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शुक्रवार, 22 दिसंबर, 2006 को 07:16 GMT तक के समाचार
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एक सार्थक विमर्श वाली फ़िल्म 'क्या तुम हो'
'क्या तुम हो' का दृश्य
'क्या तुम हो' मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी फ़िल्म है
पिछले दिनों केरल में हुए अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में प्रदर्शन के बाद अनीश अहलूवालिया की फ़िल्म 'क्या तुम हो' को कई अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों से न्यौता मिला है.

व्यावसायिक सिनेमा के समानांतर समाज के एक अनकहे सच को सामने लाती यह फ़िल्म अगले वर्ष केपटाउन में हो रहे एक फ़िल्म समारोह में दिखाई जाएगी.

इसके अलावा फ़िल्म को यूरोप और अमरीका के कई प्रतिष्ठित फ़िल्म समारोहों से भी निमंत्रण मिला है.

बीबीसी संवाददाता अनीश अहलूवालिया की फ़िल्म क्या तुम हो 21वीं सदी की भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी में अकेलेपन से जूझ रहे लोगों की कहानी है.

केरल में पिछले दिनों हुए अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में फ़िल्म के प्रदर्शन के बारे में उन्होंने बताया, "इस फ़िल्म को लोगों ने ख़ासा पसंद किया और फ़िल्म के प्रदर्शन के बाद से ही दुनिया के कुछ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों से फ़िल्म के प्रदर्शन के निमंत्रण मिल रहे हैं."

उन्होंने बताया कि समीक्षकों से लेकर दर्शकों तक इस फ़िल्म और इसके विषय को लेकर काफ़ी उत्साहित और प्रभावित नज़र आए.

केरल में इस अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह का आयोजन आठ से 15 दिसंबर के बीच किया गया था जिसमें देश और दुनिया के कई बड़े फ़िल्म निर्देशक अपने काम का प्रदर्शन करने पहुँचे थे.

फ़िल्म के बहाने

दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे मध्यवर्ग का एक हिस्सा ऐसा है जो बाज़ार और विकास की दौड़ में अकेला और अपरिचित-सा होकर रह गया है.

 जिन लोगों पर यह फ़िल्म आधारित है, वो तो मध्यवर्ग के भी हाशिए पर हैं. आज फ़िल्मों से ट्रेजेडी का दौर जा चुका है और अराजकता का दौर आ गया है. ऐसी स्थितियों के बीच हमने कोशिश की है कि कुछ आम चरित्रों की बात की जाए
अनीश अहलूवालिया, फ़िल्म निर्देशक

फ़िल्म के निर्देशक बताते हैं कि इस फ़िल्म के माध्यम से मध्यवर्ग के इसी हिस्से के सवालों, संबंधों और मानसिकता को सामने लाने की कोशिश की गई है.

अनीश बताते हैं, "हमने कोशिश की कि मध्यवर्ग पर आधारित इस सार्थक विषय पर ईमानदारी से काम किया जाए. यानी बाज़ार के दबाव और ज़बरदस्ती के बनावटीपन, ग्लैमर से अलग होकर कम से कम खर्च में एक फ़िल्म बने."

उन्होंने कहा, "जिन लोगों पर यह फ़िल्म आधारित है, वो तो मध्यवर्ग के भी हाशिए पर हैं. आज फ़िल्मों से ट्रेजेडी का दौर जा चुका है और अराजकता का दौर आ गया है. ऐसी स्थितियों के बीच हमने कोशिश की है कि कुछ आम चरित्रों की बात की जाए."

इस फ़िल्म में रजित कपूर, ज्योति डोगरा और हेमंत खेर मुख्य भूमिका में हैं. फ़िल्म में पटकथा, संवाद और निर्देशन अनीश अहलूवालिया का है.

अनीश लंबे समय से हिंदी और अंग्रेज़ी में नाटक लिखते और निर्देशित करते रहे हैं. इस फ़िल्म के निर्माता वसीम अहमद देहलवी हैं.

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