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आँगन के पारःनारी शक्ति के कई अलग-अलग पहलू | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों पर चर्चा होती है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: 16वीं कड़ी आंगन के पार की इस कड़ी में चर्चा बच्चों के कुपोषण की. सरकारी आंकड़ो के हिसाब से भारत मे तीन साल तक के बच्चो की आधी आबादी कुपोषित है.आज से तीन दशक पहले शुरू हुई समेकित बाल विकास योजना भी क्या इस स्थिती से निपटने मे सफल नही रही.
क्या वजह है कि भारत इस मामले मे अफ्रीकी देशो से भी पिछड गया. इन्ही सवालो के साथ कार्यक्रम मे भाग लिया है महिला और बाल विकास मंत्रालय मे संयुक्त सचिव चमन कुमार , युनिसेफ की शीला वीर और लंबे समय से इस क्षेत्र मे काम कर रहे प्रमोद कुमार. कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही हैं रूपा झा. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: 15वीं कड़ी आँगन के पार की इस कड़ी में चर्चा मानव तस्करी ख़ासकर लड़कियों की तस्करी और उससे बढ़ते एचआईवी/एड्स के ख़तरे की.
आँकड़ों के हिसाब से इस तस्करी मे 60 से ज़्यादा प्रतिशत वैसी लड़कियाँ हैं जो 12 से 16 साल की है. इनमे से ज़्यादातर तस्करी देहव्यापार के लिए की गई है. और दूसरा आँकड़ा ये है कि ऐसी लड़कियों में से 85 प्रतिशत एचआईवी पॉज़िटिव हैं. कभी नौकरी, कभी शादी, कभी कुछ और बहाने से इन लड़कियों को एक ऐसी ज़िंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ता है जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी न की थी. इस पर चर्चा के लिए शामिल हैं मानव तस्करी के ख़िलाफ़ भारत मे संयुक्त राष्ट्र की मुहिम की अगुवाई कर रहे डॉ. पीएम नायर. कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही हैं रूपा झा. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: 14वीं कड़ी आँगन के पार की ताज़ा कड़ी मे चर्चा भारत मे घटते लिंग अनुपात की. हर हज़ार पुरूषों मे केवल नौ सौ तैतीस औरतें.
आख़िर इसका कारण सामाजिक है या फिर नई तकनीक ने लिंग परीक्षण कर कन्या भ्रूण का गर्भपात करवाना एक मुनाफ़े का व्यापार बना दिया है. क़ानून क्या कहता है? चर्चा मे भाग ले रहे हैं जाने-माने स्त्री रोग विशेषज्ञ और दशकों से इस विषय पर आवाज़ उठाते डॉ. पुनीत बेदी और एक दंपत्ति जिन्होंने लिंग परीक्षण करने के बाद गर्भपात तो करवा लिया लेकिन अब एक दूसरी कहानी कहना चाहते है. इन सभी सवालो के साथ ताज़ा कड़ी प्रस्तुत कर रही है रूपा झा. **************************************************** आँगन के पार: 13वीं कड़ी
आँगन के पार की ये कड़ी इस साल की आखिरी कड़ी है. और इसीलिए ख़ास और अलग. इसमे तीन वैसे मेहमान है जिनके लिए साल 2006 सफलता के नए मुकाम लेकर आया. इन तीन ख़ास मेहमान में ख़ास क्या है. क्या ये असली हैं या नकली- आप ख़ुद समझिए. कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही हैं रूपा झा. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: 12वीं कड़ी
आँगन के पार की ताज़ा कड़ी में कुछ अलग और कुछ विशेष. हर बार हम किसी एक मसले पर बातचीत करते है. लेकिन इस बार हमने सोचा क्यों ना आपसे आपकी ज़िंदगी के बारे में कुछ बातें की जाए जैसे पुराने दोस्त मिलकर करते है. और सुनिए कि इस बहाने हमने किन सिरो को छू लिया.... उत्तरप्रदेश के एक गाँव में ये बातचीत कर रही हैं बीबीसी हिंदी सेवा की प्रमुख अचला शर्मा. कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही हैं रूपा झा. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: 11वीं कड़ी
आँगन के पार के इस कार्यक्रम में चर्चा महिलाओं की प्रजनन संबंधी समस्याओं की और उसमें गर्भ निरोधक साधनों की भूमिका की. आख़िर गर्भ निरोधकों के इस्तेमाल की ज़िम्मेदारी अमूमन महिलाओं की क्यों मानी जाती है. चर्चा में भाग ले रहे हैं संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी यूएनएफ़पीए के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दिनेश अग्रवाल, जानीं-मानीं स्त्री रोग विशेषज्ञ मंजू पुरी और उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर से आई एक दाई झम्मन देवी. कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही हैं अनुराधा प्रीतम. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: दसवीं कड़ी
आँगन के पार की दसवीं कड़ी मे चर्चा क़ानून और महिलाओ की. जानेंगे कि क्या महिलाओ के अधिकारों की रक्षा के लिए बने ये क़ानून उन्हें सशक्त बनाते हैं. दहेज विरोधी क़ानून बने दशकों बीत गए फिर भी आज तक ये एक समस्या है. आख़िर कौन सी कड़ी कमज़ोर रह गई है. चर्चा में भाग ले रही है वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कवंलजीत देओल, जानीं-मानीं वकील कीर्ति सिंह और दहेज विरोधी क़ानून के तहत मामला दर्ज करने वाली चंद पहले लोगों में से एक सत्य रानी चड्ढा. प्रस्तुत कर रही हैं अनुराधा प्रीतम. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: नौवीं कड़ी आंगन के पार कार्यक्रम की नौवीं कड़ी में चर्चा विश्व एडस दिवस पर इस समस्या की. भारत मे बावन लाख लोग एचआईवी/एड्स के साथ जी रहे है.
ये संख्या बढती जा रही है.सरकार ने अपने लिए ये लक्ष्य रखा है कि 2007 तक वो इस बढती संख्या पर पूरी तरह काबू पा लेगी. लेकिन आज भी जो लोग इस बिमारी के साथ जी रहे है उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है समाज मे बेझिझक अपनी स्थिती के बारे में बात करने की. आज भी उन्हे भेद भाव का शिकार होना पड़ रहा है. विश्व एडस दिवस के लिए तैयार दो विशेष कार्यक्रमो की दूसरी और अंतिम कड़ी आपके सामने प्रस्तुत है. चर्चा मे भाग ले रहे एक एचआईवी पॉजिटिव दंपति और राष्ट्रीय एड्स कंट्रोल संस्थान की महानिदेशक सुजाता राव * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: आठवीं कड़ी आंगन के पार की आठवीं कड़ी में चर्चा विश्व एडस दिवस के बहाने इस भंयकर समस्या की.
आंगन के पार की यह कड़ी ख़ास है क्योंकि पहली दिसंबर यानी विश्व एड्स दिवस के लिए हमने दो विशेष कार्यक्रम तैयार किए है और ये कड़ी उन कार्यक्रमो का पहला अंक है. इसमे चर्चा हो रही है किस तरह यौनकर्मी और किन्नर समुदायों के लिए एच आई वी एड्स एक बड़ी चुनौती है. चर्चा मे हिस्सा ले रही है यौनकर्मी ज़रीना बेगम, किन्नर समुदाय का प्रतिनिधित्तव कर रही है लक्ष्मी जो अपने समुदाय के अधिकारो के लिए लंबे समय से काम कर रही है. इस क्षेत्र मे सरकार के कई प्रमुख नीति निर्धारित करने वाली एजेंसियो के साथ काम कर रहे जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता ड़ा सरजित जना ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया. प्रस्तुत कर रही है रूपा झा ******************************************************* आँगन के पार: सातवीं कड़ी
आंगन के पार की सातवीं कड़ी में चर्चा ग्रामीण इलाकों मे रोजगार के नए अवसर पैदा करने का दावा करते राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी क़ानून की. इस क़ानून को इस साल फ़रवरी में 200 जिलों में लागू किया गया. इस क़ानून को सरकार ने ऐतिहासिक बताया है. पर क्या इस क़ानून ने गाँवों देहातों मे लोगों को रोजगार दिया? महिलाओ के लिए इस क़ानून में क्या विशेष प्रावधान है और लोगो को इसके बारे मे कितनी जानकारी है? चर्चा में भाग ले रहे हैं केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता शंकर सिंह और शामिल है ग्रामीण लोगों की राय भी. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: छठी कड़ी
कला यूँ तो हमारी जिदगी के हर लम्हे मे शामिल है. लेकिन क्या ये केवल मनोरंजन का साधन है या फिर ये समुदायों को और खासकर औरतों को सशक्त भी करती है. इन सवालो पर एक दिलचस्प बातचीत हो रही है आंगन के पार की इस कड़ी में. चर्चा मे भाग लिया है राजनीतिज्ञ और बरसो से हस्तकला कारीगरो के लिए काम कर रही संस्था दस्तकारी हाट समिति की अध्यक्षा जया जेटली, जानी मानी लोक संगीत गायिका पदमश्री शारदा सिन्हा और रंगमंच से जुड़े नाट्य निर्देशक परेवज अख्तर ने. प्रस्तुत कर रही हैं रूपा झा... * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: पाँचवीं कड़ी
आँगन के पार की पाँचवीं कड़ी में चर्चा घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ बने क़ानून की. महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएँ बदलते समय के साथ कम नहीं हो रही है. भारत सरकार के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार हैं. लेकिन पिछले 25 अक्तूबर 2006 से घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ बने क़ानून को लागू कर दिया गया है लेकिन क्या इससे तस्वीर बदलेगी. क्या गाँव-देहातों में रहने वाली महिलाएँ इस क़ानून की मदद लेने की हिम्मत जुटा पाएँगी. इतने सारे क़ानून जो पहले से ही मौजूद हैं उसकी फ़ेहरिस्त मे जुड़ा एक और क़ानून क्या उम्मीद लेकर आया है. इस चर्चा मे भाग लिया है राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा गिरिजा व्यास और सामाजिक कार्यकर्ता कमला भसीन ने. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: चौथी कड़ी
आँगन के पार की चौथी कड़ी मे चर्चा महिला शिक्षा पर. यूँ तो भारतीय संविधान के अनुसार 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ़्त शिक्षा का प्रावधान है लेकिन क्या इस प्रावधान से शिक्षा की स्थिति कुछ बेहतर हुई है? आँकड़ों की बात करें तो भारत में केवल 40 प्रतिशत महिलाएँ साक्षर हैं. कोई आश्चर्य नहीं कि महिला शिक्षा की पायदान में सबसे निचले स्तर पर हैं. इसी विषय पर चर्चा हो रही है इस कड़ी में और ये पड़ताल की कोशिश है कि इतनी मुश्किलों के बावजूद कौन हैं जो अपनी हिम्मत पर आगे बढ रही है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: तीसरी कड़ी
भारत सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक़ पूरे भारत में पचास से ज़्यादा प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से कम में हो जाती है. बिहार-झारखंड में ये 71 प्रतिशत है. 21वीं सदी का एक कड़वा सच ये है कि आज भी बाल विवाह जारी है. तीसरी कड़ी में हम चर्चा कर रहे हैं कम उम्र में लडकियों की शादी और उससे उनके मानसिक और शारीरिक प्रभाव की. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: दूसरी कड़ी
भारतीय संविधान में स्थानीय प्रशासन मे एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है. कितनी भागीदारी हो रही है महिलाओ की पंचायती राज में. सरकारी आँकड़ो के अनुसार लगभग नौ लाख महिलाएँ आज पंचायती राज की अलग-अलग पायदान पर खड़ी होकर अपनी भागीदारी निभा रही हैं. इसी सवाल पर आँगन के पार की दूसरी कड़ी में दो वैसी महिलाओं को आंमत्रित किया गया जो बिहार की सीतामढ़ी और मधुबनी ज़िले से हैं. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * आँगन के पार: पहली कड़ी
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ख़ास तौर पर ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों, उनके स्वास्थ्य, उनके सशक्तिकरण और एचआईवी-एड्स पर चर्चा होती है. इस कार्यक्रम को गढ़ने की ज़िम्मेदारी उठाई है बारह वैसी महिलाओ ने जो पेशेवर पत्रकार तो नहीं हैं लेकिन आपके आसपास जो ज़िंदगी बसर होती है उसके ताने-बाने को वे बखूबी समझती हैं. कार्यक्रम के संपादन और प्रस्तुतिकरण रूपा झा कर रही हैं. हर शुक्रवार को बीबीसी हिंदी और आकाशवाणी के 22 चैनलो पर प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम की पहली कड़ी मे चर्चा हो रही है एचआईवी-एड्स की. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * |
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