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'रीमेक में समय के अनुसार बदलाव' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़िल्म निर्माता और निर्देशक रामगोपाल वर्मा कहते हैं कि वे 'शोले' का रीमेक बनाते हुए इसमें बदले हुए समय के साथ आए परिवर्तनों को शामिल करेंगे. वे मानते हैं कि ऐसा करना ज़रुरी भी है. ऐसे परिवर्तन वे अपनी ही फ़िल्म 'शिवा' को फिर से बनाते हुए ला रहे हैं. मुंबई में बीबीसी के लिए दुर्गेश उपाध्याय ने उनसे बात की. नई फ़िल्म ‘शिवा’ आपकी पुरानी ‘शिवा’ से कितनी अलग है? इससे पहले भी आपने पुलिस सिस्टम पर कई फ़िल्में बनाई हैं, जैसे ‘शूल’, ‘अब तल छप्पन’, ये फ़िल्म इन फ़िल्मों से किस मायने में अलग है? आपकी फ़िल्मों में अंडरवर्ल्ड पर काफ़ी फोकस किया जाता है ऐसा क्यों? आपकी फ़िल्मों में ‘डर’ को दिखाने का ढंग बिल्कुल अलग होता है? क्या आप ये मानते हैं कि इस तरह की फ़िल्में लोगों को अपील करती हैं?
क्यों नहीं? लोग इस तरह की फ़िल्में पसंद करते हैं. लोगों को ऐसी फ़िल्में अच्छी लगती हैं. हाँ, ये बात सही है कि मेरी फ़िल्में ‘डर’ को थोड़ा अलग अंदाज में पेश ज़रूर करती हैं. रामगोपाल वर्मा की ‘शोले’ के बारे में कुछ बताएं? इस फ़िल्म में आपने अमिताभ बच्चन को गब्बर सिंह की भूमिका के लिए चुना है? क्या आपकी आने वाली फ़िल्मों में उर्मिला मातोंडकर भी दिखेंगी? आने वाली फ़िल्मों के बारे में बताएं? |
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