मौक़ा मिला. मुझे उनका एक कैसट दिया गया. मैं बिल्कुल आश्चर्यचकित रह गई."

वे कहती हैं, "मैंने इस तरह का संगीत कभी सुना ही नहीं था. मुझे पता ही नहीं था कि भारतीय संगीत ऐसा भी होता है. मुझे लगता था कि भारतीय संगीत का मतलब होता है तबला और सितार. उसमें से एक गाना था एक, दो, तीन... और दूसरा ओए ओए.”

बॉलीवुड के कुछ गाने सीखने के बाद स्ट्रीट बैंड ने दीवाली मेलों और अंतरराष्ट्रीय उत्सवों में बॉलीवुड की धुनें बजानी शुरू की.

 बैंड का संगीत सुनने के बाद लोगों को बड़ा मज़ा आया. वो तो ये देख कर हैरान हो गए कि गोरे लोग भी हमारा संगीत बजा सकते हैं. खूब धूमधाम और रौनक लगी. लोग उनके साथ नाच-गा रहे थे
जीतू अटवाल, बर्मिंघम निवासी

और फिर बैंड के पास दक्षिण एशियाई समुदाय के लोगों के प्रस्तावों का तांता लगना शुरू हो गया.

सभी जानना चाहते थे कि क्या वो शादी-ब्याह में भी बैंड–बाजा बजाते हैं. तब उन्हें अहसास हुआ कि वास्तव में उनकी पहचान यही है- बारात में दूल्हे के साथ चलने वाला वाला बैंड.

एशियाई भी

बॉलीवुड ब्रास बैंड
इस बैंड में कई विशेषज्ञ संगीतकार भी शामिल हैं

अब बॉलीवुड ब्रास बैंड ने लंदन के 'ढोल फाउंडेशन' से दो एशियाई युवकों को भी अपने बैंड में शामिल किया.

इनमें से ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई जस डफ्फू कहते हैं, “इस बैंड में ज़्यादातर लोग गोरे हैं तो मेरे रहने से लोगों को लगता है कि ये हममें से ही एक हैं. इससे बैंड की विश्वसनीयता भी बढ़ती है.”

बर्मिंघम में रहने वाली जीतू अटवाल ने अपने बेटे की शादी में बॉलीवुड ब्रास बैंड को बुलाया था.

जीतू अटवाल कहती हैं, “बैंड का संगीत सुनने के बाद लोगों को बड़ा मज़ा आया. वो तो ये देख कर हैरान हो गए कि गोरे लोग भी हमारा संगीत बजा सकते हैं. खूब धूमधाम और रौनक लगी. लोग उनके साथ नाच-गा रहे थे.”

नया अनुभव

बैंड के लिए भी भारतीय शादियों में शामिल होना बहुत नया अनुभव था.

बैंड के मैनेजर मार्क एलन ने चुटकी लेते हुए बताया,“एक बार बहुत मज़ेदार घटना हुई. एक शादी में जब हमने बैंड बजाना शुरू किया तो संगीत सुनकर घोड़ी बिदक गई और दूल्हे को लेकर भाग खड़ी हुई. हमने इसकी वीडियो रिकार्डिंग अभी तक संभाल कर रखी है."

 एक बार बहुत मज़ेदार घटना हुई. एक शादी में जब हमने बैंड बजाना शुरू किया तो संगीत सुनकर घोड़ी बिदक गई और दूल्हे को लेकर भाग खड़ी हुई
मार्क एलन, बैंड मैनेजर

जहां भारतीय बैंड-बाजे वालों में ज़्यादातर संगीत की ये परंपरा पिता से पुत्र को विरासत में मिलती है वहीं इस बैंड में प्रतिष्ठित संगीतकार हैं जो संगीत के क्षेत्र में पहले ही अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं.

बॉलीवुड ब्रास बैंड की सदस्या और बैंड में संगीत प्रबंधन की ज़िम्मेदारी संभालने वाली केय चार्लटन कहती हैं, “मैं इस बार भारत गई तो धूम-2 फिल्म देखी. मुझे उसका संगीत इतना अच्छा लगा कि सिनेमा हॉल से निकलते ही मैंने धूम-2 की सीडी खरीदी. इस तरह धूम-2 का संगीत भी बैंड में शामिल हुआ.”

ब्रास बैंड की परंपरा ब्रिटेन में ही शुरू हुई थी. फिर ब्रिटिश राज के दौरान ये भारत पहुँचा. फिर भारत के फिल्मी रंगों में रंगकर ये परंपरा वापस ब्रिटेन पहुँच गई है.

सच ही तो है संगीत की कोई सीमा नहीं होती.

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