| 'हॉलीवुड में भी नहीं बनी ऐसी फ़िल्म' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़िल्म 'सरकार' की कामयाबी के बाद शोले को नए अंदाज़ में बनाने की तैयारी कर रहे रामगोपाल वर्मा इन दिनों ‘माई वाइफ्स मर्डर’ की तारीफ़ें सुनकर फूले नहीं समा रहे. आख़िर ये फ़िल्म उनका बीस साल पुराना सपना जो है. हिंदी फ़िल्मों में इन दिनों कथानक को लेकर नए नए प्रयोगों का चलन तेज़ हो गया है. ‘माई वाइफ्स मर्डर’ यानी 'मेरी बीवी की हत्या' भी एक ऐसी ही फ़िल्म है जो आम हिंदी सिनेमा के चलताऊ खाँचे में नही बैठती. रामू (रामगोपाल वर्मा) के सहायक रहे जिजी फिलिप के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म की कहानी रामू के दिमाग की ही उपज है. रामू कहते हैं, "ये कहानी उस वक़्त से मेरे दिमाग में घूम रही है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था. उन दिनों मैं इस पर तेलुगु में उपन्यास लिखना चाहता था. लेकिन लिख नहीं पाया". रामू जैसा ही हाल अनिल कपूर का भी है. बतौर स्वंतत्र निर्माता ये उनकी पहली फ़िल्म जो है. हालाँकि इससे पहले वह अपने भाई बोनी कपूर के साथ मिल कर एक फ़िल्म बना चुके हैं, 'बधाई हो बधाई'. अनिल कपूर की ख़ुशी की दूसरी वजह इससे भी बड़ी है. वह मानते हैं कि इस फ़िल्म में उन्होंने अपने जीवन का सबसे अलग क़िस्म का अभिनय किया है. अनिल कहते हैं, "ये ऐसी भूमिका है जो किसी को भी अपने करियर में बमुश्किल एक दो बार ही मिलती है. मैं इसमें कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था. मैं सिगरेट पीना छोड़ चुका था लेकिन इस फ़िल्म में रवि तनाव में सिगरेट पीता है. इसलिए मैंने भी सिगरेट पीना फिर शुरु कर दिया". अनिल कपूर ने ये फ़िल्म रामगोपाल वर्मा की ‘आरजीवी फ़िल्म कंपनी’ के साथ बनाई है. पिछले सप्ताह रिलीज हुई इस फ़िल्म को समीक्षक सराह रहे है. रामगोपाल वर्मा का दावा है – ‘इस तरह की कोई फ़िल्म भारत या हॉलीवुड में भी अब तक नहीं बनी.’ अनिल कपूर मूलतः फ़िल्म निर्माता परिवार से हैं. उनके पिता सुरेंद्र कपूर और भाई बोनी कपूर की गिनती इंडस्ट्री के बड़े निर्माताओं में होती है लेकिन अनिल कपूर स्वतंत्र रूप से निर्माण के क्षेत्र में आने से अब तक कतराते रहे है.
अब ऐसा क्या हुआ कि रामू के साथ पहली फ़िल्म मिलते ही आनन-फानन में अनिल ने अपनी निर्माण कंपनी अनिल कपूर फ़िल्म कंपनी भी बना ली और फ़िल्म भी. अनिल कपूर इसके जवाब में कहते हैं, "ये स्क्रिप्ट सुनते ही लगा कि इससे जुड़ा जा सकता है और केवल बतौर अभिनेता ही नहीं बतौर निर्माता भी, सो निर्माता भी बन गया". ये फ़िल्म पति-पत्नी और दो बच्चों के एक मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी है. अपने काम में बेहद व्यस्त रहने वाला पति रवि (अनिल कपूर) अपनी झगड़ालू पत्नी शीला (सुचित्रा) की दिन रात की खटपट से परेशान है. दोनों के झगड़े आम बात हैं. पत्नी अपने पति पर लगातार शक करती रहती है लेकिन सीधा-सादा रवि सब कुछ बर्दाश्त करता है. एक दिन घर के अंदर झगड़े के बीच ही पत्नी गिर पड़ती है. सिर में चोट लगती है और फौरन उसकी जान चली जाती है. असल फ़िल्म इसके बाद ही शुरु होती है. हत्या के आरोप और दो बच्चों के साथ भाग रहा शख्स अब क्या करेगा और उसके दिमाग में क्या क्या चल रहा है...यही है – ‘माई वाइफ्स मर्डर’. इसमें अनिल कपूर, सुचित्रा कृष्णमूर्ति के साथ बोमन ईरानी और नंदना सेन मुख्य भूमिकाओं में हैं. इस फ़िल्म से अरसे बाद सुचित्रा की हिंदी फ़िल्मों में फिर वापसी हुई है. सुचित्रा ने मशहूर निर्देशक शेखर कपूर से शादी के बाद फ़िल्मजगत को अलविदा कह दिया था और लंदन में जा कर बस गई थीं. |
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