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शुक्रवार, 27 अप्रैल, 2007 को 11:31 GMT तक के समाचार
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डिज़ाइनर मेहंदी का रंग...

डिज़ाइनर मेहंदी का रंग...
सब कुछ डिज़ाइनर ही लगा इस डिज़ाइनर शादी में
पिछले हफ़्ते बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के पाठकों की संख्या में ऐसा उछाल आया जो शायद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने भी न देखा हो. एक ही हफ़्ते में सत्तर प्रतिशत वृद्धि. हमने मन ही मन आशीर्वाद दिया - ऐश-अभि की जोडी सलामत रहे.

चलिए शादी तो ख़ुशी-ख़ुशी संपन्न हो गई. ज़्यादा बदमज़गी नहीं हुई. सिवाय इसके कि एक बेचारी लड़की ने अपनी कलाई काटकर यह कहने की कोशिश की कि उसे मदद की ज़रूरत है. मीडिया ने समझा वह कह रही है, "ठहरो, यह शादी नहीं हो सकती." कहाँ? शादी के शोर-शराबे में ऐसी कमज़ोर आवाज़ें दब जाती हैं. और फिर मीडिया को तो कहानी में ट्विस्ट चाहिए.

ख़ैर, दूसरी ज़रा सी बदमज़गी यह हो गई कि प्रतीक्षा करते-करते थके-माँदे मीडिया वालों के साथ सिक्योरिटी वालों ने अच्छा बर्ताव नहीं किया. उसके लिए दूल्हे के पिता ने माफ़ी माँगी.

छोड़िए भी, आम घरों में जब शादियाँ होती हैं इससे कहीं ज़्यादा बदमज़गी होती है. नाते-रिश्तेदारों को अपनी वरीयता और महत्ता जताने, मानमनौवल करने का इससे अच्छा मौक़ा कहाँ मिलता है. और फिर शादियाँ होती ही इसलिए हैं कि जीवन की एकरसता टूटे, कुछ रिश्ते मज़बूत हों, कुछ रिश्ते टूटें.

बहरहाल, मीडियावालों के लिए तो यह शादी हर मायने में ख़ास थी. क्यों न हो? अगर हम अरुण नायर की विदेशी दुल्हन को सिर आँखों पर बिठा सकते हैं तो फिर, ऐश तो अपनी है. विश्व सुंदरी हैं. बॉलीवुड की नंबर वन फ़ैमिली के घर ब्याही गई है.

भारत में कुछ लोगों को शिकायत है कि जो भी हो, मीडिया ने, ख़ासकर टेलीविज़न चैनलों ने अति कर दी. क्या यह वाक़ई इतनी बड़ी कहानी थी कि मीडिया वाले दिन-रात ढोल पीटें और नाचें. सवाल हमारे यहाँ भी उठा. लेकिन जवाब था, जब सारा भारतीय मीडिया ऐश और अभि की शादी में ख़ुशी-ख़ुशी शामिल है तो हम क्यों रूठी हुई फूफी की तरह अलग बैठे रहें. बुरी बात है... फ़ैसला हुआ कि कम से कम शादी के दिन तो हम भी पूरे उत्साह के साथ शामिल होंगे.

आख़िर जनरुचि की जीत हुई - और हमारे लिए तो नतीजा भी अच्छा ही निकला.

बस मेरी एक फ़िक्र है. वो ये कि ऐश्वर्या की कलाइयों तक रची हुई मेहंदी का रंग कितनी ऐसी लड़कियों को ललचाएगा जो ऐश्वर्या नहीं हैं और जिनके माता-पिता के पास धन का ऐश्वर्य नहीं है. चिंता इसलिए है कि पहले जो सिर्फ़ फ़िल्मी पर्दे पर दिखाई देता था, वह आज टेलीविज़न पर कई-कई बार कॉपी होता है. इसलिए, अभी तो ये देखना है कि ऐश-अभि की शादी अनगिनत टीवी सीरियलों में डिज़ाइनर दुल्हनों के डिज़ाइनर कपड़ों, डिज़ाइनर चूड़ियों और डिज़ाइनर मेहंदी के रंग पर कितना असर छोड़ती है. और फिर कितनी मांगलिक लड़कियाँ अपने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए डिज़ाइनर उपाय ढूंढें.

डिज़ाइनर करवौचौथ की बात बाद में....

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