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नई पीढ़ी को सलाम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी के 'जेनेरेशन नेक्स्ट' या भावी पीढ़ी प्रोजेक्ट के तहत पत्रिका का यह अंक नई पीढ़ी को समर्पित है. भारत की कुल आबादी की एक तिहाई युवा पीढ़ी है. यह वह वर्ग है जो आतुर है, उत्सुक है और उसे एक तलाश है. और यह तलाश सिर्फ करियर या रोज़गार के विभिन्न अवसरों की ही नहीं है. यह तलाश है अपने अस्तित्व, अपनी अस्मिता की. इस पीढ़ी के सामने कई चुनौतियाँ हैं. आर्थिक विकास, तकनीकी विकास और सामाजिक न्याय. जिन्हें वह बख़ूबी समझती है और उनका सामना करने को तत्पर है. यह पीढ़ी जागरूक है और उसे प्रलोभनों से बहलाया नहीं जा सकता है. उसे बच्चा कह कर उसकी बातों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. उसे गंभीरता से लिए जाने की ज़रूरत है क्योंकि भारत और देखा जाए तो दुनिया का विधान तय करने का काम उसी के कंधों पर आने वाला है. बीबीसी हिंदी डॉट कॉम ने भी नई पीढ़ी के महत्व को पहचानते हुए उसे पत्रिका के एक अंक को सजाने-संवारने की ज़िम्मेदारी सौंपी. हमारे इस अंक में सत्रह वर्षीय राजू कुमार अतिथि संपादक हैं. उनके संपादकीय मंडल के सदस्य हैं-नौ साल की अपूर्वा, 14 साल के सुनीश कुमार, 12 साल के रवि कुमार और 14 वर्षीय़ तनुज सिद्धार्थ. इन बच्चों ने एक पूरा दिन बीबीसी दिल्ली दफ़्तर में गुज़ारा और बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की टीम की मदद से रचनाओं का चयन किया और इस काम को बड़ी गंभीरता से अंजाम दिया. इस काम में उनका पूरा साथ दिया हमारे सहयोगी पाणिनी आनंद ने जिनके योगदान का उल्लेख करना मैं ज़रूरी समझती हूँ. इस युवा पीढ़ी को आपके प्रोत्साहन की ज़रूरत है. आपकी प्रतिक्रियाएँ हम अपने इस संपादकीय मंडल तक पहुँचाएँगे. लिखिए hindi.letters@bbc.co.uk पर. | इससे जुड़ी ख़बरें हर आने वाली पीढ़ी होगी ज़्यादा स्मार्ट07 दिसंबर, 2006 | पत्रिका 'धंधे का टेम है साब, खोटी मत करो न..'08 दिसंबर, 2006 | पत्रिका एक बाल कविता08 दिसंबर, 2006 | पत्रिका सेलफ़ोन, कंप्यूटर, वीडियो गेम, आइपॉड?...'नो सर'08 दिसंबर, 2006 | पत्रिका 'क्या इसलिए, कि मैं एक मुसलमान हूँ'08 दिसंबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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