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सद्दाम को 'फाँसी की सज़ा' का मंचन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन अपने देश में फाँसी की सज़ा से भले ही बच जाएं, लेकिन अगले महीने कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में उनका फाँसी पर लटकना तय है. कोलकाता की एक जात्रा यानी नाटक कंपनी उत्तम ओपेरा ने ‘फांसीर मंचे सद्दाम’ ( फाँसी के तख्ते पर सद्दाम) शीर्षक एक नाटक के मंचन की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं. नाटक के पोस्टरों में जार्ज बुश और सद्दाम हुसैन के भी चित्र हैं. दो दिसंबर से शुरू होने वाले इस बांग्ला नाटक के पहले पचास शो पूरी तरह बुक हो चुके हैं. इसी कंपनी ने चार साल पहले ‘अमेरिकार हाते बंदी बीर सद्दाम’ (अमेरिका के हाथों कैद वीर सद्दाम) नामक एक नाटक का भी मंचन किया था जो काफ़ी कामयाब रहा था. उत्तम ओपेरा के निर्देशक हाराधन राय कहते हैं, '' चार साल पहले हमारा नाटक काफ़ी कामयाब रहा था. इसलिए सद्दाम को फांसी की सज़ा होते ही हमने इसके मंचन का फ़ैसला कर लिया.'' वो दावा करते हैं,'' हमारे पास इस थीम पर नाटक के मंचन का एक्सक्लूसिव अधिकार है. हमने इस शीर्षक को पंजीकृत करा लिया है.'' लेकिन महानगर की कम से कम दो अन्य कंपनियां भी इसी थीम पर नाटक की तैयारियों में जुटी है. एक जात्रा कंपनी के मालिक सुनील विश्वास कहते हैं कि 'हम भी इसकी तैयारी कर रहे हैं.' हाराधन राय कहते हैं कि 'केबल टेलीविज़न और फ़िल्मों के बढ़ते प्रभाव के कारण इस विधा पर मंडराते ख़तरे का मुक़ाबला करने और लोगों को आकर्षित करने के लिए हम हमेशा नए थीम की तलाश में रहते हैं.' वे कहते हैं कि ‘हमारा मकसद पूरी तरह व्यावसायिक है. लेकिन इस नाटक में हम सद्दाम को एक ऐसे हीरो के रूप में दिखाएंगे जो अमरीकी अत्याचारों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करता है.’ नाटक का मुहल्ला कहा जाने वाले चित्तपुर इलाके में ज्यादातर नाटक कंपनियां राय की बातों का समर्थन करती हैं. भारी माँग बंगाल में वाममोर्चा की ओर से सद्दाम की फांसी के विरोध से नाट्य कंपनियों का मनोबल बढ़ा है और इसकी माँग काफ़ी बढ़ी है.
राय बताते हैं कि 'एक-एक शो की बुकिंग 50 से 70 हजार रुपए के बीच हो रही है और हमारे पहले पचास शो बुक हो चुके हैं.' नाटक में पर्दा उठते ही अदालत में सुनवाई का दृश्य होगा और कटघरे में सद्दाम नजर आएंगे. मुक़दमे की सुनवाई के बाद सद्दाम को फाँसी के तख्ते की ओर ले जाया जाता है. राय कहते हैं,'' अभी इस बात का फ़ैसला नहीं हुआ है कि मंच पर सद्दाम को फाँसी के फंदे पर लटका दिखाया जाए या नहीं. हो सकता है कि कुछ लोगों को यह अच्छा नहीं लगे. लेकिन इसका फ़ैसला अंतिम क्षणों में किया जाएगा.'' चार साल पहले सद्दाम की भूमिका निभाने वाले देवगोपाल बंद्योपाध्याय ही इस बार भी उस भूमिका में हैं. वे कहते हैं, '' यह तो मेरा पेशा है. मैं मांग के अनुरूप कोई भी भूमिका कर सकता हूं. शायद मेरी कद-काठी के कारण ही पिछली बार लोगों ने सद्दाम की भूमिका में मुझे काफ़ी पसंद किया था.'' फिलहाल तमाम कलाकार दिन-रात इसकी तैयारियों में जुटे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें नाटक लेखन प्रतियोगिता के दो विजेता10 नवंबर, 2006 | पत्रिका अब भी रास्ता दिखाता है पृथ्वी थिएटर 19 अगस्त, 2004 | पत्रिका भारत की प्राचीनतम नाट्यशाला पर विवाद21 फ़रवरी, 2006 | पत्रिका लंदन में पैर पसारता पंजाबी थियेटर19 दिसंबर, 2005 | पत्रिका मुंबई में बाल नाट्य महोत्सव की धूम14 मई, 2006 | पत्रिका गांधी-नायडू के पत्र व्यवहार पर नाटक 17 अगस्त, 2005 | पत्रिका काबुल के रंगमंच पर शेक्सपियर के रंग09 सितंबर, 2005 | पत्रिका 'हिंदी रंगमंच पीछे छूटता जा रहा है'26 जून, 2005 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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