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रिश्तों की कहानी 'कभी अलविदा...' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया में तीन तरह के शादीशुदा युगल होते है. कुछ तो वो जिनकी शादी माता-पिता की मर्ज़ी से तय होती है. कुछ ऐसे होते है जिनमें प्यार होने के बाद अपनी इच्छा से विवाह होता है लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी है जो किसी न किसी मजबूरी के कारण शादी करते हैं. तेज़ रफ़्तार भागती ज़िदंगी में ऐसे लोगों के लिए परेशानी तब खड़ी होती है जब उन्हें किसी और से प्यार हो जाता है. यही विषय है करण जौहर की आने वाली फ़िल्म 'कभी अलविदा न कहना' का सोमवार को लंदन के एक होटल में आयोजित एक समारोह में इस फ़िल्म का संगीत भी जारी किया गया. 'कभी अलविदा न कहना' फ़िल्म का संगीत शंकर एहसान लॉय ने दिया है और गीत जावेद अख़्तर ने लिखे हैं. फ़िल्म में भावनाओं के झूले पर झूलते हर मूड के लिए गाने हैं. फ़िल्म का शीर्षक गीत 'कभी अलविदा न कहना' थोड़ा भावुक अंदाज़ में है तो नाच-गाने के लिए 'वेयर इज़ द पार्टी टुनाइट' है. एक गीत 'मितवा' की ख़ास तौर पर चर्चा हो रही है जिसे पाकिस्तानी गायक शफ़कत अमानत अली ने गाया है. बादशाह ख़ान इस फ़िल्म में बॉलीवुड के दो 'बादशाह' हैं. एक अमिताभ बच्चन और दूसरे शाहरुख़ बादशाह ख़ान. संगीत रिलीज़ समारोह में सभी की और ख़ासकर महिला प्रशसंको की नज़रें लगी थीं दरवाज़े पर. इंतज़ार था बादशाह ख़ान का. जब करण जौहर ने शाहरुख़ ख़ान को मंच पर आमंत्रित किया तो ऐसा लगा कि मरुस्थल में लोगों को पानी मिल गया है. 'कभी अलविदा न कहना' शाहरुख ख़ान की इस वर्ष रिलीज़ होने वाली पहली फ़िल्म होगी. इससे पहले उनकी एक वर्ष में ही काफ़ी फ़िल्में रिलीज़ होती रही हैं लेकिन पिछले वर्ष बॉक्स आफ़िस पर सिर्फ़ 'पहेली' आई और इस वर्ष 'कभी अलविदा न कहना' आने वाली है. तो क्या शाहरुख़ अब सोच समझकर गिनी-चुनी फिल्में ही कर रहे हैं. इस पर शाहरुख़ का कहना था कि पहले डेट्स की समस्या और फिर करण जौहर की तबीयत ख़राब हो जाने के कारण ये फ़िल्म समय से नहीं हो पाई. साथ ही वह कुछ समय अपने बच्चों के साथ बिताना चाहते थे, इसलिए फ़िल्मों में थोड़ा अंतराल आ गया था. शाहरुख़ के अनुसार इसके बाद से हर वर्ष उनकी तीन फ़िल्में प्रदर्शित होंगी. विषय जब फ़िल्म के निर्देशक करण जौहर से पूछा गया कि विदेशों में बसे भारतीयों पर ही फ़िल्म बनाने के पीछे क्या कोई ख़ास कारण छिपा है, तो जवाब में करण जौहर ने कहा, "मैं एनआरआई के लिए नहीं बल्कि हिंदुस्तानी दर्शकों के लिए ही फ़िल्में बनाता हूँ. फिर चाहे वो बिहार में हों या फिर न्यूयॉर्क में. मेरी फ़िल्में भावनात्मक विषयों पर होती है और भावनाओं को किसी एक परिधि में नहीं बाँधा जा सकता." फ़िल्म का संगीत जारी होने के बाद लोगों को अब फ़िल्म के प्रदर्शित होने का इंतज़ार है. बडे़-बड़े सितारों से सजी इस फ़िल्म को अगस्त महीने में रिलीज़ किए जाने की योजना है. करण जौहर और शाहरुख़ ख़ान दोनों ही ये उम्मीद कर रहे होंगे कि दर्शक उनकी फ़िल्मों को कभी अलविदा नहीं कहेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें पहेली को ऑस्कर में नामांकन नहीं31 जनवरी, 2006 | मनोरंजन अपनी सुंदरता का राज़ बताएँगे शाहरुख़12 सितंबर, 2005 | मनोरंजन 'शाहरूख़ ख़ान का एक सपना...'05 जून, 2005 | मनोरंजन वर्ष 2004 में मनोरंजन की दुनिया की तस्वीरें21 दिसंबर, 2004 | मनोरंजन अब स्वदेस लेकर आए हैं आशुतोष16 दिसंबर, 2004 | मनोरंजन शाहरुख़ ख़ान हैं न!07 मई, 2004 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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