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'लोगों का प्यार ऊर्जा देता है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हर साल दुनिया के अलग-अलग देशों में होने वाला इंडियन इंटरनेशनल फ़िल्म अवार्ड यानी आइफ़ा समारोह इस बार ब्रिटेन में आयोजित होगा. समारोह जून में यार्कशायर काउंटी के ब्रैडफ़र्ड, लीड्स, शेफ़ील्ड, यॉर्क और हल शहरों में होगा. इसी सिलसिले में आइफ़ा के ब्रैंड एम्बैसडर अमिताभ बच्चन हाल ही में लंदन आए. अमिताभ बच्चन ने आइफ़ा से जुड़े कुछ पहलुओं पर बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत की. आइफ़ा समारोह क़रीब सात सालों से दुनिया के अलग-अलग देशों में हो रहा है. भारतीय सिनेमा को इससे किस तरह का फ़ायदा पहुँचा है. भारतीय सिनेमा विदेशों में जा रहा है इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है. हमारी फ़िल्में भारत के बाहर और लोग भी देखें, उसकी प्रशंसा करें, उससे आमदनी हो- ये सिनेमा के लिए बहुत अच्छी बात होती है. आइफ़ा की वजह से बाहर की जनता भी हमारी फ़िल्में देख रही है-न केवल वो जो भारत से संबंधित हैं या भारत के निवासी रहे हैं, बल्कि विदेशों में रहने वाले ग़ैर भारतीय भी. इसी बहाने हमारे इतिहास, परपंराएँ, संगीत और कला का प्रदर्शन हो रहा है. इससे बढ़िया और क्या हो सकता है. आइफ़ा से जुड़ी कोई मधुर याद बताइए, जो बात आपको सबसे ज़्यादा पसंद हो. यादें तो बहुत सारी हैं. सात साल हो गए आइफ़ा से जुड़े हुए. मुझे हमेशा इस बात की चाह थी कि जो चीज़ें हम बनाते हैं उसे दूसरे देश के लोग भी देखें. जब कभी मैं बाहर कॉन्सर्ट्स में आता था तो यहाँ का उत्साह देखकर लगता था कि कुछ ऐसा होना चाहिए कि लोगों की प्यास को बुझाया जाए. तो आइफ़ा के साथ जुड़ी हुई बहुत सारी अच्छी-अच्छी यादें हैं. बस लोग इसी तरह हमें प्रोत्साहित करते रहें, अपना स्नेह और प्यार देते रहें, यादें भी इस तरह बढ़ती रहेंगी. विदेश में पूरा फ़िल्म उद्योग एक साथ इकट्ठा होता है. आपस में मिलने का मौक़ा भी मिल जाता होगा? बिल्कुल. इस समारोह के बहाने फ़िल्म उद्योग के लोगों को भी आपस में मिलने का मौक़ा मिलता है. ये सही है कि हम लोग सब एक ही शहर में रहते हैं, लेकिन कभी-कभी सालों-साल एक दूसरे से मिलना नहीं होता है. तो आइफ़ा ऐसी संस्था बन गई है जिसमें फ़िल्मी दुनिया से जुड़े लोगों को आपस में मिलने का अवसर मिल जाता है. भारतीय सिनेमा में तो कई भाषाओं की फ़िल्में आती हैं लेकिन आइफ़ा में ज़्यादातर हिंदी फ़िल्मों को ही शामिल किया जाता है. कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे में आइफ़ा को इंडियन इंटरनेशनल फ़िल्म अवार्ड कहना कहाँ तक सही है. ये सोचना थोड़ा सा ग़लत है. हम मानते हैं कि बाक़ी क्षेत्रों के सिनेमा को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए. कई बार हमने ऐसे कलाकारों को सम्मानित किया है जो केरल से रहे हैं, तमिलनाडू से रहे हैं. धीरे-धीरे हम इसको और बढ़ाएँगे. अभी तो हमने हिंदी सिनेमा को ही ज़्यादा रखा है. लेकिन धीरे-धीरे हम कोशिश करेंगे कि ये और आगे बढ़े और उसमें क्षेत्रीय सिनेमा भी शामिल होगा. इस बार आइफ़ा ब्रिटेन में हो रहा है. क्या लोग आपकी परफ़ॉर्मेंस देख पाएँगे? ये तो जब समारोह रहा तभी देखिएगा. अभी से क्या बताएँ. आप पिछले 30 सालों से फ़िल्म उद्योग में काम कर रहें, कई पुरस्कार जीत चुके हैं- फ़िल्में, टेलीविज़न, विज्ञापन....इतनी उर्जा, इतना उत्साह कहाँ से आता है. ये सब आप लोगों की वजह से होता है. आप लोग अपना स्नेह और प्यार देते रहते हैं और हम उत्साहित हो जाते हैं कि और काम करते रहें. |
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